Lalu Family Land for Job Case: बिहार की राजनीति के दिग्गज और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के लिए कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बहुचर्चित ‘जमीन के बदले नौकरी’ (Land for Job) मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव और बेटियों मीसा भारती व हेमा यादव सहित कुल 41 लोगों के खिलाफ आरोप (Charges) तय कर दिए हैं।
लालू परिवार पर कोर्ट की ये इस टिप्पणी भी चर्चा में रही कि उन्होंने एक “आपराधिक गिरोह” (Criminal Syndicate) की तरह काम किया है।
Land for job case | Rouse Avenue court has listed the matter for framing of charges on January 29. On the next date, the court will record the admission or denial of the accused persons
— ANI (@ANI) January 9, 2026
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा प्रकरण उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच केंद्र की यूपीए (UPA-1) सरकार में रेल मंत्री थे।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अनुसार, उस दौरान रेलवे के विभिन्न जोनों (जैसे मुंबई, कोलकाता, जबलपुर, जयपुर और हाजीपुर) में ग्रुप-डी के पदों पर नियुक्तियां की गई थीं।
आरोप है कि इन नियुक्तियों के बदले में उम्मीदवारों या उनके परिजनों से बेहद कम कीमतों पर जमीनें लिखवाई गईं।
ये जमीनें सीधे तौर पर लालू यादव के परिवार के सदस्यों या उनके नियंत्रण वाली कंपनी ‘एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम ट्रांसफर की गईं।
नौकरी के लिए ज़मीन मामला में राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा नपना, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, हेमा यादव के खिलाफ आरोप तय किए। pic.twitter.com/mjpVjTo7HE
— Rohit Jain 🇮🇳 (@Rohitjain2799) January 9, 2026
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बेहद सख्त टिप्पणी की।
अदालत ने कहा कि पहली नजर में सीबीआई के पास पर्याप्त सबूत हैं जो यह दर्शाते हैं कि सरकारी नौकरियों का इस्तेमाल निजी संपत्ति बनाने के हथियार के रूप में किया गया।
जज ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह केवल व्यक्तिगत भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें पूरे परिवार ने मिलकर एक सिंडिकेट की तरह काम किया ताकि अचल संपत्तियों का अंबार खड़ा किया जा सके।

किसे मिली राहत और कौन फंसा?
इस मामले में सीबीआई ने कुल 103 लोगों को आरोपी बनाया था।
हालांकि, सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि इनमें से 5 आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है।
कोर्ट ने सबूतों के अभाव में 52 अन्य लोगों को बरी कर दिया है।
लेकिन, लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के मुख्य सदस्यों सहित 41 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून (Prevention of Corruption Act) की धाराओं के तहत मुकदमा चलाने के पर्याप्त आधार पाए गए हैं।

राजनीतिक गलियारों में हलचल
कोर्ट के इस फैसले के बाद बिहार और देश की राजनीति में जुबानी जंग तेज हो गई है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने लालू परिवार पर तीखा हमला बोला है।
जेडीयू का कहना है कि लालू परिवार ने समाजवादी आंदोलन के नाम पर केवल परिवारवाद और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है।
वहीं, भाजपा ने इसे “गरीबों के हक की लूट” करार दिया है।
दूसरी तरफ, आरजेडी समर्थकों का मानना है कि यह विपक्ष को परेशान करने की एक राजनीतिक साजिश है।

अब आगे क्या होगा?
आरोप तय होने का मतलब है कि अब इस मामले में औपचारिक ‘ट्रायल’ (मुकदमा) शुरू होगा। 29 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई से गवाहों के बयान दर्ज करने और सबूतों की जांच की प्रक्रिया तेज होगी।
- अपील का विकल्प: लालू यादव और उनका परिवार इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय (High Court) में याचिका दायर कर सकते हैं।
- सजा का प्रावधान: अगर ट्रायल के अंत में आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो दोषियों को कई वर्षों की जेल और भारी जुर्माने की सजा हो सकती है।


