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भागीरथपुरा कांड: उमंग सिंघार का बड़ा आरोप, इंदौर ने फर्जी कागजों के दम पर जीते 8 स्वच्छता अवॉर्ड

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Umang Singhar Indore Water Crisis: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर की स्वच्छता की मिसाल पूरे देश में दी जाती थी लेकिन अब इसी स्वच्छता पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

शहर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई 20 मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार होने के बाद इंदौर की स्वच्छता सवालों के घेरे में है।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस पूरे मामले को लेकर प्रदेश सरकार और इंदौर नगर निगम पर तीखे बयान दिए हैं।

स्वच्छता अवॉर्ड्स पर सवालिया निशान

भोपाल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उमंग सिंघार ने इंदौर की ‘नंबर 1’ रैंकिंग पर ही सवाल खड़े कर दिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर ने लगातार 8 बार जो स्वच्छता अवॉर्ड हासिल किए हैं, वे जमीनी हकीकत पर नहीं बल्कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जीते गए हैं।

सिंघार ने तंज कसते हुए कहा कि जिस शहर में लोगों के नलों से “जहर” जैसा पानी निकल रहा हो और जहां पानी पीने से मासूमों की जान जा रही हो, वह शहर स्वच्छता में नंबर वन कैसे हो सकता है?

उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारी भी इस सच से वाकिफ हैं कि अवॉर्ड पाने के लिए फाइलों को किस तरह तैयार किया गया था।

प्रशासनिक लापरवाही या ‘कत्ल’?

सिंघार ने इंदौर के भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में फैली बीमारी को महज एक हादसा मानने से इनकार कर दिया।

उन्होंने इसे “प्रशासनिक हत्या” करार देते हुए मांग की कि नगर निगम कमिश्नर के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या (धारा 304) का मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने इंदौर के महापौर (मेयर) के इस्तीफे की भी मांग की है।

उनके अनुसार, यह पूरी घटना भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का नतीजा है।

सिंघार ने आरोप लगाया कि पिछले ढाई साल से शहर में पाइपलाइन डालने का काम सिर्फ इसलिए अटका रहा क्योंकि अधिकारी और नेता कमीशन तय नहीं कर पा रहे थे।

उन्होंने सवा सौ करोड़ रुपये के फर्जी टेंडर और बिलों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कागजों पर एक ही दिन में 5-5 किमी सीवेज लाइन बिछाने का दावा किया गया, जो तकनीकी रूप से असंभव है, लेकिन फिर भी करोड़ों का भुगतान कर दिया गया।

नर्मदा जल और ‘मल’ का मिश्रण

नेता प्रतिपक्ष ने बेहद गंभीर खुलासा करते हुए कहा कि सरकारी जांच में ही यह बात सामने आई है कि सप्लाई के पानी में ऐसे बैक्टीरिया मिले हैं जो मानव मल (fecal matter) में पाए जाते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोगों को सीवेज मिश्रित पानी पिला रही है।

सिंघार ने कहा कि साल 2018 में ही कैग (CAG) ने पानी के सैंपल्स में गड़बड़ी की चेतावनी दी थी, लेकिन सरकार सोती रही।

आज स्थिति यह है कि बोरिंग के पानी में भी सीवेज का पानी रिसकर मिल चुका है, जिससे आने वाले समय में और भी भयानक जल-संकट खड़ा हो सकता है।

पीड़ितों की अनदेखी और भ्रष्टाचार

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि जब वे पीड़ित परिवारों से मिलने इंदौर पहुंचे, तो प्रशासन ने सहयोग करने के बजाय इलाकों को पुलिस छावनी में बदल दिया।

सिंघार ने सवाल किया कि क्या सरकार मौतों का असली आंकड़ा और अपनी नाकामी छिपाना चाहती है?

उन्होंने कहा कि एक तरफ अधिकारियों के आलीशान बंगले बन रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम जनता को बुनियादी जरूरत यानी साफ पानी के लिए तरसना पड़ रहा है।

मुख्य मांगें और सुझाव

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में उमंग सिंघार ने सरकार के सामने निम्नलिखित मांगें रखीं:

  • मुआवजा: मृतक के परिजनों को कम से कम 2 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।
  • वॉटर ऑडिट: सिर्फ इंदौर ही नहीं, बल्कि भोपाल समेत पूरे प्रदेश के प्रमुख शहरों में ‘वॉटर ऑडिट’ कराया जाए ताकि पानी की शुद्धता सुनिश्चित हो सके।
  • स्वयं की जांच: उन्होंने जनता से अपील की कि वे नगर निगम के भरोसे न रहें और अपने घर के नल व बोरिंग के पानी की जांच निजी स्तर पर जरूर कराएं।
  • कठोर कार्रवाई: दोषी अधिकारियों को सिर्फ सस्पेंड न किया जाए, बल्कि उन पर एफआईआर दर्ज कर जेल भेजा जाए।
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