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छात्रों को बड़ा झटका! JPSC की 22 परीक्षाओं पर रोक से मचा हड़कंप, झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार को घेरा

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Jharkhand High Court Stay on JPSC: झारखंड में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं और हाल ही में बहाल हुए अधिकारियों के लिए एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर आई है।

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसके तहत JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) की रद्द की गई परीक्षाओं को लेकर बड़ा कदम उठाया गया था।

गुरुवार को इस पूरे मामले की कोर्ट में अहम सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर अपनी स्थिति साफ करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

क्या था सरकार का फैसला और क्यों बढ़ा विवाद?

पूरा विवाद 17 अगस्त से शुरू हुआ, जब झारखंड सरकार ने JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रियाओं में हुए कथित भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों को देखते हुए 22 अलग-अलग परीक्षाओं को अचानक रद्द कर दिया था।

इनमें JPSC की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा और JSSC-CGL जैसी बेहद चर्चित परीक्षाएं शामिल थीं।

इतना ही नहीं, सरकार ने इस पूरे घोटाले की गहराई से जांच कराने के लिए मामले को CID के हवाले कर दिया था।

सरकार के इस एक फैसले से उन 2394 अधिकारियों और कर्मचारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई, जो इन्हीं परीक्षाओं के आधार पर पास होकर विभिन्न सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

रद्द की अधिसूचना जारी होते ही इन सभी अधिकारियों की नौकरियां अचानक खत्म मान ली गईं, जिससे एक बड़ा प्रशासनिक और मानवीय संकट खड़ा हो गया।

सड़कों पर उतरे युवा: ‘न्याय दो या फांसी दो’ के नारे

नौकरी छीने जाने से नाराज JSSC-CGL के जरिए नियुक्त हुए अभ्यर्थी और अन्य युवा सड़कों पर उतर आए हैं।

अपनी मांगों को लेकर वे लगातार धरने पर बैठे हैं।

विरोध प्रदर्शन का आलम यह है कि अभ्यर्थियों ने अपने गले में रस्सियां डालकर “न्याय दो या फांसी दो” के भावुक और तीखे नारे लगाए।

दूसरी तरफ, CDPO (महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी) समेत अन्य परीक्षाओं के अभ्यर्थी भी इस फैसले के खिलाफ अब अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं।

राज्य सरकार ने मंगलवार रात कुल 22 परीक्षाएं रद्द की थीं और 23 परीक्षाओं की जांच CID को सौंपी थी, जिसके बाद से पूरे राज्य के छात्रों में भारी असंतोष देखा जा रहा है।

उच्च शिक्षा मंत्री का बयान: ‘आंदोलन का अधिकार, नहीं होगी सख्ती’

छात्रों के बढ़ते आक्रोश के बीच राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार का बयान भी सामने आया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अपनी मांगों के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन और प्रदर्शन करना हर नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है।

मंत्री ने कहा कि सरकार ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कभी कोई बेवजह सख्ती नहीं बरती है।

अब भले ही जेएसएससी-सीजीएल के सफल अभ्यर्थी भी अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं, लेकिन उनके खिलाफ भी किसी तरह की दंडात्मक या सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी।

छात्रों की 5 बड़ी मांगें और 2 महीने का अल्टीमेटम

पिछले 26 दिनों से लगातार आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने अपनी 5 मुख्य मांगों को लेकर सरकार को दो महीने की मोहलत (अल्टीमेटम) दी है:

* मुआवजे की मांग: उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा के फिजिकल टेस्ट के दौरान जान गंवाने वाले मृत अभ्यर्थियों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए।

 * केस वापस हों: विधानसभा घेराव प्रदर्शन के दौरान निर्दोष छात्रों पर दर्ज किए गए सभी पुलिस केस तुरंत वापस लिए जाएं।

 * कमेटी में छात्र प्रतिनिधि: परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी में छात्रों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए, ताकि पूरी पारदर्शिता बनी रहे।

 * अन्य परीक्षाएं भी रद्द हों: JSSC PGT, नगरपालिका, माध्यमिक आचार्य, लैब असिस्टेंट और एक्साइज कांस्टेबल भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द कर नए सिरे से निष्पक्ष परीक्षाएं कराई जाएं।

 * कोर्ट में मजबूती से पक्ष: CID जांच के मामले में सरकार जल्द से जल्द कोर्ट में याचिका दायर करे और अभ्यर्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अपना पक्ष मजबूती से रखे।

छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि 2 महीने के भीतर उनकी ये मांगें नहीं मानी गईं, तो वे पूरे राज्य में एक बड़ा और तेज आंदोलन शुरू करेंगे।

पद्मश्री ने तुड़वाया अनशन, खुशी में जले पटाखे

दूसरी ओर, आंदोलन के बीच एक राहत भरी तस्वीर भी देखने को मिली।

पद्मश्री मधु मंसूरी ने भूख हड़ताल पर बैठे ‘JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच’ के छात्र नेताओं—रूपेश पाल, राहुल क्रांति और सबीता को अपने हाथों से जूस पिलाकर उनका अनशन खत्म करवाया।

इसके बाद, शाम के समय JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच और छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में सैकड़ों छात्रों ने जयपाल सिंह स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक एक विशाल ‘आभार यात्रा’ निकाली।

हाईकोर्ट के स्टे (रोक) की खबर और अनशन समाप्त होने की खुशी में छात्रों ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाया, पटाखे फोड़े और मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि वे अब खुशी-खुशी अपने घर लौट रहे हैं।

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