ISRO PSLV-C62 Failure: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए साल 2026 की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही।
सोमवार सुबह श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया PSLV-C62 मिशन अपने लक्ष्य तक पहुंचने में असफल रहा।
इसरो के इस 2026 के पहले ऑर्बिटल मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत की निगरानी क्षमताओं को नई ऊंचाई देना था, लेकिन ‘अन्वेषा’ (Anvesha) उपग्रह समेत 15 सैटेलाइट्स अंतरिक्ष की गहराइयों में भटक गए।
The PSLV-C62 mission encountered an anomaly during end of the PS3 stage. A detailed analysis has been initiated.
— ISRO (@isro) January 12, 2026
क्या हुआ लॉन्चिंग के दौरान?
सोमवार सुबह ठीक 10.17 बजे PSLV-C62 रॉकेट ने आसमान की ओर उड़ान भरी।
शुरुआत के कुछ मिनटों तक सब कुछ सामान्य रहा।
रॉकेट के पहले और दूसरे चरण (Stages) ने योजना के अनुसार काम किया।
लेकिन असली समस्या तब आई जब रॉकेट के तीसरे चरण (PS3) के अंत का समय आया।
इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार, मिशन को PS3 चरण के पूरा होते समय एक ‘असामान्य स्थिति’ का सामना करना पड़ा।
सरल भाषा में कहें तो रॉकेट अपने निर्धारित रास्ते से भटक गया।
ISRO PSLV C62 Anvesha launch stage 3 seems to have had some issue. It was seen tumbling.
Same stage failed last launch. Not sure of the mission now pic.twitter.com/0hte0uMMaX
— Gareeb Scientist (@gareebscientist) January 12, 2026
इसके परिणामस्वरूप, मिशन को जो गति और दिशा मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिल पाई और सैटेलाइट्स को उनकी कक्षा (Orbit) में स्थापित नहीं किया जा सका।
क्यों खास था ‘अन्वेषा’ सैटेलाइट?
इस मिशन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा EOS-09 ‘अन्वेषा’ सैटेलाइट था, जिसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया था।
इसे ‘भारत की दिव्य दृष्टि’ कहा जा रहा था क्योंकि यह हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग (HRS) तकनीक से लैस था।
- 100 से ज्यादा रंगों की पहचान: इंसानी आंखें केवल 7 बुनियादी रंग देख सकती हैं, लेकिन अन्वेषा सैटेलाइट प्रकाश के 100 से ज्यादा बारीक रंगों (स्पेक्ट्रल बैंड्स) को पहचानने की क्षमता रखता था।
- छिपे हुए दुश्मनों की पहचान: यह तकनीक इतनी उन्नत है कि घने जंगलों, झाड़ियों या बंकरों में छिपे सैनिकों और सैन्य साजो-सामान को उनके रंग और चमक (सिग्नेचर) के आधार पर पहचान सकती है।
- सैन्य और नागरिक उपयोग: अन्वेषा का उपयोग न केवल सीमाओं पर दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाना था, बल्कि यह मिट्टी के प्रकार, जंगलों की सेहत और पर्यावरण में होने वाले बदलावों को ट्रैक करने में भी सक्षम था।
#BREAKING: India opens its 2026 space calendar with the launch of the PSLV-C62 mission, as ISRO prepares to place an Earth observation satellite and 14 co-passenger satellites into orbit from Andhra Pradesh’s Sriharikota. pic.twitter.com/0WdigQ1j1F
— Aditya Raj Kaul (@AdityaRajKaul) January 12, 2026
प्राइवेट सेक्टर और विदेशी सहयोग को झटका
PSLV-C62 केवल इसरो का मिशन नहीं था, बल्कि यह भारत के उभरते हुए निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण था।
लॉन्च किए गए 15 सैटेलाइट्स में से 7 हैदराबाद की निजी कंपनी ‘ध्रुवा स्पेस’ द्वारा बनाए गए थे।
इसके अलावा, फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और यूके के 8 विदेशी उपग्रह भी इस रॉकेट का हिस्सा थे।
यह मिशन ‘न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड’ (NSIL) की देखरेख में हुआ था, जो इसरो की व्यावसायिक इकाई है।
इस विफलता से वैश्विक कमर्शियल मार्केट में इसरो की विश्वसनीयता पर दबाव बढ़ सकता है।
लगातार दूसरी विफलता: चिंता का विषय
यह पहली बार नहीं है जब PSLV के तीसरे चरण में समस्या आई है।
ठीक 8 महीने पहले, 18 मई 2025 को भी PSLV-C61 मिशन इसी तरह की तकनीकी खराबी के कारण विफल हो गया था।
लगातार दो मिशनों का एक ही चरण में फेल होना इसरो के लिए गहन मंथन का विषय है।
इसरो चीफ डॉ. वी नारायणन ने कहा है कि इस असामान्य स्थिति का विस्तृत विश्लेषण शुरू कर दिया गया है ताकि भविष्य में ऐसी गलतियों को दोहराया न जा सके।
VIDEO | Sriharikota: Sharing an update on the PSLV-C62/EOS-N1 mission, ISRO Chairman Dr. V. Narayanan says, “Today, we attempted the PSLV-C62 EOS-N1 mission. The PSLV vehicle is a four-stage vehicle with two solid stages and two liquid stages. The performance of the vehicle up to… pic.twitter.com/bq8Eh3rkyi
— Press Trust of India (@PTI_News) January 12, 2026
रिफ्यूलिंग तकनीक का अधूरा सपना
अगर यह मिशन सफल होता, तो भारत अंतरिक्ष में सैटेलाइट रिफ्यूलिंग तकनीक हासिल करने वाला दुनिया का दूसरा देश बन सकता था।
वर्तमान में केवल चीन ने इस क्षेत्र में सफलता पाई है।
अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित देश भी अभी इस तकनीक पर काम ही कर रहे हैं।
इस विफलता ने भारत के इस गौरवशाली मुकाम को कुछ समय के लिए टाल दिया है।
Meet PSLV-C62 – the 64th flight of PSLV and the 5th mission of the PSLV-DL variant.
Vehicle highlights: 44.4 m tall | Lift-off mass 260 t | 4 stages.
🗓️ 12 Jan 2026 | 🕘 09:48 IST onwards
🚀 Liftoff at 10:18:30 ISTLivestream link: https://t.co/fMiIFTUGpf
For more… pic.twitter.com/I9z16gQpsv
— ISRO (@isro) January 11, 2026
क्या है PSLV
PSLV को दुनिया के सबसे भरोसेमंद रॉकेटों में गिना जाता है।
इसी रॉकेट ने चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-L1 जैसे ऐतिहासिक मिशन पूरे किए हैं।
हालांकि, हालिया दो विफलताओं ने वैज्ञानिकों के सामने नई चुनौतियां पेश की हैं।
इसरो की टीम अब डेटा का विश्लेषण कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर तीसरी स्टेज में बार-बार गड़बड़ी क्यों हो रही है।
उम्मीद है कि भारत जल्द ही इन कमियों को दूर कर फिर से अंतरिक्ष में अपनी ‘दिव्य दृष्टि’ स्थापित करेगा।


