Baraiya Controversial Statement मध्य प्रदेश के भांडेर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया अपने तीखे और विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं।
इसी कड़ी में एक बार फिर उन्होंने ऐसी टिप्पणी की है जिसने प्रदेश की राजनीति में खलबली मचा दी है।
भोपाल में आयोजित ‘डिक्लेरेशन-2’ ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक के दौरान बरैया ने अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के जनप्रतिनिधियों की तुलना “मुंह पर पट्टी बंधे कुत्तों” से कर डाली।
क्या है पूरा मामला?
12-13 जनवरी 2026 को भोपाल के समन्वय भवन में कांग्रेस द्वारा ‘भोपाल डिक्लेरेशन-2’ के मसौदे पर चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी।
इस बैठक का उद्देश्य दलितों और आदिवासियों के अधिकारों के लिए एक नया विजन दस्तावेज तैयार करना था।
मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, उदित राज और झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के. राजू जैसे दिग्गज नेता मौजूद थे।

वे न तो भौंक सकते हैं और न ही काट सकते हैं…
इसी दौरान संबोधन करते हुए फूल सिंह बरैया ने चुनाव प्रणाली पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान ‘संयुक्त चुनाव व्यवस्था’ (Joint Electoral System) के कारण आरक्षित सीटों से चुनकर आने वाले SC-ST के सांसद और विधायक अपनी बात रखने में अक्षम हैं।
उन्होंने अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि इन प्रतिनिधियों की स्थिति उन कुत्तों जैसी है जिनके मुंह पर पट्टी बंधी हो; वे न तो भौंक सकते हैं और न ही काट सकते हैं।
#WATCH | Madhya Pradesh: Congress MLA Phool Singh Baraiya says, “… Babasaheb Ambedkar regretted greatly that if there had been a separate electorate… We say, why don’t our MLAs, our MPs speak up? Because they have come from a joint electorate. They cannot speak. Babasaheb… pic.twitter.com/HFOMoiUIRl
— ANI MP/CG/Rajasthan (@ANI_MP_CG_RJ) January 14, 2026
बाबा साहब और चुनाव प्रणाली का हवाला
बरैया ने अपने तर्क के समर्थन में डॉ. भीमराव अंबेडकर का उल्लेख किया।
उन्होंने दावा किया कि बाबा साहब ने पहले ही चेतावनी दी थी कि संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र की व्यवस्था में हमारे प्रतिनिधि केवल रबर स्टैंप बनकर रह जाएंगे।
बरैया ने कहा, “बाबा साहब बाद में बहुत पछताते रहे कि काश ‘पृथक निर्वाचन’ (Separate Electorate) की व्यवस्था होती। आज हमारे लोग इसलिए नहीं बोल पाते क्योंकि वे दूसरे वर्गों के वोटों और पार्टियों के दबाव में होते हैं।”
Congress MLA Phool Singh Baraiya का विवादित बयान, कुत्ते से की सांसदों और विधायकों की तुलना! pic.twitter.com/mgew4DXgH2
— Aayudh (@AayudhMedia) January 14, 2026
उन्होंने आगे कहा कि जब तक समाज में जाति और धर्म देश से ऊपर रहेंगे, तब तक सामाजिक और आर्थिक बराबरी नहीं मिल सकती।
उनके अनुसार, प्राचीन ग्रंथों में दलितों और पिछड़ों के अधिकारों का हनन किया गया और आज भी वही मानसिकता हावी है।
कोशिश करें कि हमारा आदिवासी हिंदू न बन पाए
अपने भाषण में बरैया ने केवल राजनीतिक व्यवस्था पर ही नहीं, बल्कि धार्मिक पहचान पर भी बड़ा बयान दिया।
उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में हनुमान जी की मूर्तियां बांटी जा रही हैं ताकि उन्हें हिंदू पहचान में समेटा जा सके।
बरैया ने आह्वान किया, “हम कोशिश करें कि हमारा आदिवासी हिंदू न बन पाए।”
उन्होंने झारखंड के ‘सरना धर्म’ का उदाहरण देते हुए कहा कि आदिवासियों की मुक्ति का मार्ग उनके अपने अलग धर्म में है।

उन्होंने तर्क दिया कि आदिवासी अभी ‘सिविलाइज’ (सभ्य) नहीं हैं, इसलिए वे अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों को समझ नहीं पा रहे हैं।
जैसे ही वे हिंदू धर्म के दायरे से बाहर निकलेंगे, उनकी प्रगति का रास्ता खुल जाएगा।
CM मोहन यादव का पलटवार:
बरैया के इस बयान ने मध्य प्रदेश की सियासत में आग लगा दी है।
मुख्यमंत्री ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बयान कांग्रेस की सोच को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस केवल बातें करती है, जबकि भाजपा ने एक आदिवासी महिला (द्रौपदी मुर्मू) को देश के सर्वोच्च पद (राष्ट्रपति) पर बैठाया। छत्तीसगढ़ और ओडिशा में हमारे मुख्यमंत्री आदिवासी और पिछड़े समाज से हैं। बरैया का बयान उनकी मानसिक स्थिति और कांग्रेस की सोच दिखाता है।”

भाजपा के प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल ने इसे ‘मानसिक दिवालियापन’ करार दिया।
उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह की मौजूदगी में ऐसे बयान देना यह बताता है कि कांग्रेस नेतृत्व की इसमें मौन सहमति है।
कांग्रेस का बचाव:
विवाद बढ़ता देख कांग्रेस ने इस बयान से पल्ला झाड़ लिया है।
संगठन महामंत्री संजय कामले ने कहा कि यह बरैया के ‘निजी विचार’ हो सकते हैं, पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है।
हालांकि, मंच पर मौजूद बड़े नेताओं द्वारा बरैया को न टोकना अब चर्चा का विषय बना हुआ है।
कौन हैं फूल सिंह बरैया
- उम्र-64 वर्ष, शिक्षा- बीई
- एमपी की भांडेर विधानसभा से वर्तमान विधायक हैं।
- 2023 में 29,438 मतों के अंतर से विधानसभा चुनाव जीता।
- 2024 के लोकसभा चुनाव में भिंड सीट से चुनाव हार गए।
- 1998 में पहली बार बसपा के टिकट पर चुनाव जीते थे।
- बसपा में लंबा समय बीता
- 1990 में बहुजन समाज पार्टी से करियर की शुरुआत की।
- बसपा के संस्थापक कांशीराम के करीबी सहयोगी रहे।
- एमपी में बसपा के संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
- बतौर बसपा प्रदेश अध्यक्ष 1993 और 1998 में विधानसभा की 11 सीटें जीतीं।
- 2003 के चुनाव से पहले पार्टी से निष्कासित । बहुजन संघर्ष दल बनाया।
- 2019 में कांग्रेस में शामिल हो गए।
- 2020 में कांग्रेस ने राज्यसभा उम्मीदवार बनाया। निर्वाचित नहीं हो सके।


