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भारत हिंदू राष्ट्र है, लिव-इन संबंध जिम्मेदारी से भागना है: कोलकाता में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Mohan Bhagwat RSS Chief: आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में दो महत्वपूर्ण बयान दिए।

उन्होंने भारत को एक ‘हिंदू राष्ट्र’ बताते हुए कहा कि इसके लिए किसी संवैधानिक मंजूरी की आवश्यकता नहीं है।

साथ ही, उन्होंने परिवार संस्था के महत्व पर जोर देते हुए लिव-इन रिलेशनशिप की प्रथा को जिम्मेदारी से भागने का रास्ता बताया।

आरएसएस प्रमुख ने अपने संबोधन में भारतीय समाज में परिवार की मजबूत संरचना को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।

मोहन भागवत का परिवार और लिव-इन पर विचार

उनका कहना था कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोग सामाजिक जिम्मेदारी लेने के इच्छुक नहीं होते।

भागवत ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “लिव-इन रिलेशनशिप वाले जिम्मेदारी से बचना चाहते हैं तो आप संन्यासी बनें।”

उन्होंने परिवार को केवल शारीरिक संतुष्टि का साधन नहीं, बल्कि समाज की मूल इकाई बताया।

उनके अनुसार, परिवार वह स्थान है जहां व्यक्ति सामाजिक मूल्य सीखता है और यह सांस्कृतिक, आर्थिक व सामाजिक इकाई का संगम है।

भागवत ने कहा कि देश की बचत और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी परिवारों के माध्यम से ही होता है।

“भारत हिंदू राष्ट्र है, मंजूरी की जरूरत नहीं”

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित ‘100 व्याख्यान माला’ में मोहन भागवत ने कहा कि भारत प्राकृतिक रूप से एक हिंदू राष्ट्र है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “सूर्य पूर्व से उगता है, क्या इसके लिए भी संवैधानिक स्वीकृति चाहिए?”

उनका तर्क था कि जो कोई भी भारत को अपनी मातृभूमि मानता है और भारतीय संस्कृति व पूर्वजों का सम्मान करता है, वह हिंदू है।

उन्होंने घोषणा की कि जब तक यह भावना देश में बनी रहेगी, भारत हिंदू राष्ट्र बना रहेगा और इसे किसी कानूनी स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है।

आदर्श परिवार और बच्चों के बारे में क्या कहा?

परिवार नियोजन के विषय पर बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि बच्चों की संख्या या विवाह की उम्र का कोई कठोर फॉर्मूला नहीं होना चाहिए, यह पति-पत्नी का निर्णय है।

हालांकि, उन्होंने कुछ शोधों का हवाला देते हुए सुझाव दिया कि 19 से 25 वर्ष की आयु के बीच विवाह और तीन बच्चे होना आदर्श स्थिति हो सकती है।

उनके अनुसार, इससे माता-पिता और बच्चों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और लोग ‘ईगो मैनेजमेंट’ भी सीखते हैं।

मोहन भागवत के ये बयान सामाजिक-सांस्कृतिक बहस के केंद्र में हैं।

एक तरफ वे भारत की पहचान को हिंदू राष्ट्र के रूप में स्थापित करने पर जोर दे रहे हैं, तो दूसरी ओर पारंपरिक परिवार व्यवस्था को मजबूत करने और लिव-इन जैसी आधुनिक प्रथाओं पर सवाल उठा रहे हैं।

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