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केरल बना ‘केरलम’: मोदी कैबिनेट ने लगाई मुहर, जानें क्यों बदला गया आपके पसंदीदा राज्य का नाम?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Kerala name changed to Keralam: भारत के दक्षिण में स्थित खूबसूरत राज्य ‘केरल’ अब अपनी मूल पहचान की ओर लौट रहा है।

24 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया है।

केरल का नाम बदलकर अब आधिकारिक रूप से ‘केरलम’ (Keralam) कर दिया गया है।

यह फैसला सिर्फ एक नाम का बदलाव नहीं है, बल्कि करोड़ों मलयाली लोगों की भावनाओं, उनकी भाषा और उनकी संस्कृति का सम्मान है।

‘केरलम’ शब्द का असली अर्थ क्या है?

आप सोच रहे होंगे कि केरल का नाम क्यों बदला गया? दरअसल, ‘केरलम’ कोई नया नाम नहीं है।

मलयाली भाषा बोलने वाले लोग सदियों से इसे इसी नाम से पुकारते आए हैं।

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इस शब्द की उत्पत्ति को लेकर दो प्रमुख कारण माने जाते हैं:

  1. नारियल की भूमि: मलयालम में ‘केरा’ का अर्थ है ‘नारियल’ और ‘अलम’ का अर्थ है ‘भूमि’। चूंकि केरल में नारियल के पेड़ों की भरमार है, इसलिए इसे ‘केरलम’ यानी नारियल के पेड़ों की भूमि कहा जाता है।

  2. प्राचीन इतिहास: कई इतिहासकार मानते हैं कि यह नाम प्राचीन ‘चेर’ राजवंश से निकला है। मौर्य सम्राट अशोक के शिलालेखों में भी इस क्षेत्र को ‘चेरापुत्र’ कहा गया है। समय के साथ ‘चेरम’ शब्द ही बदलकर ‘केरलम’ हो गया।

‘केरल’ कैसे बना था आधिकारिक नाम?

आजादी के बाद जब 1 नवंबर 1956 को भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन हुआ, तब मालाबार, कोचीन और त्रावणकोर के क्षेत्रों को मिलाकर एक राज्य बनाया गया।

उस समय अंग्रेजी के प्रभाव और प्रशासनिक सुगमता के चलते इसे ‘Kerala’ (केरल) लिख दिया गया।

हिंदी और अंग्रेजी के सरकारी दस्तावेजों में यही नाम चलता रहा, जबकि वहां के स्थानीय लोग अपनी भाषा में इसे हमेशा ‘केरलम’ ही लिखते और बोलते रहे।

केंद्र ने ‘झटपट’ क्यों दी मंजूरी?

इस फैसले के पीछे राजनीतिक गलियारों में ‘मास्टरस्ट्रोक’ की चर्चा है। इसके तीन मुख्य कारण माने जा रहे हैं:

  • 2026 का विधानसभा चुनाव: केरल में अप्रैल-मई 2026 में चुनाव होने हैं। बीजेपी वहां अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है। इस प्रस्ताव को मानकर केंद्र ने मलयाली अस्मिता के प्रति अपना सम्मान दिखाया है।

  • विपक्ष का मुद्दा खत्म: केरल की वामपंथी सरकार (LDF) ने यह प्रस्ताव पास किया था। अगर केंद्र इसे लटकाता, तो विपक्ष इसे ‘मलयाली संस्कृति का अपमान’ बताकर चुनाव में बड़ा मुद्दा बना सकता था। केंद्र ने मंजूरी देकर यह गेंद वापस राज्य सरकार के पाले में डाल दी है।

  • सर्वसम्मति का सम्मान: राज्य विधानसभा ने जून 2024 में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पास किया था, जिसमें सत्तापक्ष और विपक्ष (कांग्रेस-बीजेपी) सब एक साथ थे। लोकतांत्रिक मर्यादा को देखते हुए केंद्र के पास इसे टालने का कोई ठोस कारण नहीं था।

नाम बदलने की संवैधानिक प्रक्रिया

कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब यह मामला संसद में जाएगा।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद को किसी भी राज्य का नाम बदलने का अधिकार है।

  1. राष्ट्रपति की सिफारिश के बाद संसद में एक विधेयक (Bill) पेश किया जाएगा।
  2. संसद के दोनों सदनों में साधारण बहुमत से पारित होने के बाद, संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन किया जाएगा।
  3. इसके बाद, संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में राज्य का नाम ‘केरलम’ दर्ज हो जाएगा।

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शशि थरूर का ‘भाषाई’ तंज

इस बदलाव के बीच तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने एक दिलचस्प सवाल उठाया है।

उन्होंने पूछा कि जो लोग अभी तक ‘केरलाइट’ (Kerallite) कहलाते थे, अब उन्हें क्या कहा जाएगा?

उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि ‘केरलमाइट’ सुनने में किसी कीटाणु जैसा लगता है।

उन्होंने सुझाव दिया कि नए नाम के लिए एक प्रतियोगिता आयोजित की जानी चाहिए।

कैबिनेट के अन्य महत्वपूर्ण फैसले

केरलम के नाम के अलावा, मोदी सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास के लिए 12,236 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दिखाई है:

  • श्रीनगर एयरपोर्ट: नए इंटीग्रेटेड टर्मिनल के लिए 1,667 करोड़ रुपये मंजूर।
  • रेलवे विस्तार: जबलपुर-गोंदिया, पुनारख-किऊल और गम्हरिया-चांदिल जैसी लाइनों के दोहरीकरण के लिए भारी निवेश।
  • अहमदाबाद मेट्रो: मेट्रो फेज 2B के विस्तार के लिए 1,067 करोड़ रुपये।
  • किसानों को राहत: जूट किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और 430 करोड़ रुपये का आवंटन।

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केरलम’ नाम को अपनाना भारत की उस विविधता और भाषाई गौरव का प्रतीक है जिसे प्रधानमंत्री मोदी अक्सर ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के मंच से दोहराते हैं।

अब देखना यह होगा कि यह सांस्कृतिक बदलाव आगामी चुनावों में राजनीतिक समीकरणों को किस तरह प्रभावित करता है।

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