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कोलकाता में सड़क से अदालत तक बवाल: ED और TMC के बीच आर-पार की जंग, HC में टली सुनवाई

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Mamata Banerjee Protest: कोलकाता में 8 जनवरी को ED द्वारा TMC के चुनावी रणनीतिकार (I-PAC) और आईटी सेल से जुड़े ठिकानों पर की गई छापेमारी ने एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है।

इस कार्रवाई के विरोध में 9 जनवरी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद कोलकाता की सड़क पर उतर आई हैं।

वहीं दिल्ली में पार्टी के सांसदों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई हैं।

कोलकाता में ममता का पैदल मार्च और FIR

शुक्रवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता की सड़कों पर एक विशाल विरोध रैली का नेतृत्व किया।

सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ पैदल मार्च करते हुए उन्होंने केंद्र सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया।

इतना ही नहीं, ममता सरकार ने ईडी के अधिकारियों के खिलाफ कोलकाता और बिधाननगर के अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में दो FIR भी दर्ज कराई हैं।

ममता का तर्क है कि एजेंसी बिना किसी ठोस आधार के उनके निजी डेटा के साथ छेड़छाड़ कर रही है।

दिल्ली में सांसदों का धरना और हिरासत

दिल्ली में टीएमसी के दिग्गज सांसद डेरेक ओ ब्रायन, महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद गृह मंत्रालय के बाहर धरने पर बैठ गए।

प्रदर्शन के दौरान सांसदों और दिल्ली पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसमें कुछ सांसदों के गिरने की भी खबरें आईं।

पुलिस ने लगभग 8 सांसदों को हिरासत में लिया और करीब दो घंटे तक पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में रखने के बाद उन्हें रिहा किया।

ममता बनर्जी ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया है।

कोर्ट में हंगामा और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इसी बीच कोलकाता हाईकोर्ट में जब ईडी की उस याचिका पर सुनवाई होनी थी जिसमें ममता बनर्जी पर जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया गया था, तब कोर्ट परिसर में भारी हंगामा हुआ।

वकीलों और समर्थकों की भीड़ के कारण न्यायाधीश ने सुनवाई 14 जनवरी तक के लिए टाल दी।

मामले की शुरुआत: आईपैक (I-PAC) पर रेड

विवाद की जड़ गुरुवार को हुई ईडी की वह कार्रवाई है, जिसमें केंद्रीय एजेंसी ने कोलकाता के गुलाउडन स्ट्रीट स्थित आवास और सॉल्टलेक स्थित आईपैक (I-PAC) के दफ्तर पर छापा मारा।

आईपैक वही संस्था है जो ममता बनर्जी और टीएमसी के लिए चुनावी रणनीति तैयार करती है।

जैसे ही मुख्यमंत्री को इस छापेमारी की सूचना मिली, वे तुरंत आईपैक के दफ्तर पहुंच गईं।

ममता बनर्जी का आरोप है कि ईडी उनके चुनावी डेटा और पार्टी की गोपनीय फाइलों को चुराने की कोशिश कर रही है।

छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी कुछ फाइलें अपने साथ लेकर दफ्तर से बाहर निकलीं, जिस पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

विपक्षी और सत्ता पक्ष के तर्क:

  • टीएमसी (महुआ मोइत्रा): “यह हमारी संपत्ति है जहां ईडी डकैती करने आई थी। बीजेपी चुनाव से पहले हमारा डेटा चुराना चाहती है।”

  • बीजेपी (रवि शंकर प्रसाद): “ममता बनर्जी की कार्रवाई असंवैधानिक है। स्वतंत्र भारत में ऐसा कभी नहीं हुआ कि कोई मुख्यमंत्री जांच एजेंसी के काम में इस तरह हस्तक्षेप करे।”
  • कांग्रेस और सीपीआई: विपक्षी दलों ने भी ईडी की टाइमिंग पर सवाल उठाए हैं, हालांकि उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा फाइलें ले जाने के मुद्दे पर स्पष्टीकरण की मांग भी की है।
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