Vande Mataram Controversy MP: मध्य प्रदेश में ‘वंदे मातरम’ को लेकर सियासत का पारा चढ़ गया है।
ताजा मामला बुरहानपुर का है, जहां 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के मौके पर ‘भोले की बारात’ निकाली गई थी।
इस यात्रा में शामिल होने आए अखिल भारत बलाई महासंघ के अध्यक्ष मनोज परमार पर आरोप है कि उन्होंने एक विशेष समुदाय के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और भड़काऊ बातें कहीं।
उन्होंने अपने भाषण में यहां तक कह दिया कि “वंदे मातरम नहीं गाया तो 6 नंबर बना देंगे” और “जहां से पूर्वज आए हैं वहां चले जाएं।”
भाषण उनके ही सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड भी किया गया था।
बुरहानपुर में भड़काऊ भाषण और FIR
इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शहर का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने इसकी शिकायत पुलिस से की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर और एसपी खुद कंट्रोल रूम पहुंचे।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मनोज परमार और कार्यक्रम के आयोजक अमित वारूडे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 और 299 के तहत केस दर्ज कर लिया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच शुरू कर दी गई है और वीडियो की भी जांच की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
प्रदेश में सियासी घमासान
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश के सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और मदरसों में वंदे मातरम के सभी 6 छंदों का गायन अनिवार्य कर दिया है।
सीएम का कहना है कि यह उन शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि है जिन्होंने इस गीत के लिए अपनी जान दे दी।

स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने साफ कर दिया है कि यह नियम बिना किसी भेदभाव के हर शिक्षण संस्थान पर लागू होगा।
कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने भी इस मामले में विवादित बयान देते हुए कहा कि “जिसे वंदे मातरम नहीं गाना, वह देश छोड़कर पाकिस्तान चला जाए।”

आरिफ मसूद का संवैधानिक तर्क
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने सरकार के इस आदेश का कड़ा विरोध किया है।
उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन बताया है।
मसूद का कहना है कि वंदे मातरम की कुछ पंक्तियां उनके मजहबी विश्वासों से टकराती हैं, इसलिए इसे जबरन थोपना गलत है।
मुस्लिम विद्वानों का भी मानना है कि पूरे 6 छंदों को अनिवार्य करना उनकी धार्मिक आजादी पर अंकुश लगाने जैसा है।

कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में राष्ट्रगीत अब देशभक्ति के साथ-साथ एक बड़े सियासी और कानूनी विवाद का केंद्र बन गया है।
एक तरफ सरकार इसे राष्ट्रवाद से जोड़ रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे व्यक्तिगत आजादी और धार्मिक अधिकारों का मुद्दा बना रहा है।


