Jan Vishwas Abhiyan Portal MP: मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य में जनता की समस्याओं का तेजी से समाधान करने और सरकारी अफसरों की मैदानी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक मजबूत डिजिटल व्यवस्था तैयार की है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘मंत्रालय’ (राज्य सचिवालय) से आधिकारिक तौर पर “जन विश्वास अभियान पोर्टल” की शुरुआत कर दी है।
यह नया पोर्टल राज्य के सभी जिला कलेक्टरों और प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी साप्ताहिक रिपोर्ट ऑनलाइन जमा करने के लिए एक केंद्रीय मंच प्रदान करता है।
इस पूरी व्यवस्था का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अफसर सिर्फ दफ्तरों में न बैठें, बल्कि सीधे जनता के बीच जाएं और उनकी समस्याओं का मौके पर ही निपटारा करें।

जन विश्वास अभियान: पहले ही महीने में बना रिकॉर्ड
मध्यप्रदेश में जन विश्वास अभियान की शुरुआत 7 अगस्त 2026 को की गई थी।
इस अभियान के चार हफ्ते पूरे हो चुके हैं और पहले ही महीने के आंकड़े काफी उम्मीद जगाने वाले हैं:
* सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline): अभियान के पहले 30 दिनों के भीतर सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज 5 लाख 64 हजार (5.64 लाख) से ज्यादा शिकायतों का सफलतापूर्वक समाधान किया जा चुका है।
* लोक सेवा गारंटी अधिनियम: इस कानून के तहत नागरिकों द्वारा जमा किए गए 8 लाख 6 हजार (8.06 लाख) से अधिक आवेदनों और सेवाओं का तय समय सीमा में निपटारा किया गया है।

इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी हफ्ते में कम से कम एक दिन खुद फील्ड में जा रहे हैं।
वे आम नागरिकों, व्यापारियों, छात्रों और समाज के अलग-अलग वर्गों से सीधा संवाद कर रहे हैं।
हर सोमवार को कलेक्टरों को देनी होगी रिपोर्ट
नए नियम और व्यवस्था के अनुसार, जिलों में होने वाली हर छोटी-बड़ी गतिविधि का पूरा हिसाब ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा:
* डेडलाइन: शुक्रवार तक जिले में जितने भी काम, निरीक्षण या जनसंवाद हुए हैं, उनकी पूरी रिपोर्ट संबंधित जिला कलेक्टर को अगले सोमवार तक अनिवार्य रूप से जन विश्वास पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।
* निगरानी की जिम्मेदारी: संभाग के संभागायुक्त (Divisional Commissioner) इसकी लगातार मॉनिटरिंग करेंगे। वे यह पक्का करेंगे कि हर सोमवार को उनके संभाग के सभी जिलों का डाटा समय पर पोर्टल पर आ जाए।
* विभागों की भागीदारी: राज्य सरकार के सभी प्रमुख विभागों को इस पोर्टल की लॉगिन आईडी दी जा रही है। अगर किसी जिले में कोई ऐसी समस्या आती है जिसका समाधान राज्य स्तर के हस्तक्षेप या समन्वय के बिना संभव नहीं है, तो उसे इस पोर्टल के जरिए तुरंत चिह्नित (Identify) किया जा सकेगा।

पोर्टल पर दर्ज की जाने वाली प्रमुख जानकारियां
पोर्टल पर केवल औपचारिकता पूरी नहीं की जाएगी, बल्कि अधिकारियों को विस्तृत और प्रमाणिक जानकारी जमा करनी होगी:
1. गतिविधियों और कार्यक्रमों का दायरा
पोर्टल पर अधिकारियों के फील्ड विजिट, सरकारी संस्थानों के निरीक्षण, आम जनता के साथ ‘जनसंवाद’, कारोबारियों व उद्यमियों के साथ ‘उद्यम संवाद’, युवाओं के साथ ‘यशस्वी संवाद’, मीडिया संवाद और इंफ्लुएंसर संवाद की पूरी रिपोर्ट दर्ज होगी।
इसके साथ ही जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों का ब्योरा भी दिया जाएगा।

2. फोटो अपलोड करना अनिवार्य
कलेक्टरों को रिपोर्ट जमा करते समय हर गतिविधि का प्रमाणिक फोटो भी अपलोड करना होगा।
* फोटो की साइज अधिकतम 1 MB हो सकती है।
* फोटो का फॉर्मेट JPG, JPEG या PNG होना चाहिए।
* फोटो ऐसी होनी चाहिए जो पूरे कार्यक्रम या निरीक्षण की वास्तविक स्थिति को दर्शाती हो।
3. 700 शब्दों में देना होगा संक्षिप्त विवरण
अफसरों को केवल आंकड़े ही दर्ज नहीं करने होंगे, बल्कि उन्हें अधिकतम 700 शब्दों में पूरी कार्रवाई का विवरण, बैठक में दिए गए निर्देश और मिले सुझावों को बिंदुवार (Bullet Points) दर्ज करना होगा।

4. आंकड़े और उपस्थिति का हिसाब
जनसंवाद या किसी भी कार्यक्रम के दौरान किस तारीख को आयोजन हुआ, किस अफसर ने उसका नेतृत्व किया, कार्यक्रम किस जगह पर हुआ, वहां कितने नागरिक या उद्यमी शामिल हुए और लोगों ने किस तरह की समस्याएं बताईं—इन सबका सटीक ब्योरा पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
नवाचार (Innovations) और राज्य स्तरीय नीतिगत सुझाव
सरकार का लक्ष्य सिर्फ शिकायतों का समाधान करना ही नहीं है, बल्कि बेहतर गवर्नेंस के तरीकों को पूरे प्रदेश में लागू करना है।
* नवाचार साझा करना: यदि किसी जिले के कलेक्टर ने जनहित में कोई नया और अनोखा प्रयोग (Innovation) किया है, तो उसे पोर्टल पर बुलेट पॉइंट में दर्ज किया जाएगा।
इससे अन्य जिलों के अधिकारी भी उस बेहतर मॉडल को अपने जिलों में लागू कर सकेंगे।

* नीतिगत सुझाव: जिलों के भ्रमण के दौरान अधिकारियों को यदि किसी सरकारी योजना या नीति में सुधार की जरूरत महसूस होती है, तो वे राज्य सरकार को भेजे जाने वाले सुझाव भी इसी पोर्टल के जरिए सीधे ऊपर पहुंचा सकेंगे।
इस पूरी व्यवस्था से मध्यप्रदेश में न केवल जनता की शिकायतों का समाधान तेज होगा, बल्कि प्रशासनिक काम में पारदर्शिता और जवाबदेही का एक नया दौर शुरू होगा।
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