Sanjay Pathak illegal sand mining मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में रेत उत्खनन को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है।
विजयराघवगढ़ से बीजेपी विधायक संजय पाठक से जुड़ी चार कंपनियों पर स्वीकृत सीमा से अधिक रेत निकालने के आरोप में 443 करोड़ रुपये से अधिक का वसूली आदेश जारी किया गया है।
यह मामला विधानसभा में कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा के सवाल पर उछला, जिसके बाद खनिज विभाग ने लिखित जवाब दिया है।
कंपनियों की गड़बड़ी और सरकारी कार्रवाई
खनिज विभाग ने विधानसभा में दिए जवाब में स्वीकार किया है कि जबलपुर जिले की चार कंपनियों ने निर्धारित स्वीकृति से कहीं अधिक रेत का उत्खनन किया।
ये कंपनियां हैं:
- आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन (ग्राम टिकरिया)
- नीलिमा मिनरल्स (ग्राम दुबियारा)
- नीलिमा मिनरल्स (ग्राम अगरिया)
- पैसिफिक एक्सपोर्ट (ग्राम झिठी)

15 दिनों में राशि जमा करने का आदेश
जबलपुर कलेक्टर द्वारा गठित जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर इन पर कुल 443 करोड़, 4 लाख, 86 हजार, 890 रुपये की वसूली तय की गई है।
कलेक्टर ने 10 नवंबर 2025 को इन कंपनियों को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर राशि जमा करने का आदेश दिया है।
अगर कंपनियां समय सीमा में राशि जमा नहीं करती हैं, तो भू-राजस्व अधिनियम और खनिज नियम 2019 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
खनिज विभाग का कहना है कि वसूली न होने पर बैंक खाते कुर्क किए जा सकते हैं, मशीनरी जब्त की जा सकती है और खनन पट्टे रद्द किए जा सकते हैं।

विधायक का आरोप – ‘1000 करोड़ का खेल’
विधानसभा में यह मुद्दा उठाने वाले कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने इसे ‘1000 करोड़ के रेत माफिया का खेल‘ बताया है।
उनका आरोप है कि जिले में लंबे समय से रेत ठेकेदार संरक्षण में मनमानी कर रहे थे और राजस्व की वास्तविक हानि 1000 करोड़ रुपये से भी अधिक हो सकती है।
उन्होंने मांग की है कि सरकार को पूरे जिले के साथ-साथ अन्य जिलों में भी व्यापक ऑडिट कराना चाहिए।

ये गड़बड़ियां आईं सामने
कलेक्टर के आदेशों से पता चला है कि इन कंपनियों ने कई तरह की अनियमितताएं कीं:
- इन कंपनियों ने स्वीकृत मात्रा से कई गुना अधिक रेत का उत्खनन किया।
- रेत के परिवहन के दौरान जारी पर्चियों (टीपी) के मिलान में बड़ा अंतर पाया गया।
- नजदीकी घाटों से चोरी-छिपे रेत निकालकर दूसरे जिलों में भेजा जा रहा था।
कलेक्टर के आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह ‘ओवर माइनिंग’ यानी अतिरिक्त उत्खनन है, जिसके लिए नियम 194/2014 और कोर्ट के आदेशों के तहत आर्थिक दंड दिया जाना जरूरी है।

सख्त कार्रवाई का दावा
इस पूरे प्रकरण में सरकार की तरफ से ‘कड़ी कार्रवाई’ का दावा किया गया है।
खनिज विभाग ने कहा है कि वसूली आदेश जारी कर दिए गए हैं और नियमानुसार आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पूरे मामले की दोबारा जांच कराने और निगरानी तंत्र मजबूत करने की बात कही गई है।
यह मामला राज्य में खनन माफिया पर अंकुश लगाने के सरकार के दावों की एक बड़ी जांच की तरह है।
अब देखना यह है कि 15 दिन की समयसीमा के बाद कितनी राशि वसूल हो पाती है और कितनी कंपनियों के खिलाफ वास्तव में सख्त कार्रवाई होती है।


