MP Board New Exam Pattern: मध्य प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के लिए एक बड़ी खबर है।
राज्य का स्कूल शिक्षा विभाग अब पूरी तरह से ‘न्यू एजुकेशन पॉलिसी’ (NEP) को जमीन पर उतारने की तैयारी कर चुका है।
आने वाले सत्र 2026-27 से मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MP Board) की परीक्षाओं का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा।
अब छात्रों को केवल किताबी कीड़ा नहीं बनना होगा, बल्कि उन्हें कोई न कोई काम (प्रोफेशनल स्किल) भी सीखना होगा।
क्या है सबसे बड़ा बदलाव?
सबसे बड़ा बदलाव विषयों की संख्या को लेकर है।
अब तक कक्षा 10वीं में छात्र 6 विषयों की परीक्षा देते थे, लेकिन अब उन्हें 7 विषयों की परीक्षा देनी होगी।
इसी तरह 12वीं में जहां पहले केवल 5 विषय होते थे, अब वहां 6 विषयों का पेपर देना होगा।
इस बढ़े हुए एक विषय में ‘वोकेशनल’ यानी व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य (Compulsory) कर दिया गया है।
वोकेशनल सब्जेक्ट क्यों है जरूरी?
अक्सर देखा जाता है कि कई छात्र 12वीं के बाद किसी कारणवश आगे की पढ़ाई नहीं कर पाते। ऐसे में उनके पास रोजगार का कोई साधन नहीं होता।
अब सरकार ने तय किया है कि 9वीं कक्षा से ही बच्चों को NSQF (नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क) के तहत एक प्रोफेशनल विषय चुनना होगा।
इसमें आईटी (IT), ब्यूटी एंड वेलनेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, रिटेल और हेल्थकेयर जैसे कोर्स शामिल हैं।
इसका फायदा यह होगा कि स्कूल छोड़ने के बाद छात्र अपना छोटा-मोटा काम शुरू कर सकेंगे या किसी कंपनी में नौकरी पा सकेंगे।
‘बेस्ट ऑफ फाइव’ की जगह अब ‘बेस्ट ऑफ सिक्स’
10वीं के छात्रों के लिए एक और चौंकाने वाला बदलाव है।
सालों से चली आ रही ‘बेस्ट ऑफ फाइव’ योजना अब बंद होने जा रही है।
पहले छात्र 6 में से 5 विषयों में पास होने पर पास मान लिए जाते थे और सबसे कम नंबर वाले विषय को छोड़ दिया जाता था।
अब नई व्यवस्था के तहत, 10वीं में कुल 7 पेपर होंगे।रिजल्ट बनाते समय ‘बेस्ट ऑफ सिक्स’ फॉर्मूला अपनाया जाएगा।
यानी 7 में से जिन 6 विषयों में आपके सबसे ज्यादा नंबर होंगे, उन्हीं के आधार पर आपकी मार्कशीट तैयार की जाएगी।
इसका मतलब है कि अब आप किसी भी विषय को हल्के में नहीं ले सकते।
परीक्षा और नामांकन फीस में भारी बढ़ोतरी
शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के साथ-साथ अब अभिभावकों की जेब पर भी बोझ बढ़ने वाला है।
बोर्ड ने परीक्षाओं और अन्य सेवाओं की फीस में वृद्धि का प्रस्ताव दिया है।
- नियमित परीक्षा शुल्क (10वीं/12वीं) पहले ₹1200, अब ₹1500
- Private परीक्षा शुल्क- ₹1600
- 9वीं नामांकन शुल्क- पहले ₹350, अब ₹500
- डुप्लीकेट मार्कशीट (10 साल पुरानी) पहले ₹600, अब ₹1000
इसके अलावा, स्कूलों को बोर्ड से संबद्धता (Affiliation) बनाए रखने के लिए भी अब ज्यादा मोटी रकम चुकानी होगी, जिसका सीधा असर प्राइवेट स्कूलों की फीस पर पड़ सकता है।
छात्रों को इससे क्या लाभ मिलेगा?
- रोजगार की गारंटी: स्कूल से निकलते ही छात्र किसी न किसी हुनर में माहिर होंगे।
- प्रैक्टिकल सोच: रट्टा मारने की जगह छात्र अब प्रैक्टिकल काम सीखेंगे।
- ग्लोबल स्टैंडर्ड: एमपी बोर्ड के छात्र अब सीबीएसई और अंतरराष्ट्रीय बोर्ड के छात्रों के बराबर खड़े हो सकेंगे।
- ड्रॉपआउट में कमी: जब पढ़ाई में कुछ नया और काम का सीखने को मिलेगा, तो छात्रों की स्कूल छोड़ने की दर कम होगी।
स्कूल शिक्षा विभाग ने यह प्रस्ताव शासन को भेज दिया है।
मंजूरी मिलते ही इसे 2026 के सत्र से लागू कर दिया जाएगा।
अब छात्रों और शिक्षकों को इस नई चुनौती के लिए तैयार रहना होगा।
