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‘मोहम्मद’ दीपक विवाद: मुस्लिम दुकानदार को बचाने पर जिम ट्रेनर को मिल रही धमकियां? दहशत में परिवार

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Mohammad Deepak Bajrang Dal Controversy: उत्तराखंड के कोटद्वार के मोहम्मद दीपक विवाद ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

एक मुस्लिम दुकानदार के लिए बजरंग दल के कार्यकर्ताओं से भिड़ने वाले जिम ट्रेनर दीपक इन दिनों दहशत में जी रहे हैं।

दीपक को लगातार धमकियां मिल रही हैं। इसके वीडियो भी सामने आए हैं। इनमें एक शख्स कह रहा है कि दीपक कुमार तुम टारगेट पर हो।

आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला…

विवाद की शुरुआत: 26 जनवरी की वह घटना

बात गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी 2026 की है।

कोटद्वार के पटेल मार्ग पर ‘बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर’ नाम की एक दुकान है।

इसके मालिक 70 वर्षीय वकील अहमद हैं, जो पिछले 30 सालों से यह दुकान चला रहे हैं।

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उस दिन बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ता दुकान पर पहुंचे।

उनका विरोध दुकान के नाम में इस्तेमाल हुए ‘बाबा’ शब्द को लेकर था।

कार्यकर्ताओं का तर्क था कि ‘बाबा’ शब्द हिंदू धार्मिक आस्था का प्रतीक है (कोटद्वार में सिद्धबली बाबा का प्रसिद्ध मंदिर है) और एक मुस्लिम दुकानदार को इस नाम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

उन्होंने वकील अहमद पर दबाव बनाया कि वे अपनी दुकान के बोर्ड से यह शब्द तुरंत हटा दें।

कौन हैं ‘मोहम्मद दीपक’ और चर्चा में क्यों आए?

जब दुकान पर बहस बढ़ रही थी, तभी पास में ही जिम चलाने वाले दीपक कुमार वहां पहुंचे।

बुजुर्ग दुकानदार को भीड़ के बीच घिरे देख दीपक ने उनका पक्ष लिया और कार्यकर्ताओं को समझाने की कोशिश की।

इसी गर्मागर्मी के दौरान जब कार्यकर्ताओं ने दीपक से उनका नाम पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया— “मोहम्मद दीपक”

दीपक का कहना है कि उन्होंने यह नाम धर्म परिवर्तन के कारण नहीं, बल्कि उस समय दुकानदार के साथ एकजुटता दिखाने और यह संदेश देने के लिए कहा था कि इंसानियत का कोई एक धर्म नहीं होता।

यह वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, दीपक रातों-रात चर्चा में आ गए।

जहां एक वर्ग उन्हें ‘असली हीरो’ बता रहा है, वहीं हिंदूवादी संगठन उनसे नाराज हो गए।

‘जिसका काम, उसी का नाम’ अभियान क्या है?

इस पूरे विवाद के पीछे बजरंग दल का एक विशेष अभियान है, जिसे वे ‘जिसका काम, उसी का नाम’ कह रहे हैं।

बजरंग दल के देहरादून जिला संयोजक अमन स्वेदिया के अनुसार, यह अभियान पिछले 6 महीनों से पूरे उत्तराखंड में चलाया जा रहा है।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह है कि कोई भी व्यापारी अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर व्यापार न करे।

उनका कहना है कि अगर कोई मुस्लिम है, तो वह हिंदू देवी-देवताओं या हिंदू प्रतीकों के नाम पर दुकान न चलाए।

उनके अनुसार, यह “हिंदुत्व की पहचान का गलत इस्तेमाल” है।

31 जनवरी का हंगामा और धमकियां

विवाद यहीं नहीं थमा। 31 जनवरी को देहरादून और आसपास के इलाकों से करीब 150 बजरंग दल कार्यकर्ता कोटद्वार पहुंचे और दीपक के जिम के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन किया।

वीडियो में कुछ लोग दीपक को सीधे तौर पर ‘टारगेट’ करने की धमकी देते नजर आए।

हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को भारी बल तैनात करना पड़ा और फ्लैग मार्च निकालना पड़ा।

दीपक का कहना है कि इस हंगामे के बाद से उनका जिम बंद है, उनकी एलकेजी में पढ़ने वाली छोटी बेटी डर के मारे स्कूल नहीं जा पा रही है और उनका पूरा परिवार खौफ के साये में है।

राहुल गांधी और ओवैसी ने किया सपोर्ट

यह मामला स्थानीय स्तर से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंच गया है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दीपक का समर्थन करते हुए उन्हें ‘भारत का हीरो’ बताया और कहा कि वे संविधान और इंसानियत के लिए लड़ रहे हैं।

वहीं, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस घटना की निंदा की और दीपक का साथ दिया।

कानूनी कार्रवाई: तीन अलग-अलग FIR

पुलिस ने स्थिति को संभालने के लिए अब तक कुल तीन एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं:

  • पहली FIR: दुकानदार वकील अहमद की शिकायत पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के खिलाफ (धमकी और गाली-गलौज के आरोप में)।
  • दूसरी FIR: बजरंग दल की शिकायत पर दीपक कुमार और उनके साथी के खिलाफ (मारपीट, लूटपाट और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल के आरोप में)। बजरंग दल का आरोप है कि दीपक ने उनके 75 साल के बुजुर्ग कार्यकर्ता के साथ बदतमीजी की।
  • तीसरी FIR: पुलिस ने खुद दर्ज की है, जो 30-40 अज्ञात लोगों के खिलाफ चक्काजाम और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए है।

वर्तमान स्थिति और पुलिस का पक्ष

कोटद्वार के सीओ तुषार बोरा का कहना है कि इलाके में अब शांति है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस सोशल मीडिया की खबरों पर नहीं, बल्कि सबूतों के आधार पर जांच कर रही है।

दीपक की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर पुलिस ने कहा कि वे पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए तैयार हैं।

दीपक कुमार हालांकि इस बात से राहत महसूस कर रहे हैं कि उन्हें देश भर से समर्थन मिल रहा है, लेकिन वे यह भी कहते हैं कि जब तक उनका काम-धंधा सामान्य नहीं हो जाता और उनका परिवार सुरक्षित महसूस नहीं करता, तब तक वे असहज रहेंगे।

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अब जांच के बाद ही साफ होगा कि कानून की नजर में कौन दोषी है, लेकिन फिलहाल ‘मोहम्मद दीपक’ का मामला आपसी भाईचारे के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है।

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