Child Birth in Exam Center मध्य प्रदेश के धार जिले के पीथमपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सभी को हैरत में डाल दिया है।
यहां 10वीं बोर्ड की परीक्षा के दौरान एक 17 साल की नाबालिग छात्रा ने परीक्षा केंद्र के भीतर ही एक नवजात बच्चे को जन्म दिया।
यह घटना मंगलवार, 24 फरवरी को पीथमपुर के सेंट जॉन स्कूल में घटित हुई, जहां उस समय गणित का पेपर चल रहा था।
एग्जाम सेंटर में दिया जन्म
जानकारी के मुताबिक, छात्रा अन्य परीक्षार्थियों की तरह सुबह स्कूल पहुंची थी और अपनी सीट पर बैठकर गणित का पर्चा हल कर रही थी।
परीक्षा शुरू होने के कुछ देर बाद, उसने अचानक पेट में दर्द की शिकायत की और ड्यूटी पर तैनात शिक्षक से शौचालय जाने की अनुमति मांगी।

अनुमति मिलने के बाद वह बाहर गई, लेकिन जब वह 15 मिनट तक वापस अपनी सीट पर नहीं लौटी, तो परीक्षा केंद्र के प्रभारी नरेंद्र कुमार पोथे और अन्य स्टाफ को चिंता हुई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एक महिला कर्मचारी को छात्रा को देखने के लिए भेजा गया।
जैसे ही महिला कर्मचारी शौचालय के पास पहुंची, उसे अंदर से एक नवजात बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी।
जब दरवाजा खुलवाया गया, तो वहां का नजारा देखकर हर कोई दंग रह गया।
छात्रा ने वहीं बच्चे को जन्म दे दिया था।

जच्चा-बच्चा सुरक्षित
स्कूल प्रबंधन ने बिना समय गंवाए तुरंत 108 एम्बुलेंस को फोन किया और पुलिस को सूचना दी।
कुछ ही देर में मेडिकल टीम स्कूल पहुंची और प्राथमिक उपचार के बाद जच्चा-बच्चा दोनों को पीथमपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया।
डॉक्टरों के अनुसार, मां और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं।
परिजनों को नहीं थी खबर
इस घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि छात्रा के परिवार वालों को उसकी गर्भावस्था (Pregnancy) के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
पुलिस की पूछताछ में छात्रा ने बताया कि वह पिछले दो साल से ‘कान्हा बर्मन’ नाम के एक युवक के संपर्क में थी, जो बेटमा क्षेत्र की जीवन ज्योति कॉलोनी का रहने वाला है।
छात्रा के अनुसार, उनके बीच पिछले एक साल से शारीरिक संबंध थे, जिसके कारण वह गर्भवती हो गई थी।

आरोपी पर केस दर्ज
सेक्टर 1 थाने की एसआई चांदनी सिंगार ने बताया कि छात्रा के बयानों के आधार पर आरोपी कान्हा के खिलाफ संबंधित धाराओं (संभवतः पॉक्सो एक्ट और अन्य) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।
फिलहाल आरोपी फरार है और पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है।
इस घटना ने समाज और अभिभावकों के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक नाबालिग लड़की 9 महीने तक गर्भवती रही और उसके परिवार या स्कूल के शिक्षकों को इसकी भनक तक नहीं लगी, यह जांच का विषय है।


