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इंदौर में मौत का तांडव: दूषित पानी से गई 23वीं जान, 13 मरीज अब भी ICU में लड़ रहे जिंदगी की जंग

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Indore contaminated water death: इंदौर के भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में दूषित पानी का कहर थमता नजर नहीं आ रहा है।

सोमवार को इस त्रासदी ने एक और बुजुर्ग की जान ले ली, जिससे मरने वालों की कुल संख्या अब 23 तक पहुंच गई है।

ताजा मामला 64 वर्षीय भगवानदास का है, जो पिछले 10 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे।

बताया जा रहा है कि दूषित पानी के संक्रमण के कारण उन्हें मल्टी ऑर्गन फेल्योर और गैंग्रीन जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा।

अस्पतालों में बढ़ती मरीजों की कतार

इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल और एमवाय (MY) अस्पताल में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है।

स्वास्थ्य विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, वर्तमान में 13 मरीज आईसीयू (ICU) में भर्ती हैं, जबकि 3 मरीज पिछले कई दिनों से वेंटिलेटर पर अपनी आखिरी सांसें गिन रहे हैं।

अब तक कुल 427 लोग इस संक्रमण की चपेट में आकर अस्पताल पहुंच चुके हैं, जिनमें से 385 को इलाज के बाद डिस्चार्ज किया जा चुका है, लेकिन 42 मरीज अब भी उपचाराधीन हैं।

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आंकड़ों में उलझी मौत की पहचान

खबर में एक और दुखद पहलू सामने आया है मृतकों की पहचान और उनके रिकॉर्ड को लेकर विरोधाभास।

हाल ही में कमला बाई नामक महिला की मौत हुई, जिसे परिजनों ने दूषित पानी का असर बताया, लेकिन प्रशासन ने उनके पुराने किडनी रोग का हवाला देते हुए इसे सरकारी आंकड़ों में शामिल करने से संकोच किया।

परिजनों का आरोप है कि आधार कार्ड पर पता दूसरा होने की वजह से इस मामले को भागीरथपुरा की त्रासदी से अलग दिखाने की कोशिश की जा रही है।

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इंदौर में दूषित पानी से अब तक इतनी मौतें

  1. सुमित्रा देवी 21 दिसंबर
  2. अशोकलाल पंवार 24 दिसंबर
  3. गोमती रावत 26 दिसंबर
  4. उर्मिला यादव 27 दिसंबर
  5. जीवनलाल बरेडे 28 दिसंबर
  6. सीमा प्रजापत 29 दिसंबर
  7. संतोष बिगोलिया 29 दिसंबर
  8. अव्यान साहू 5 माह 29 दिसंबर
  9. श्रवण खुपराव 29 दिसंबर
  10. रामकली 29 दिसंबर
  11. नंदलाल 30 दिसंबर
  12. उमा कोरी 30 दिसंबर
  13. मंजूला वाढ़े 30 दिसंबर
  14. ताराबाई 30 दिसंबर
  15. हीरालाल 31 दिसंबर
  16. अरविंद लिखार 1 जनवरी
  17. गीताबाई 1 जनवरी
  18. हरकुंवर बाई 1 जनवरी
  19. शंकर भैया 1 जनवरी
  20. ओमप्रकाश शर्मा 5 जनवरी
  21. कमला बाई 9 जनवरी
  22. सुनीता वर्मा 10 जनवरी
  23. भगवानदास 12 जनवरी

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जमीन पर राहत कार्य और प्रशासन की दौड़-भाग

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने खुद मोर्चा संभाला है।

रविवार को उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए।

इलाके में ड्रेनेज लाइनों की सफाई, गाद हटाने और सरकारी बोरिंग में क्लोरिनेशन (Chlorination) सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं।

प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग की 50 टीमें तैनात की हैं, जो घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं।

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अब तक 924 घरों में ओआरएस (ORS) के पैकेट और जिंक की गोलियां बांटी गई हैं।

लाउडस्पीकर के जरिए लगातार मुनादी करवाई जा रही है कि लोग पानी को उबालकर और छानकर ही पिएं।

जनता में दहशत का माहौल

भागीरथपुरा के निवासी अब नल के पानी पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।

लोग मजबूरन आरओ वाटर, बोतलबंद पानी या निजी बोरिंग का सहारा ले रहे हैं।

29 दिसंबर को शुरू हुआ यह सिलसिला अब एक बड़ी मानवीय त्रासदी का रूप ले चुका है, जिसने शहर की जल वितरण प्रणाली और स्वच्छता प्रबंधन पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

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