Mohammad Deepak Bajrang Dal Controversy: उत्तराखंड के कोटद्वार के मोहम्मद दीपक विवाद ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
एक मुस्लिम दुकानदार के लिए बजरंग दल के कार्यकर्ताओं से भिड़ने वाले जिम ट्रेनर दीपक इन दिनों दहशत में जी रहे हैं।
दीपक को लगातार धमकियां मिल रही हैं। इसके वीडियो भी सामने आए हैं। इनमें एक शख्स कह रहा है कि दीपक कुमार तुम टारगेट पर हो।
आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला…
विवाद की शुरुआत: 26 जनवरी की वह घटना
बात गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी 2026 की है।
कोटद्वार के पटेल मार्ग पर ‘बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर’ नाम की एक दुकान है।
इसके मालिक 70 वर्षीय वकील अहमद हैं, जो पिछले 30 सालों से यह दुकान चला रहे हैं।

उस दिन बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ता दुकान पर पहुंचे।
उनका विरोध दुकान के नाम में इस्तेमाल हुए ‘बाबा’ शब्द को लेकर था।
कार्यकर्ताओं का तर्क था कि ‘बाबा’ शब्द हिंदू धार्मिक आस्था का प्रतीक है (कोटद्वार में सिद्धबली बाबा का प्रसिद्ध मंदिर है) और एक मुस्लिम दुकानदार को इस नाम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
उन्होंने वकील अहमद पर दबाव बनाया कि वे अपनी दुकान के बोर्ड से यह शब्द तुरंत हटा दें।
Location: Kotdwar, Uttarakhand
My name is Mohammad Deepak. Don’t bring up Hindu-Muslim issues here.
Members of the Bajrang Dal asked an elderly Muslim shopkeeper, who runs his shop under the name “Baba,” to change the name of his shop. When a man named Mohammed Deepak… pic.twitter.com/TEKcBzfj0Q
— The Muslim (@TheMuslim786) January 28, 2026
कौन हैं ‘मोहम्मद दीपक’ और चर्चा में क्यों आए?
जब दुकान पर बहस बढ़ रही थी, तभी पास में ही जिम चलाने वाले दीपक कुमार वहां पहुंचे।
बुजुर्ग दुकानदार को भीड़ के बीच घिरे देख दीपक ने उनका पक्ष लिया और कार्यकर्ताओं को समझाने की कोशिश की।
इसी गर्मागर्मी के दौरान जब कार्यकर्ताओं ने दीपक से उनका नाम पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया— “मोहम्मद दीपक”।
दीपक का कहना है कि उन्होंने यह नाम धर्म परिवर्तन के कारण नहीं, बल्कि उस समय दुकानदार के साथ एकजुटता दिखाने और यह संदेश देने के लिए कहा था कि इंसानियत का कोई एक धर्म नहीं होता।
यह वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, दीपक रातों-रात चर्चा में आ गए।
जहां एक वर्ग उन्हें ‘असली हीरो’ बता रहा है, वहीं हिंदूवादी संगठन उनसे नाराज हो गए।
Deepak, who fearlessly protected a Muslim shopkeeper from a violent Bajrang Dal mob, showed the kind of bravery our society needs.
Our group of friends wants to honor him. If anyone can share his contact, please do, we want to personally present him a token of appreciation.… pic.twitter.com/dULvkf9hsW
— Mohd Shadab Khan (@VoxShadabKhan) January 31, 2026
‘जिसका काम, उसी का नाम’ अभियान क्या है?
इस पूरे विवाद के पीछे बजरंग दल का एक विशेष अभियान है, जिसे वे ‘जिसका काम, उसी का नाम’ कह रहे हैं।
बजरंग दल के देहरादून जिला संयोजक अमन स्वेदिया के अनुसार, यह अभियान पिछले 6 महीनों से पूरे उत्तराखंड में चलाया जा रहा है।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह है कि कोई भी व्यापारी अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर व्यापार न करे।
उनका कहना है कि अगर कोई मुस्लिम है, तो वह हिंदू देवी-देवताओं या हिंदू प्रतीकों के नाम पर दुकान न चलाए।
उनके अनुसार, यह “हिंदुत्व की पहचान का गलत इस्तेमाल” है।
31 Jan 2026 – Kotdwar, Uttrakhand
Deepak (‘Mohammad Deepak’) defended elderly Muslim shopkeeper’s ‘Baba’ name → praised for harmony.Today Bajrang Dal members Gathered and arrived to confront him & Vijay Rawat.
Video: police pressure Deepak, not mob.@uttarakhandcops Protect… pic.twitter.com/bamAJJzeXO
— Fauzii (@fauzdar15) January 31, 2026
31 जनवरी का हंगामा और धमकियां
विवाद यहीं नहीं थमा। 31 जनवरी को देहरादून और आसपास के इलाकों से करीब 150 बजरंग दल कार्यकर्ता कोटद्वार पहुंचे और दीपक के जिम के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन किया।
वीडियो में कुछ लोग दीपक को सीधे तौर पर ‘टारगेट’ करने की धमकी देते नजर आए।
हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को भारी बल तैनात करना पड़ा और फ्लैग मार्च निकालना पड़ा।
दीपक का कहना है कि इस हंगामे के बाद से उनका जिम बंद है, उनकी एलकेजी में पढ़ने वाली छोटी बेटी डर के मारे स्कूल नहीं जा पा रही है और उनका पूरा परिवार खौफ के साये में है।
Mohammad Deepak who was trying to act smart by assaulting Bajrang dal workers.
Today, Bajrang Dal team reached his home and now he is running to save his life. 😹 pic.twitter.com/S6I86IcGWb
— Aarnav Sharma✨️ (@sunilaarnav) January 31, 2026
राहुल गांधी और ओवैसी ने किया सपोर्ट
यह मामला स्थानीय स्तर से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंच गया है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दीपक का समर्थन करते हुए उन्हें ‘भारत का हीरो’ बताया और कहा कि वे संविधान और इंसानियत के लिए लड़ रहे हैं।
उत्तराखंड के दीपक भारत के हीरो हैं।
दीपक संविधान और इंसानियत के लिए लड़ रहे हैं – उस संविधान के लिए जिसे BJP और संघ परिवार रोज़ रौंदने की साज़िश कर रहे हैं।
वे नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दुकान का जीवित प्रतीक हैं और यही बात सत्ता को सबसे ज़्यादा चुभती है।
संघ परिवार… pic.twitter.com/c1D4VHV5XO
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 1, 2026
वहीं, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस घटना की निंदा की और दीपक का साथ दिया।
कानूनी कार्रवाई: तीन अलग-अलग FIR
पुलिस ने स्थिति को संभालने के लिए अब तक कुल तीन एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं:
- पहली FIR: दुकानदार वकील अहमद की शिकायत पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के खिलाफ (धमकी और गाली-गलौज के आरोप में)।
- दूसरी FIR: बजरंग दल की शिकायत पर दीपक कुमार और उनके साथी के खिलाफ (मारपीट, लूटपाट और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल के आरोप में)। बजरंग दल का आरोप है कि दीपक ने उनके 75 साल के बुजुर्ग कार्यकर्ता के साथ बदतमीजी की।
- तीसरी FIR: पुलिस ने खुद दर्ज की है, जो 30-40 अज्ञात लोगों के खिलाफ चक्काजाम और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए है।
Meet Mohammad Deepak.
He flexes, confronts & assaults Bajrang Dal karyakartas while “defending” a Muslim shopkeeper in Kotdwar over “Baba” name.
When real Bajrang Dal youth reach his gym, he runs away like a coward.
Now cries: Life in danger, police biased, family abused. pic.twitter.com/uVf8oLFiKv
— Being Political (@BeingPolitical1) February 1, 2026
वर्तमान स्थिति और पुलिस का पक्ष
कोटद्वार के सीओ तुषार बोरा का कहना है कि इलाके में अब शांति है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस सोशल मीडिया की खबरों पर नहीं, बल्कि सबूतों के आधार पर जांच कर रही है।
दीपक की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर पुलिस ने कहा कि वे पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए तैयार हैं।
दीपक कुमार हालांकि इस बात से राहत महसूस कर रहे हैं कि उन्हें देश भर से समर्थन मिल रहा है, लेकिन वे यह भी कहते हैं कि जब तक उनका काम-धंधा सामान्य नहीं हो जाता और उनका परिवार सुरक्षित महसूस नहीं करता, तब तक वे असहज रहेंगे।

अब जांच के बाद ही साफ होगा कि कानून की नजर में कौन दोषी है, लेकिन फिलहाल ‘मोहम्मद दीपक’ का मामला आपसी भाईचारे के लिए एक बड़ी परीक्षा बन गया है।


