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लालू परिवार पर कानूनी शिकंजा: लैंड फॉर जॉब केस में कोर्ट ने तय किए भ्रष्टाचार के आरोप

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 13 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Lalu Family Land for Job Case: बिहार की राजनीति के दिग्गज और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के लिए कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं।

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बहुचर्चित ‘जमीन के बदले नौकरी’ (Land for Job) मामले में लालू यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव और बेटियों मीसा भारती व हेमा यादव सहित कुल 41 लोगों के खिलाफ आरोप (Charges) तय कर दिए हैं।

लालू परिवार पर कोर्ट की ये इस टिप्पणी भी चर्चा में रही कि उन्होंने एक “आपराधिक गिरोह” (Criminal Syndicate) की तरह काम किया है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा प्रकरण उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच केंद्र की यूपीए (UPA-1) सरकार में रेल मंत्री थे।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अनुसार, उस दौरान रेलवे के विभिन्न जोनों (जैसे मुंबई, कोलकाता, जबलपुर, जयपुर और हाजीपुर) में ग्रुप-डी के पदों पर नियुक्तियां की गई थीं।

आरोप है कि इन नियुक्तियों के बदले में उम्मीदवारों या उनके परिजनों से बेहद कम कीमतों पर जमीनें लिखवाई गईं।

ये जमीनें सीधे तौर पर लालू यादव के परिवार के सदस्यों या उनके नियंत्रण वाली कंपनी ‘एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम ट्रांसफर की गईं।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बेहद सख्त टिप्पणी की।

अदालत ने कहा कि पहली नजर में सीबीआई के पास पर्याप्त सबूत हैं जो यह दर्शाते हैं कि सरकारी नौकरियों का इस्तेमाल निजी संपत्ति बनाने के हथियार के रूप में किया गया।

जज ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह केवल व्यक्तिगत भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें पूरे परिवार ने मिलकर एक सिंडिकेट की तरह काम किया ताकि अचल संपत्तियों का अंबार खड़ा किया जा सके।

Lalu Family Land for Job Case

किसे मिली राहत और कौन फंसा?

इस मामले में सीबीआई ने कुल 103 लोगों को आरोपी बनाया था।

हालांकि, सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि इनमें से 5 आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है।

कोर्ट ने सबूतों के अभाव में 52 अन्य लोगों को बरी कर दिया है।

लेकिन, लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के मुख्य सदस्यों सहित 41 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून (Prevention of Corruption Act) की धाराओं के तहत मुकदमा चलाने के पर्याप्त आधार पाए गए हैं।

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राजनीतिक गलियारों में हलचल

कोर्ट के इस फैसले के बाद बिहार और देश की राजनीति में जुबानी जंग तेज हो गई है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने लालू परिवार पर तीखा हमला बोला है।

जेडीयू का कहना है कि लालू परिवार ने समाजवादी आंदोलन के नाम पर केवल परिवारवाद और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है।

वहीं, भाजपा ने इसे “गरीबों के हक की लूट” करार दिया है।

दूसरी तरफ, आरजेडी समर्थकों का मानना है कि यह विपक्ष को परेशान करने की एक राजनीतिक साजिश है।

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अब आगे क्या होगा?

आरोप तय होने का मतलब है कि अब इस मामले में औपचारिक ‘ट्रायल’ (मुकदमा) शुरू होगा। 29 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई से गवाहों के बयान दर्ज करने और सबूतों की जांच की प्रक्रिया तेज होगी।

  • अपील का विकल्प: लालू यादव और उनका परिवार इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय (High Court) में याचिका दायर कर सकते हैं।
  • सजा का प्रावधान: अगर ट्रायल के अंत में आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो दोषियों को कई वर्षों की जेल और भारी जुर्माने की सजा हो सकती है।
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