Ladli Behna Yojana 32nd Installment: मध्य प्रदेश की करोड़ों महिलाओं के लिए 16 जनवरी का दिन बेहद खास है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव नर्मदापुरम जिले के माखननगर से ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ की 32वीं किस्त की राशि ट्रांसफर करने जा रहे हैं।
राज्य सरकार इस बार लगभग 1.25 करोड़ बहनों के खातों में 1836 करोड़ रुपये से अधिक की राशि भेजने वाली है।
हालांकि, जहां एक ओर किस्त आने वाली है, वहीं दूसरी ओर हजारों महिलाओं के लिए यह खबर मायूसी भरी भी है क्योंकि तकनीकी और विभागीय नियमों के चलते उनका नाम सूची से हटा दिया गया है।

क्यों कम हो रही है लाभार्थियों की संख्या?
आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले ढाई सालों में योजना से जुड़ी महिलाओं की संख्या में 5.70 लाख से अधिक की कमी आई है।
जब यह योजना शुरू हुई थी, तब लाभार्थियों का आंकड़ा 1.31 करोड़ के पार था, जो अब घटकर लगभग 1.25 करोड़ रह गया है।
इसके पीछे मुख्य रूप से तीन कारण सामने आए हैं:
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60 वर्ष की आयु सीमा: योजना के नियमों के अनुसार, जैसे ही कोई महिला 60 वर्ष की आयु पूरी कर लेती है, वह इस योजना के दायरे से बाहर हो जाती है। जनवरी 2025 से इस नियम को सख्ती से लागू किया गया है, जिसके बाद बड़ी संख्या में बुजुर्ग महिलाओं के नाम काट दिए गए हैं।
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समग्र आईडी और e-KYC की समस्या: प्रदेश के कई जिलों, विशेषकर सतना से ऐसी शिकायतें मिली हैं जहां महिलाओं की समग्र आईडी बिना किसी स्पष्ट कारण के डिलीट कर दी गई है। e-KYC सत्यापन में आ रही तकनीकी खामियों के कारण पहले से पात्र महिलाएं भी अब अपात्र की श्रेणी में आ गई हैं।
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मृत्यु और स्वैच्छिक त्याग: हर महीने उन महिलाओं के नाम भी हटाए जाते हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जिन्होंने स्वेच्छा से इस योजना का लाभ छोड़ने का निर्णय लिया है।

किस्त की राशि में इजाफा और वित्तीय भार
लाड़ली बहना योजना में नवंबर 2025 से एक बड़ा बदलाव किया गया था।
पहले जहां बहनों को 1250 रुपये प्रति माह मिलते थे, वहीं अब इसे बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया गया है।
इस 250 रुपये की बढ़ोतरी के कारण सरकार पर हर महीने 300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ा है।
अक्टूबर 2025 तक सरकार लगभग 1500 करोड़ रुपये वितरित करती थी, जो अब बढ़कर 1850 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है।

विभागीय चुप्पी और बढ़ता सस्पेंस
हैरानी की बात यह है कि कुछ जिलों में किस्तों की संख्या में लगातार गिरावट देखी जा रही है।
उदाहरण के तौर पर, जून में जहां लाभार्थियों की संख्या अधिक थी, वहीं जुलाई और अगस्त में इसमें अचानक कमी आई।
इस विसंगति पर महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी भी खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं, जिससे लाभार्थियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

क्या करें अगर किस्त न आए?
अगर आपको पिछली यानी 31वीं किस्त नहीं मिली थी, तो इस बार भी राशि आने की संभावना कम है।
ऐसी स्थिति में महिलाओं को तुरंत अपने नजदीकी जनसेवा केंद्र या ग्राम पंचायत सचिवालय में जाकर अपनी समग्र आईडी और e-KYC की स्थिति जांचनी चाहिए।
अगर बैंक खाता आधार से लिंक (DBT Enabled) नहीं है, तो भी पैसा अटक सकता है।


