Mojtaba Khamenei Attack: खबर है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई एक इजरायली हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
यह हमला तब हुआ जब मुजतबा को उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद देश की सर्वोच्च सत्ता सौंपी गई थी।
इजरायली सेना (IDF) ने खुलेआम चुनौती दी है कि जो भी ईरान का नेतृत्व करेगा, वह उनके निशाने पर रहेगा।
कैसे हुआ हमला और क्या है ताजा स्थिति?
इजरायली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डिफ्रिन के बयानों से संकेत मिलते हैं कि इजरायल ने ईरान के धार्मिक और राजनीतिक केंद्र ‘कोम’ (Qom) शहर को निशाना बनाया है।
इजरायल का मुख्य लक्ष्य वह इमारत थी जहां ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ (88 सदस्यीय समिति जो सुप्रीम लीडर चुनती है) की बैठक हो रही थी।
🚨 BREAKING: Israeli media reports Mojtaba Khamenei was injured in an attack just 24 hours before his expected nomination as Iran’s next Supreme Leader, but he is still alive. pic.twitter.com/YAnJYYJiwM
— Globe Observer (@_GlobeObserver) March 7, 2026
इजरायल का मानना था कि इस समिति को खत्म करके ईरान के नेतृत्व को अपाहिज बनाया जा सकता है।
खबरों के मुताबिक, मुजतबा खामेनेई को हमले में गंभीर चोटें आई हैं।
हालांकि, वे अभी जिंदा बताए जा रहे हैं, लेकिन उनकी हालत गंभीर है।
ईरानी सरकारी मीडिया ने उन्हें ‘जानबाज’ कहकर संबोधित किया है, जिसका अर्थ है कि उन्होंने दुश्मन के हमले का सामना करते हुए चोट खाई है।
#BREAKING | Iran rains missiles on Israel, first Iranian attack after the appointment of Mojtaba Khamenei as Iran’s new supreme leader
NDTV’s @VishalV054 reports pic.twitter.com/A5gmFpElNo
— NDTV (@ndtv) March 9, 2026
मुजतबा खामेनेई कैसे बने सुप्रीम लीडर?
मुजतबा खामेनेई, ईरान के दिवंगत नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे हैं।
अयातुल्ला अली खामेनेई करीब 35 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे, जिनकी हाल ही में एक अमेरिकी-इजरायली हमले में मौत हो गई थी।
उनके निधन के बाद, ईरान की असेंबली ने आनन-फानन में मुजतबा को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया।
ईरान के कानून के अनुसार, इस पद पर बैठने के लिए ‘अयातुल्ला’ की धार्मिक पदवी होना अनिवार्य है।

कौन हैं मुजतबा खामेनेई
- पूरा नामः मुजतबा हुसैनी खामेनेई
- जन्म: 8 सितंबर 1969 (मशहद, ईरान)
- ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं
- पत्नी: ज़हरा हद्दाद-आदेल (मृत्यु 2026)
- ईरान-इराक युद्ध में शामिल रहे। लो प्रोफाइल में रहते हैं।
- 2019 सरकार में कोई पद नहीं लिया।
- 2019 में अमेरिका ने बैन लगाया।
मुजतबा लंबे समय से पर्दे के पीछे रहकर देश की ताकतवर संस्था ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) के साथ तालमेल बिठा रहे थे।
लेकिन जैसे ही वे सत्ता के शिखर पर आए, इजरायल ने उन्हें ‘ढूंढकर मारने’ की अपनी कसम को पूरा करने की कोशिश शुरू कर दी।
🚨🇮🇷🇮🇱 Israeli reporter Amit Segal is flat out saying it was Israel, not the United States, that hit Khamenei’s compound in Tehran.
They dropped thirty bombs on the site, killing his military secretary and possibly some family members too.
Source: ClashReport https://t.co/C3vxgqpjhY pic.twitter.com/3CBxkY6M6f
— Mario Nawfal (@MarioNawfal) February 28, 2026
इजरायल और अमेरिका की रणनीति
इजरायल और अमेरिका ने पहले ही साफ कर दिया था कि वे ईरान के परमाणु ठिकानों और तेल भंडारों को तबाह करने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।
अली खामेनेई की मौत के बाद इजरायल ने चेतावनी दी थी कि ईरान बिना उनकी ‘सहमति’ या अंतरराष्ट्रीय नियमों के नया नेता नहीं चुन सकता।
जैसे ही मुजतबा के नाम का ऐलान हुआ, इजरायली वायुसेना ने सटीक हमले शुरू कर दिए।
इजरायल का लक्ष्य केवल सेना को कमजोर करना नहीं, बल्कि ईरान के मनोबल को तोड़ना है।
🚨🚨BREAKING NEWS 🚨
🇮🇱🇮🇷Israeli Officials Report Khamenei’s Son Wounded in Targeted Strike
Israeli officials have said that Mojtaba Khamenei, the son of Khamenei, was hurt in a planned attack.
Source: Open Source Intel https://t.co/W7z1pEBniw pic.twitter.com/en9QCS3Djv
— Core (SatoshiPlus) #BTC, #ETH & #BNB Believers (@corechaincrypto) March 7, 2026
भारत की चिंता और विदेश मंत्री का बयान
इस भीषण युद्ध के बीच भारत की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में बयान देते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा मोदी सरकार की पहली प्राथमिकता है।
अब तक लगभग 67,000 भारतीय नागरिकों को युद्धग्रस्त क्षेत्रों से सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।
जयशंकर ने स्वीकार किया कि ईरान के मौजूदा नेतृत्व से सीधे संपर्क करना इस समय काफी चुनौतीपूर्ण है, लेकिन भारत कूटनीति के जरिए शांति की अपील कर रहा है।
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और ऊर्जा सुरक्षा है।
ईरान का अगला कदम: वफादारी की शपथ
हमले और नेतृत्व के घायल होने की खबरों के बीच, ईरान की सरकारी एजेंसी IRNA ने घोषणा की है कि पूरे देश में मुजतबा खामेनेई के समर्थन में सभाएं की जाएंगी।
तेहरान के मशहूर ‘एन्केलाब स्क्वायर’ में लोगों को एकजुट होने के लिए कहा गया है ताकि वे नए नेता के प्रति अपनी वफादारी जता सकें।
ईरान इस समय अपनी जनता को एकजुट रखने और यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि वह इजरायली हमलों से झुकेगा नहीं।

क्या होगा आगे?
अगर मुजतबा खामेनेई की स्थिति और बिगड़ती है, तो ईरान में नेतृत्व का संकट और गहरा जाएगा।
वहीं इजरायल पीछे हटने को तैयार नहीं है।
दुनिया की निगाहें अब ईरान के पलटवार और अमेरिका की अगली चाल पर टिकी हैं।
क्या यह विश्व युद्ध का रूप लेगा या कूटनीति कोई रास्ता निकालेगी, यह आने वाले कुछ दिन तय करेंगे।
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