India Iran Friendship: मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) में छिड़ी जंग के बीच भारत के लिए एक बहुत बड़ी और सुकून देने वाली खबर आई है।
ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध ने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं, लेकिन इस तबाही के बीच ईरान ने भारत को अपना ‘खास दोस्त’ बताते हुए एक बड़ा आश्वासन दिया है।
ईरान ने साफ कर दिया है कि दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को लेकर भारत को चिंता करने की जरूरत नहीं है।
भारत के लिए क्यों जरूरी है यह आश्वासन?
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से होर्मुज और ओमान की खाड़ी के पास भारत के करीब 27 जहाज फंसे हुए थे। इन जहाजों पर 753 भारतीय नाविक सवार थे।
युद्ध की स्थिति ऐसी थी कि न तो जहाज आगे बढ़ पा रहे थे और न ही पीछे हटना सुरक्षित था।
भारत में इन नाविकों के परिवार वाले डरे हुए थे और लगातार उनकी सलामती की दुआएं मांग रहे थे।
ईरानी राजदूत का बड़ा बयान
इसी बीच, नई दिल्ली में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने एक बयान जारी कर तनाव को कम कर दिया।
उन्होंने कहा, “भारत और ईरान के हित साझा हैं और हमारी तकदीर भी एक है। हम भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देंगे।”
इस बयान का असर तुरंत देखने को मिला और कुछ ही घंटों के भीतर भारतीय झंडे वाले दो जहाज सुरक्षित तरीके से होर्मुज पार कर गए।
समंदर में फंसी है 20,000 जिंदगियां
भले ही भारत को राहत मिल गई हो, लेकिन खाड़ी (Gulf) के हालात बेहद डरावने हैं।
इस वक्त वहां 2,000 से ज्यादा जहाज फंसे हुए हैं, जिन पर लगभग 20,000 नाविक मौजूद हैं।
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इसे आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा मानवीय संकट बताया है।
दुखद बात यह है कि इन फंसे हुए नाविकों में से 20 से 30 प्रतिशत भारतीय हो सकते हैं।
युद्ध के कारण ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया है। जिस रास्ते से पहले हर दिन 150 जहाज गुजरते थे, वहां से अब बमुश्किल 4-5 जहाज ही निकल रहे हैं।
पिछले एक महीने में 19 जहाजों पर हमले हुए हैं, जिनमें 10 नाविक अपनी जान गंवा चुके हैं।
जहाजों पर खाना और पानी खत्म हो रहा है। हालांकि सऊदी अरब और ओमान मदद की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन युद्ध के मैदान में राशन पहुंचाना जान जोखिम में डालने जैसा है।
28 फरवरी से अब तक
इस तबाही की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हवाई हमले शुरू किए थे।
देखते ही देखते यह जंग एक दर्जन देशों तक फैल गई।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई की मृत्यु के बाद ईरान ने और भी आक्रामक रुख अपना लिया है।
अब तक के आंकड़े रूह कंपा देने वाले हैं:
- ईरान: 1,900 से ज्यादा मौतें (जिनमें मिनाब शहर के स्कूल में मारी गईं 170 मासूम बच्चियां भी शामिल हैं)।
- लेबनान: 1,189 लोगों की जान गई।
- इराक: 99 लोगों की मौत।
- अमेरिका: 13 सैनिक मारे गए।
कुल मिलाकर अब तक 2,300 से ज्यादा लोग इस युद्ध की भेंट चढ़ चुके हैं।
भारत की सक्रिय कूटनीति
भारत इस मामले में मूकदर्शक नहीं बना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद ईरानी राष्ट्रपति से बात की है।
वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 28 फरवरी के बाद से अब तक चौथी बार ईरानी विदेश मंत्री से फोन पर चर्चा की है।
भारत सिर्फ अपने हितों की नहीं, बल्कि BRICS देशों के साथ मिलकर पूरे क्षेत्र में शांति बहाली की कोशिश कर रहा है।
भारत के लिए यह जंग सिर्फ खबरों तक सीमित नहीं है। यह हमारी ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) का मामला है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल इसी रास्ते से मंगाता है।
फिलहाल, भारत की ‘दोस्ती वाली कूटनीति’ काम कर रही है, लेकिन जब तक खाड़ी में आग शांत नहीं होती, खतरा टला नहीं है।
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