ISRO BlueBird Block-2 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक ऐतिहासिक मिशन लॉन्च करके दुनिया के दूरसंचार क्षेत्र में क्रांति लाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।
आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से LVM3-M6 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट, सीधे आम 4G/5G स्मार्टफोन को अंतरिक्ष से इंटरनेट और कॉल कनेक्टिविटी देगा।
इससे दुनिया भर में मोबाइल टावरों पर निर्भरता खत्म होने की संभावना बन गई है।

दुनिया का सबसे भारी कॉमर्शियल सैटेलाइट मिशन
इसरो ने अपने सबसे ताकतवर रॉकेट LVM3 के जरिए अमेरिकी कंपनी AST स्पेसमोबाइल का ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट सफलतापूर्वक लॉन्च किया।
इसका वजन लगभग 6,100 किलोग्राम है, जो भारत द्वारा अब तक लॉन्च किया गया सबसे भारी उपग्रह है।
इससे पहले इसी रॉकेट ने नवंबर में करीब 4,400 किलोग्राम के संचार उपग्रह CMS-03 को स्थापित किया था।
Science City of Andhra Pradesh (SCAP)
extends its heartfelt wishes for the successful launch of the Bahubali Mission LVM3-M6.#ISRO #LVM3M6 #BlueBirdBlock2 #DirectToMobile #NSIL #ScienceCityOfAndhraPradesh #GoAP pic.twitter.com/MXxteilxJ1— Science City of Andhra Pradesh (@ScienceCityAP) December 23, 2025
LVM3 रॉकेट स्वयं 640 टन वजनी है, जो इसे भारत का सबसे भारी लॉन्च वाहन बनाता है।
इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने इसे देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया पर इस सफलता को “भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक गौरवपूर्ण मील का पत्थर” करार दिया।
What a moment! Relive the #LVM3M6 liftoff highlights here:
For More information Visit:https://t.co/PBYwLU4Ogy
#LVM3M6 #BlueBirdBlock2 #ISRO #NSIL pic.twitter.com/hc4SoI5DI5— ISRO (@isro) December 24, 2025
कैसे काम करेगा यह सैटेलाइट? पूरी प्रक्रिया
ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 एक नेक्स्ट-जेनरेशन कम्युनिकेशन सैटेलाइट है, जिसे पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit – LEO) में स्थापित किया गया है। इसकी कार्यप्रणाली को समझना काफी् दिलचस्प है:
- एंटीना तैनाती: अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद सैटेलाइट का 223 वर्ग मीटर का विशाल और शक्तिशाली एंटीना खुल जाएगा।
- सीधा कनेक्शन: यह एंटीना सीधे जमीन पर मौजूद सामान्य 4G/5G स्मार्टफोन के सिग्नल को पकड़ेगा और उससे जुड़ेगा। यूजर के फोन को किसी खास एप या हार्डवेयर की जरूरत नहीं होगी।
- सिग्नल ट्रांसफर: फोन से निकला सिग्नल सैटेलाइट तक पहुंचेगा। सैटेलाइट उस सिग्नल को पृथ्वी पर स्थित एक ग्राउंड स्टेशन पर भेजेगा।
- नेटवर्क से जुड़ाव: ग्राउंड स्टेशन उस सिग्नल को मौजूदा मोबाइल नेटवर्क (जैसे Airtel, Vodafone) से जोड़ देगा और कॉल या डेटा रिक्वेस्ट को प्रोसेस करेगा।
- वापसी रास्ता: प्रोसेस होने के बाद जवाबी सिग्नल फिर से ग्राउंड स्टेशन से सैटेलाइट और सैटेलाइट से सीधे यूजर के फोन तक पहुंच जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया में मोबाइल टावर की कोई भूमिका नहीं होगी।
यह प्रणाली “स्पेस-बेस्ड मोबाइल नेटवर्क” का जीता-जागता उदाहरण है।
.@isro confirms successful separation of S200 boosters. LVM3, developed by ISRO, is a three-stage launch vehicle comprising two solid strap-on motors (S200), a liquid core stage (L110), and a cryogenic upper stage (C25).#LVM3M6 #BlueBirdBlock2 #ISRO #NSIL pic.twitter.com/HVHc7HjLHz
— All India Radio News (@airnewsalerts) December 24, 2025
मोबाइल टावर हटने से क्या बदलेगा? 5 बड़े फायदे
- हर जगह नेटवर्क की उपलब्धता: पहाड़, जंगल, रेगिस्तान और खुले समुद्र जैसे दूरदराज और दुर्गम इलाकों में भी हाई-स्पीड इंटरनेट और कॉल कनेक्टिविटी मिल सकेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल विभाजन कम होगा।
- आपदा प्रबंधन में मदद: बाढ़, भूकंप या तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान अक्सर जमीनी टावर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिससे संचार व्यवस्था ठप हो जाती है। सैटेलाइट-आधारित नेटवर्क ऐसी स्थितियों में भी लाइफलाइन का काम करेगा।
- कोई अतिरिक्त उपकरण नहीं: यूजर्स को सैटेलाइट कनेक्टिविटी के लिए कोई नया फोन, नया सिम कार्ड या कोई बाहरी एंटीना लगाने की जरूरत नहीं होगी। उनका मौजूदा स्मार्टफोन ही काम करेगा।
- नेटवर्क ऑपरेटर नहीं बदलने होंगे: AST स्पेसमोबाइल कंपनी के मुताबिक, इस सर्विस के आने के बाद भी यूजर्स को अपना मोबाइल नेटवर्क प्रदाता (जैसे Jio, Airtel) बदलने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। कंपनी का लक्ष्य दुनिया भर के 50 से ज्यादा मोबाइल ऑपरेटर्स के साथ सहयोग करना है।
- शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा का विस्तार: हर गांव-कस्बे तक विश्वसनीय इंटरनेट पहुंचने से ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन और ई-गवर्नेंस जैसी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी।
BREAKING: LAUNCHED | #LVM3M6 MAKES HISTORY
ISRO’s LVM3-M6 launches the 6,100 kg BlueBird Block-2 the heaviest payload ever from India
• 6,100 kg payload the heaviest ever launched by ISRO
• Features a gigantic 223 sq m antenna enabling direct 4G/5G connectivity. pic.twitter.com/lJlHSLWtfG— (@RoushanStartup) December 24, 2025
क्या वाकई मोबाइल टावर पूरी तरह खत्म हो जाएंगे?
यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में यह ट्रेडिशनल टावर-आधारित नेटवर्क का पूर्ण विकल्प नहीं, बल्कि एक पूरक तकनीक साबित होगी।
घने शहरी इलाकों में, जहां बड़ी आबादी को एक साथ हाई-स्पीड डेटा देना होता है, वहां जमीनी टावरों की भूमिका बनी रहेगी।
हालांकि, दूरदराज और कम आबादी वाले क्षेत्रों में सैटेलाइट नेटवर्क एक किफायती और कारगर समाधान हो सकता है।
AST कंपनी का लक्ष्य उन जगहों पर कनेक्टिविटी देना है जहां पारंपरिक नेटवर्क नहीं पहुंच पाते।
#WATCH | Sriharikota, Andhra Pradesh | ISRO’s LVM3 M6 mission lifts off from the Satish Dhawan Space Centre, carrying the BlueBird Block-2 satellite into orbit, as part of a commercial deal with U.S.-based AST SpaceMobile.
The mission will deploy the next-generation… pic.twitter.com/VceVBLOU5n
— ANI (@ANI) December 24, 2025
भारत के लिए क्यों है यह लॉन्च अहम?
- वाणिज्यिक सफलता: यह लॉन्च इसरो की वाणिज्यिक शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और AST स्पेसमोबाइल के बीच हुए एक वाणिज्यिक समझौते का हिस्सा है। यह वैश्विक वाणिज्यिक लॉन्च बाजार में भारत की बढ़ती भूमिका और भारी उपग्रह लॉन्च करने की क्षमता को प्रदर्शित करता है।
- तकनीकी कौशल: 6,100 किलोग्राम जैसे भारी पेलोड को सटीक कक्षा में स्थापित करना इसरो के इंजीनियरिंग कौशल का परिचायक है।
- अंतरिक्ष कूटनीति: एक अमेरिकी कंपनी के उपग्रह का सफल लॉन्च भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूती देता है।

चुनौतियां और आगे का रास्ता
हालांकि यह तकनीक काफी अच्छी है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं।
इनमें सैटेलाइट नेटवर्क की लागत, बड़े पैमाने पर यूजर्स को जोड़ने की क्षमता और लेटेंसी (सिग्नल में देरी) जैसे मुद्दे शामिल हैं।
AST कंपनी ने इससे पहले ब्लूबर्ड 1 से 5 तक के सैटेलाइट लॉन्च किए थे, जो अमेरिका और कुछ अन्य देशों में कवरेज दे रहे हैं।
नेटवर्क के विस्तार के लिए आगे और सैटेलाइट लॉन्च किए जाने की योजना है।

निष्कर्ष के तौर पर, ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 का सफल प्रक्षेपण न सिर्फ भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की एक बड़ी छलांग है, बल्कि यह वैश्विक संचार जगत के भविष्य की झलक भी दिखाता है।
एक ऐसा भविष्य जहां कनेक्टिविटी की कोई सीमा नहीं होगी और हर व्यक्ति, चाहे वह धरती के किसी भी कोने में हो, डिजिटल दुनिया से जुड़ा रहेगा।


