Umang Singhar Indore Water Crisis: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर की स्वच्छता की मिसाल पूरे देश में दी जाती थी लेकिन अब इसी स्वच्छता पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
शहर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई 20 मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार होने के बाद इंदौर की स्वच्छता सवालों के घेरे में है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस पूरे मामले को लेकर प्रदेश सरकार और इंदौर नगर निगम पर तीखे बयान दिए हैं।
स्वच्छता अवॉर्ड्स पर सवालिया निशान
भोपाल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उमंग सिंघार ने इंदौर की ‘नंबर 1’ रैंकिंग पर ही सवाल खड़े कर दिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर ने लगातार 8 बार जो स्वच्छता अवॉर्ड हासिल किए हैं, वे जमीनी हकीकत पर नहीं बल्कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीते गए हैं।
VIDEO | Bhopal: Madhya Pradesh LoP Umang Singhar speaking about Indore water contamination issue says, “Indore keeps receiving awards. How are officials getting these awards? Does a common person not have the right to clean drinking water? The government takes money and taxes… pic.twitter.com/dnqhsigx4g
— Press Trust of India (@PTI_News) January 8, 2026
सिंघार ने तंज कसते हुए कहा कि जिस शहर में लोगों के नलों से “जहर” जैसा पानी निकल रहा हो और जहां पानी पीने से मासूमों की जान जा रही हो, वह शहर स्वच्छता में नंबर वन कैसे हो सकता है?
उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारी भी इस सच से वाकिफ हैं कि अवॉर्ड पाने के लिए फाइलों को किस तरह तैयार किया गया था।
प्रशासनिक लापरवाही या ‘कत्ल’?
सिंघार ने इंदौर के भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में फैली बीमारी को महज एक हादसा मानने से इनकार कर दिया।
उन्होंने इसे “प्रशासनिक हत्या” करार देते हुए मांग की कि नगर निगम कमिश्नर के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (धारा 304) का मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
इंदौर की भागीरथपुरा सहित कई कॉलोनियों में दूषित पेयजल से अब तक 20 नागरिकों की मृत्यु हो चुकी है। वॉटर सैंपल में पानी पीने योग्य नहीं पाया गया, फिर भी सप्लाई जारी है यह गंभीर प्रशासनिक अपराध है।
मैं माननीय मुख्यमंत्री से पत्र के माध्यम से तत्काल स्वच्छ जल आपूर्ति, त्वरित वॉटर… pic.twitter.com/SWTnTZ1FQo
— Umang Singhar (@UmangSinghar) January 8, 2026
इसके साथ ही उन्होंने इंदौर के महापौर (मेयर) के इस्तीफे की भी मांग की है।
उनके अनुसार, यह पूरी घटना भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का नतीजा है।
सिंघार ने आरोप लगाया कि पिछले ढाई साल से शहर में पाइपलाइन डालने का काम सिर्फ इसलिए अटका रहा क्योंकि अधिकारी और नेता कमीशन तय नहीं कर पा रहे थे।
उन्होंने सवा सौ करोड़ रुपये के फर्जी टेंडर और बिलों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कागजों पर एक ही दिन में 5-5 किमी सीवेज लाइन बिछाने का दावा किया गया, जो तकनीकी रूप से असंभव है, लेकिन फिर भी करोड़ों का भुगतान कर दिया गया।
कलेक्टर, कमिश्नर और एसपी का स्थान जनता के बीच होना चाहिए, न कि किसी आरएसएस संगठन के कार्यालय में। संविधान के अनुसार अधिकारियों का दायित्व निष्पक्ष रहना और जनता के प्रति जवाबदेह होना है किसी दल या संगठन के प्रति नहीं। यह लोकतंत्र और प्रशासनिक मर्यादा के लिए गंभीर सवाल खड़े करता… pic.twitter.com/VruyOXjOdP
— Umang Singhar (@UmangSinghar) January 8, 2026
नर्मदा जल और ‘मल’ का मिश्रण
नेता प्रतिपक्ष ने बेहद गंभीर खुलासा करते हुए कहा कि सरकारी जांच में ही यह बात सामने आई है कि सप्लाई के पानी में ऐसे बैक्टीरिया मिले हैं जो मानव मल (fecal matter) में पाए जाते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोगों को सीवेज मिश्रित पानी पिला रही है।
सिंघार ने कहा कि साल 2018 में ही कैग (CAG) ने पानी के सैंपल्स में गड़बड़ी की चेतावनी दी थी, लेकिन सरकार सोती रही।
आज स्थिति यह है कि बोरिंग के पानी में भी सीवेज का पानी रिसकर मिल चुका है, जिससे आने वाले समय में और भी भयानक जल-संकट खड़ा हो सकता है।
सरकारी फ़िल्टर प्लांट काम नहीं कर रहे हैं, कई जगह पानी में कीड़े निकल रहे हैं। दूषित पानी पीने से जनता की सेहत, यहाँ तक कि किडनी तक खराब हो रही है।
स्वच्छ पेयजल हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।
सरकार तुरंत संज्ञान ले, ताकि भागीरथपुरा जैसी त्रासदी दोबारा न हो
जनता की इंदौर… pic.twitter.com/XZeKGIwcw2— Umang Singhar (@UmangSinghar) January 8, 2026
पीड़ितों की अनदेखी और भ्रष्टाचार
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि जब वे पीड़ित परिवारों से मिलने इंदौर पहुंचे, तो प्रशासन ने सहयोग करने के बजाय इलाकों को पुलिस छावनी में बदल दिया।
सिंघार ने सवाल किया कि क्या सरकार मौतों का असली आंकड़ा और अपनी नाकामी छिपाना चाहती है?
उन्होंने कहा कि एक तरफ अधिकारियों के आलीशान बंगले बन रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम जनता को बुनियादी जरूरत यानी साफ पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।
इंदौर के कनाडिया क्षेत्र में पानी की टंकी की जर्जर हालत नगर निगम के कुप्रबंधन और बदहाल व्यवस्था की सच्चाई खुद बयां कर रही है।
जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ और बुनियादी सुविधाओं के प्रति लापरवाही बेहद चिंताजनक है।
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मुख्य मांगें और सुझाव
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में उमंग सिंघार ने सरकार के सामने निम्नलिखित मांगें रखीं:
- मुआवजा: मृतक के परिजनों को कम से कम 2 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।
- वॉटर ऑडिट: सिर्फ इंदौर ही नहीं, बल्कि भोपाल समेत पूरे प्रदेश के प्रमुख शहरों में ‘वॉटर ऑडिट’ कराया जाए ताकि पानी की शुद्धता सुनिश्चित हो सके।
- स्वयं की जांच: उन्होंने जनता से अपील की कि वे नगर निगम के भरोसे न रहें और अपने घर के नल व बोरिंग के पानी की जांच निजी स्तर पर जरूर कराएं।
- कठोर कार्रवाई: दोषी अधिकारियों को सिर्फ सस्पेंड न किया जाए, बल्कि उन पर एफआईआर दर्ज कर जेल भेजा जाए।


