Ladli Bahna Yojana Survey: मध्य प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ अब अपने एक नए चरण में प्रवेश करने जा रही है।
योजना के सफलता पूर्वक तीन साल पूरे होने के बाद राज्य सरकार केवल इस बात से संतुष्ट नहीं होना चाहती कि हर महीने कितने खातों में पैसे भेजे गए, बल्कि अब सरकार इस योजना के वास्तविक सामाजिक और आर्थिक प्रभाव को गहराई से समझना चाहती है।
इसके लिए लगभग 1.25 करोड़ लाभार्थी महिलाओं के जीवन पर पड़े असर का विस्तृत सर्वेक्षण कराने की योजना बनाई गई है।

सरकारी आंकड़ों से आगे बढ़कर जमीनी हकीकत की तलाश
अब तक योजना की सफलता का आंकलन इस बात से होता रहा है कि कितने करोड़ रुपये खातों में ट्रांसफर किए गए या कितनी महिलाएं इससे जुड़ी हैं।
लेकिन सरकार अब एक कदम आगे बढ़कर यह देखना चाहती है कि इन पैसों ने महिलाओं की रोजमर्रा की जिंदगी को कितना बदला है।
- क्या हर महीने मिलने वाली आर्थिक मदद से महिलाएं पहले से अधिक आत्मनिर्भर बनी हैं?
- क्या बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और घर के स्वास्थ्य संबंधी खर्चों को पूरा करने में महिलाओं को राहत मिली है?
- सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि क्या अब घर के बड़े और जरूरी फैसलों में महिलाओं की आवाज को ज्यादा वजन मिल रहा है?
इन सभी सवालों के जवाब ढूंढने के लिए सरकार इस व्यापक अध्ययन की रूपरेखा तैयार कर रही है।

सर्वे की जिम्मेदारी किसे?
इस महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक अध्ययन की कमान ‘अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान’ (AIGGPA) को सौंपने की तैयारी है।
संस्थान आंकड़ों और जमीनी स्तर पर महिलाओं से सीधे संवाद के जरिए योजना का विश्लेषण करेगा।
तीन सालों के अनुभवों, बदलावों और चुनौतियों को आंकड़ों के साथ-साथ व्यवहारिक धरातल पर परखा जाएगा।
₹1000 से ₹1500 तक का सफर
लाड़ली बहना योजना की शुरुआत मार्च 2023 में हुई थी। शुरुआती दौर में योजना के तहत पात्र महिलाओं को 1000 रुपये प्रति माह दिए जाते थे।
इसके बाद, सितंबर 2023 में इस राशि को बढ़ाकर 1250 रुपये प्रति माह किया गया।
योजना को और अधिक प्रभावी बनाते हुए नवंबर 2025 से सहायता राशि को बढ़ाकर 1500 रुपये प्रति माह कर दिया गया।

लगातार बढ़ते इस वित्तीय सहयोग का परिवारों पर क्या असर पड़ रहा है, इसी की पड़ताल इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य है।
बैंक खाते से घर के आंगन तक पहुंचेगी जांच
इस अध्ययन का दायरा केवल बैंकों के ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेगा।
सर्वे करने वाली टीम सीधे महिलाओं के घर पहुंचेगी और उनकी दिनचर्या तथा वित्तीय स्थिति को समझेगी।
यह देखा जाएगा कि महिलाएं इस राशि का उपयोग किन कार्यों में कर रही हैं:
* दैनिक खर्च और बचत: क्या महिलाएं इन पैसों को घर के छोटे-मोटे सामान खरीदने में लगा रही हैं या फिर भविष्य के लिए कुछ बचत कर पा रही हैं?
* आपातकालीन स्थिति: क्या योजना से मिली राशि ने महिलाओं को अचानक आए छोटे-बड़े खर्चों या बीमारियों के समय किसी दूसरे के सामने हाथ फैलाने से बचाया है?
* आत्मनिर्भरता: क्या इस मदद से महिलाओं में अपना खुद का कोई छोटा काम या स्वरोजगार शुरू करने का हौसला बढ़ा है?

बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर प्रभाव
अध्ययन में एक विशेष वर्ग बच्चों की शिक्षा और सेहत से जुड़ा है।
सर्वे में यह देखा जाएगा कि क्या लाड़ली बहना योजना के पैसों से बच्चों की ट्यूशन फीस, किताबें, यूनिफॉर्म या पौष्टिक खान-पान पर खर्च बढ़ा है।
यदि महिलाओं को मिले पैसों का इस्तेमाल परिवार के स्वास्थ्य और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए हो रहा है, तो इसे योजना की बहुत बड़ी सामाजिक सफलता माना जाएगा।
घरेलू निर्णयों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
जब कोई व्यक्ति आर्थिक रूप से थोड़ा भी सक्षम होता है, तो समाज और परिवार में उसकी प्रतिष्ठा और बात की अहमियत बढ़ जाती है।
इस अध्ययन में यह भी परखा जाएगा कि क्या हर महीने मिलने वाले 1500 रुपये ने महिलाओं की घरेलू फैसलों में भूमिका को मजबूत किया है।
बच्चों के स्कूल के चयन, घर के बजट, बीमारी के इलाज और संपत्ति या जरूरी सामान की खरीद-बिक्री जैसे मामलों में अब महिलाओं की राय कितनी ली जा रही है, इसका भी गहराई से आंकलन होगा।

क्या कोई पात्र महिला छूट तो नहीं गई?
यह सर्वेक्षण केवल उन्हीं महिलाओं तक सीमित नहीं रहेगा जिन्हें लाभ मिल रहा है।
इसका एक प्रमुख पहलू उन महिलाओं की पहचान करना भी होगा जो योजना की पात्रता रखने के बावजूद इसका लाभ नहीं उठा पा रही हैं।
* क्या तकनीकी कारणों से उनके खातों में पैसे नहीं आ रहे?
* क्या दस्तावेजों की कमी या जागरूकता के अभाव के कारण वे वंचित हैं?
इन कमियों को पहचानकर योजना की पहुंच को 100% तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता ‘कैश ट्रांसफर’ का ट्रेंड
नकद सहायता योजनाओं का यह मॉडल सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है।
प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 तक देश के 15 से अधिक राज्यों में महिलाओं के लिए इसी तरह की प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण (DBT) योजनाएं चलाई जा रही थीं।
देश भर में लगभग 12 करोड़ महिलाएं इन योजनाओं से जुड़ी हैं और राज्य सरकारों द्वारा सालाना लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
महाराष्ट्र की ‘लाडकी बहीण’ और ओडिशा की ‘सुभद्रा योजना’ पर हुए अध्ययनों में यह पाया गया है कि नकद सहायता से महिलाओं के बैंक खातों में बचत बढ़ी है, डिजिटल लेनदेन में तेजी आई है और स्वास्थ्य-शिक्षा पर होने वाला खर्च बेहतर हुआ है।
मध्य प्रदेश का यह सर्वे भी इसी दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

नीति निर्माण में मददगार होगा यह सर्वे
यह अध्ययन सिर्फ एक रिपोर्ट बनकर नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य की सरकारी नीतियों का आधार बनेगा।
यदि रिपोर्ट में सकारात्मक परिणाम आते हैं, तो यह साबित होगा कि योजना ने महिलाओं को सही मायनों में सशक्त बनाया है।
वहीं, यदि कहीं कोई कमी या सुधार की गुंजाइश दिखती है, तो सरकार योजना के स्वरूप और क्रियान्वयन में जरूरी बदलाव कर सकेगी।
मुख्य बातें एक नज़र में (Key Highlights):
* कुल लाभार्थी: लगभग 1.25 करोड़ महिलाएं।
* वर्तमान सहायता राशि: ₹1500 प्रति माह (नवंबर 2025 से)।
* शुरुआती राशि व समय: ₹1000 प्रति माह (मार्च 2023 से शुरुआत)।
* सर्वे एजेंसी: अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान (AIGGPA)।
* मुख्य उद्देश्य: महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता, बच्चों की शिक्षा-स्वास्थ्य, घरेलू निर्णयों में भागीदारी और योजना से वंचित पात्र महिलाओं की पहचान करना।
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