Ahilyabai Holkar Manikarnika Ghat : काशी में विश्व प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर चल रहे सौंदर्यीकरण और श्मशान घाट विकास परियोजना के दौरान ऐतिहासिक धरोहरों को नुकसान पहुंचाने का गंभीर मामला सामने आया है।
मालवा की रानी देवी अहिल्याबाई होलकर द्वारा निर्मित ऐतिहासिक हिस्सों को बिना किसी पूर्व सूचना के ढहाए जाने से ‘खासगी देवी अहिल्याबाई होलकर चैरिटीज ट्रस्ट’ और देशभर के सनातन धर्मावलंबियों में भारी नाराजगी है।
क्या है पूरा विवाद?
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट का एक बड़ा हिस्सा, जिसका निर्माण वर्ष 1791 में देवी अहिल्याबाई होलकर ने करवाया था, हाल ही में विकास कार्यों के नाम पर तोड़ दिया गया।
ट्रस्ट के अध्यक्ष यशवंत राव होलकर का आरोप है कि प्रशासन और नगर निगम ने इस ध्वस्तीकरण से पहले न तो ट्रस्ट को सूचित किया और न ही ऐतिहासिक मूर्तियों के संरक्षण की कोई व्यवस्था की।
Protests erupt after centuries-old statue of Ahilyabai Holkar allegedly demolished in Varanasi
Varanasi: Allegations have surfaced that authorities demolished a centuries-old statue and historical structures associated with Maratha queen Ahilyabai Holkar, who played a crucial… pic.twitter.com/7221EkNH8g
— (@politicaleyeNew) January 15, 2026
इस कार्रवाई के दौरान अहिल्याबाई होलकर की प्राचीन प्रतिमाएं, धार्मिक प्रतीक और एक शिवलिंग के मलबे में दबने व क्षतिग्रस्त होने की खबरें सामने आई हैं।
यशवंत राव होलकर ने खुद वाराणसी पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपनी पीड़ा व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि जिस अहिल्याबाई ने काशी का जीर्णोद्धार किया, आज उन्हीं की विरासत को विकास के नाम पर कुचला जा रहा है।
Yuvraj Yeshwantrao Holkar Meets Authorities In Varanasi And Demands Inquiry In Demolition Of Manikarnika Ghat Restored By Ahilyabai#MadhyaPradesh #MPNews #FreePressMP pic.twitter.com/rZcfwXqU4i
— Free Press Madhya Pradesh (@FreePressMP) January 15, 2026
इंदौर में फूटा गुस्से का गुबार
इस घटना की गूंज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से लेकर देवी अहिल्याबाई की कर्मभूमि इंदौर तक सुनाई दे रही है।
इंदौर के निवासियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों (धनगर, पाल, बघेल समाज) ने इसे आस्था पर सीधा प्रहार बताया है।
लोगों का कहना है कि यह केवल पत्थरों का ढांचा नहीं था, बल्कि करोड़ों लोगों की श्रद्धा का केंद्र था।
विशेष रूप से अहिल्याबाई होलकर के 300वें जन्म वर्ष के समापन के समय इस तरह की घटना ने लोगों की भावनाओं को आहत किया है।
Ahilyabai Holkar was one of the greatest visionaries in India and one of the greatest queens this land has seen.
This demolition has happened in the name of ‘development’ of Kashi.
No words. pic.twitter.com/s4aWivjtwT
— Chinmayi Sripaada (@Chinmayi) January 11, 2026
PM मोदी और CM योगी से अपील
होलकर ट्रस्ट और राजपरिवार ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।
ट्रस्ट की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- दोषी अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
- मलबे में दबी मूर्तियों को सुरक्षित निकालकर ट्रस्ट को सौंपा जाए।
- इन ऐतिहासिक मूर्तियों को पूर्ण सम्मान के साथ पुनः स्थापित किया जाए।
ट्रस्ट ने पत्र में यह भी लिखा है कि प्रधानमंत्री ने खुद काशी विश्वनाथ धाम में अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा लगाकर उन्हें सम्मान दिया था, लेकिन उनके अधीनस्थ विभाग उन्हीं की विरासत को नष्ट कर रहे हैं।
Flip the coin and you will see…
Modi demolished this beautiful sculpture of Ahilyabai Holkar along with the entirety of Manakarnika Ghat recently for “developing” Kashi.
For Kashi Corridor, Modi destroyed 100s of ancient temples & shivlings. Much much more than Aurangzeb… pic.twitter.com/uRtg5DkRZg— Harmeet Kaur K (@iamharmeetK) January 12, 2026
प्रशासन का पक्ष और प्रोजेक्ट की लागत
वाराणसी प्रशासन के अनुसार, मणिकर्णिका घाट पर लगभग 18 करोड़ रुपये की लागत से श्मशान घाट पुनर्विकास परियोजना चल रही है।
इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य घाट पर दाह संस्कार के लिए आने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना है।
जिलाधिकारी (DM) का कहना है कि मूर्तियों को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है, बल्कि उन्हें सुरक्षित कर जीर्णोद्धार किया जा रहा है।
हालांकि, धरातल पर मलबे में दबी मूर्तियों की तस्वीरों ने प्रशासन के दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
#Breaking Protests erupted in #Varanasi after a redevelopment drive at sacred #ManikarnikaGhat led to demolition of structures, including alleged damage to statues linked to Punyashlok Ahilyabai Holkar. Locals decry heritage loss; DM orders probe, denies intentional harm pic.twitter.com/vFqIfXrXQL
— Thepagetoday (@thepagetody) January 14, 2026
ऐतिहासिक महत्व
मणिकर्णिका घाट केवल एक श्मशान घाट नहीं है, बल्कि काशी का दिल है।
18वीं शताब्दी में जब हिंदू मंदिरों और घाटों की स्थिति जर्जर थी, तब महारानी अहिल्याबाई होलकर ने देशभर में इनका पुनर्निर्माण कराया था।
मणिकर्णिका घाट की सीढ़ियां और वहां स्थापित शिव आराधना से जुड़ी प्रतिमाएं स्थापत्य कला और धार्मिक इतिहास का अनमोल हिस्सा हैं।


