Toll Tax Hike 2026: अगर आप मध्य प्रदेश के निवासी हैं और अक्सर कार से जबलपुर, भोपाल या नागपुर जैसे शहरों के बीच सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है।
नए वित्तीय वर्ष यानी 1 अप्रैल से आपकी यात्रा का बजट बिगड़ने वाला है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने देश भर के साथ-साथ मध्य प्रदेश के प्रमुख नेशनल हाईवे पर टोल टैक्स की दरों में बढ़ोतरी करने का ऐलान कर दिया है।
यह वृद्धि सालाना समीक्षा (Annual Revision) के तहत की जा रही है।
किन रूट्स पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
जबलपुर एक प्रमुख केंद्र है, जहां से उत्तर, दक्षिण और पश्चिम की ओर जाने वाले कई नेशनल हाईवे गुजरते हैं।
इस फैसले के बाद जबलपुर से नागपुर (महाराष्ट्र), रायपुर (छत्तीसगढ़), प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) और राजधानी भोपाल जाने वाले यात्रियों को हर टोल प्लाजा पर पहले के मुकाबले अधिक पैसे देने होंगे।

अभी के टोल रेट्स की स्थिति:
- बरगी टोल (नागपुर रोड): ₹165
- सिहोरा टोल (प्रयागराज रोड): ₹130
- शहपुरा टोल (भोपाल रोड): ₹90
- बरेला टोल (रायपुर रोड): ₹35
1 अप्रैल से इन सभी रेट्स में 5 से 10 प्रतिशत तक की वृद्धि होने की संभावना है।
उदाहरण के तौर पर, जहाँ आप ₹165 देते थे, वहाँ अब आपको ₹5 से ₹15 तक अतिरिक्त चुकाने पड़ सकते हैं।
सालाना पास (Annual Pass) भी हुआ महंगा
नियमित यात्रियों के लिए NHAI एक खास सालाना पास की सुविधा देता है, जिसमें 200 टोल बूथ क्रॉस करने की छूट मिलती है।
वर्तमान में इस पास की कीमत ₹3,000 है। लेकिन 1 अप्रैल से इसकी कीमत बढ़कर ₹3,075 हो जाएगी।
यानी सीधे तौर पर ₹75 की बढ़ोतरी।
काम की बात: अगर आप 31 मार्च तक अपना सालाना पास रिन्यू करा लेते हैं या नया पास खरीदते हैं, तो आपको यह पुराने रेट यानी ₹3,000 में ही मिल जाएगा। 1 अप्रैल की सुबह से सिस्टम में नए रेट अपडेट हो जाएंगे।
कैसे तय होते हैं टोल के दाम?
कई लोगों के मन में सवाल होता है कि हर साल टोल क्यों बढ़ जाता है? दरअसल, इसके पीछे एक निर्धारित फॉर्मूला है।
टोल की दरें होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) यानी थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर तय की जाती हैं।
हर साल सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय इस इंडेक्स का आकलन करता है और उसी हिसाब से कीमतों में बदलाव किया जाता है।
इसके अलावा, टोल की राशि इस बात पर भी निर्भर करती है कि:
- सड़क की कुल लंबाई कितनी है।
- रास्ते में कितने फ्लाईओवर, अंडरपास, टनल या पुल बनाए गए हैं।
- जिस सड़क पर जितनी ज्यादा आधुनिक सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर होगा, उसका मेंटेनेंस चार्ज (टोल) उतना ही अधिक होगा।

जनता की नाराजगी: “टैक्स तो ले रहे, पर सड़क कहां है?”
एक तरफ सरकार टोल बढ़ा रही है, तो दूसरी तरफ वाहन मालिकों और आम जनता में खासा गुस्सा देखा जा रहा है।
चालकों का कहना है कि टोल बढ़ाना तब जायज है जब सड़कें अच्छी हों।
- भोपाल रोड की हालत: यात्रियों की शिकायत है कि जबलपुर से भोपाल जाने वाली सड़क कई जगहों पर खराब है, गड्ढे हैं, फिर भी वहां पूरा टोल वसूला जा रहा है।
- काम अधूरा, वसूली पूरी: जबलपुर-रायपुर रोड पर बरेला के आगे अभी भी निर्माण कार्य चल रहा है। लोगों का तर्क है कि जब तक हाईवे पूरी तरह बनकर तैयार न हो जाए, तब तक टोल की दरों में बढ़ोतरी करना गलत है।
- मेंटेनेंस का अभाव: वाहन मालिकों का आरोप है कि पूरे साल सड़कों की मरम्मत ठीक से नहीं की जाती, जिससे गाड़ियों में टूट-फूट बढ़ती है और सफर भी जोखिम भरा हो जाता है।
स्टेट हाईवे की स्थिति
जबलपुर से दमोह और सागर मार्ग को नेशनल हाईवे घोषित तो कर दिया गया है, लेकिन निर्माण कार्य पूरा न होने की वजह से ये अभी भी कागजों में स्टेट हाईवे की श्रेणी में ही आते हैं।
इसी तरह पाटन, तेंदूखेड़ा और गोटेगांव की सड़कों पर भी स्टेट हाईवे के अनुसार टोल लिया जा रहा है।
इन सड़कों पर फिलहाल NHAI की नई दरें लागू नहीं होंगी, लेकिन आने वाले समय में इनके भी अपग्रेड होने की उम्मीद है।
1 अप्रैल से होने वाली यह बढ़ोतरी भले ही छोटी लगे (₹5 से ₹10), लेकिन रोज सफर करने वाले ट्रांसपोर्टर्स और टैक्सी संचालकों के लिए यह बड़ा आर्थिक बोझ साबित होगी।
अगर आप भी अपनी जेब बचाना चाहते हैं, तो 31 मार्च से पहले अपने फास्टैग और सालाना पास की स्थिति जांच लें।
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