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जन गण मन से पहले गाया जाएगा वंदे मातरम्, जानिए क्या हैं नए नियम और किन जगहों पर मिली छूट

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Vande Mataram New Guidelines भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर एक विस्तृत एडवायजरी जारी की है।

यह कदम वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में उठाया गया है।

अब तक हम अक्सर वंदे मातरम् के केवल शुरुआती दो अंतरे (पैरा) ही सुनते या गाते आए हैं, लेकिन अब इसे पूरे 6 छंदों के साथ विधिवत रूप से गाया और बजाया जाएगा।

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आइए जानते हैं कि नए नियमों के अनुसार क्या बदलाव हुए हैं।

जन गण मन से पहले गाया जाएगा वंदे मातरम्

गृह मंत्रालय द्वारा जारी 10 पन्नों के आदेश में सबसे अहम बात यह है कि अगर किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगीत (वंदे मातरम्) और राष्ट्रगान (जन गण मन) दोनों का आयोजन होना है, तो वंदे मातरम् पहले गाया जाएगा।

इसके बाद ही राष्ट्रगान होगा।

एक और बड़ा बदलाव इसकी अवधि को लेकर है।

राष्ट्रगान जहां 52 सेकंड में पूरा होता है, वहीं अब राष्ट्रगीत के सभी 6 छंदों को गाने में कुल 3 मिनट 10 सेकंड (190 सेकंड) का समय लगेगा।

इस दौरान उपस्थित सभी व्यक्तियों का सावधान मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य कर दिया गया है।

स्कूलों के लिए नया नियम

देश के सभी स्कूलों के लिए अब यह नियम अनिवार्य होगा कि स्कूल की पढ़ाई शुरू होने से पहले होने वाली असेंबली या प्रार्थना सभा की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ के साथ की जाए।

मंत्रालय का मानना है कि इससे छात्रों में राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान और राष्ट्रीयता की भावना प्रबल होगी।

स्कूल प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे बच्चों को राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के बीच का अंतर और उनके महत्व के बारे में भी जागरूक करें।

कहां-कहां बजना अनिवार्य होगा?

सरकार ने उन अवसरों की एक विस्तृत सूची दी है जहां वंदे मातरम् बजाना जरूरी होगा:

  • तिरंगा फहराते समय: जब भी राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा, राष्ट्रगीत का वादन होगा।

  • संवैधानिक पद: राष्ट्रपति के किसी औपचारिक समारोह में आगमन और विदाई के समय। साथ ही राज्यपालों और उपराज्यपालों के राजकीय कार्यक्रमों में भी इसे बजाया जाएगा।

  • संबोधन: राष्ट्रपति जब भी देश के नाम संदेश देंगे, उसके पहले और बाद में इसे बजाया जाएगा।

  • सम्मान समारोह: भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री जैसे नागरिक अलंकरण समारोहों में वंदे मातरम का गूंजना अनिवार्य है।

  • परेड: जब भी राष्ट्रीय ध्वज को परेड का हिस्सा बनाया जाएगा।

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सिनेमाघरों और डॉक्यूमेंट्री को छूट क्यों?

अक्सर राष्ट्रगान को लेकर सिनेमाघरों में विवाद की खबरें आती रही हैं।

इसे ध्यान में रखते हुए, सरकार ने सिनेमाघरों को इस नई गाइडलाइन से बाहर रखा है।

यानी फिल्म शुरू होने से पहले वंदे मातरम बजाना अनिवार्य नहीं है।

इसके अलावा, अगर किसी डॉक्यूमेंट्री फिल्म या न्यूजरील के बीच में राष्ट्रगीत का कोई अंश आता है, तो दर्शकों को खड़े होने की जरूरत नहीं होगी।

मंत्रालय का तर्क है कि फिल्म के बीच में खड़े होने से अव्यवस्था फैल सकती है और फिल्म का प्रवाह बाधित हो सकता है।

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सामूहिक गायन का तरीका

एडवायजरी को चार चरणों में बांटा गया है:

  1. आधिकारिक संस्करण: पूरा 6 पैरा वाला गीत।

  2. वादन: वाद्य यंत्रों (Instruments) पर बजाने के नियम।

  3. सामूहिक गायन: लोगों द्वारा एक साथ मिलकर गाना।

  4. सामान्य गायन: सामान्य अवसरों पर प्रस्तुति।

सरकार ने साफ किया है कि गाते या बजाते समय शब्दों और धुन में स्पष्टता होनी चाहिए ताकि गीत की गरिमा बनी रहे।

वंदे मातरम् का गौरवशाली इतिहास

वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का सबसे बड़ा नारा था।

  • रचना: इसकी रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को की थी।

  • उपन्यास: 1882 में यह उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ का हिस्सा बना।

  • पहली प्रस्तुति: 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे पहली बार सुरों में पिरोकर गाया था।

  • मान्यता: 14 अगस्त 1947 की रात संविधान सभा की बैठक इसी गीत से शुरू हुई थी और 1950 में इसे भारत के ‘राष्ट्रगीत’ का दर्जा मिला।

केंद्र सरकार का यह फैसला राष्ट्रगीत को उसके पूर्ण स्वरूप में जन-जन तक पहुंचाने की एक कोशिश है।

3 मिनट 10 सेकंड का यह प्रोटोकॉल अब आधिकारिक कार्यक्रमों की नई पहचान बनेगा।

जहां राष्ट्रगान हमें अनुशासन और एकता सिखाता है, वहीं वंदे मातरम् अपनी मातृभूमि के प्रति समर्पण और श्रद्धा का प्रतीक है।

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