Mukesh Nayak resignation: मध्यप्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर उथल-पुथल देखने को मिली है।
पार्टी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
यह कदम एक दिन पहले हुए ‘टैलेंट हंट’ विवाद के बाद उठाया गया है, जिसने पार्टी के भीतर गहरे मतभेदों को उजागर किया है।
टैलेंट हंट आदेश को लेकर विवाद
इस्तीफे की पृष्ठभूमि में 23 दिसंबर को जारी किया गया मुकेश नायक का एक आदेश है, जिसमें पार्टी के लिए नए मीडिया प्रतिनिधियों की खोज (टैलेंट हंट) की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश थे।
हालांकि, इस आदेश को मध्यप्रदेश कांग्रेस के कम्युनिकेशन इंचार्ज अभय तिवारी ने तुरंत निरस्त कर दिया।
इस एकतरफा फैसले के बाद ही मुकेश नायक ने इस्तीफा देने का मन बना लिया।

नए लोगों को मौका देने के लिए इस्तीफा
मुकेश नायक ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि वे “नए लोगों को आगे आने का मौका देने” के लिए यह कदम उठा रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि उन्होंने दो साल का कार्यकाल पूरी ईमानदारी और मेहनत से पूरा किया और प्रबंधन समिति की बैठक में भी यह बात पहले ही रखी थी।
हालांकि, राजनीतिक हलकों में इस इस्तीफे को टैलेंट हंट विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।
संगठन ने किया अस्वीकार
दूसरी तरफ मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक के त्यागपत्र को अस्वीकार कर दिया है।
संगठन महामंत्री संजय कामले द्वारा जारी आदेश में साफ कहा गया है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर मुकेश नायक का त्यागपत्र स्वीकार नहीं किया जा रहा है।

पत्र में लिखा गया है – “मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी निर्देशानुसार आपके द्वारा मीडिया विभाग अध्यक्ष पद से दिए गए त्यागपत्र को अस्वीकार किया जाता है। आपसे अपेक्षा है कि आप संगठन की मजबूती हेतु पूर्ववत मीडिया विभाग अध्यक्ष के रूप में अपने दायित्वों का सक्रियता के साथ निर्वहन करेंगे।”
यह आदेश संगठन महामंत्री संजय कामले ने जारी किया है।
दीपक जोशी पर विवादित बयान ने बढ़ाई मुश्किल
इससे पहले भी मुकेश नायक सुर्खियों में थे, जब उन्होंने पूर्व मंत्री और कांग्रेस से भाजपा लौटे दीपक जोशी के विवाह को लेकर एक विवादित बयान दिया था।
बुंदेली भाषा में दिए गए इस बयान में उन्होंने कहा था – “बीजेपी में चलो गओ दीपक जोशी। वैसे ही हमारी पार्टी में आओ और हमारी पार्टी में कार्यकर्ताओं की कमी थी, एक लुगाई (महिला) और ले गओ।”

यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और भाजपा ने इसे कांग्रेस नेताओं की “अनर्गल बयानबाजी” और “महिलाओं का अपमान” बताया।
भाजपा नेता रजनीश अग्रवाल ने कहा कि “केवल अनर्गल बयानबाजी करना, महिलाओं की दृष्टि से कुछ भी कहना, यह कांग्रेस की कार्य प्रणाली हो गई है।”
पार्टी में आंतरिक मतभेद
यह पूरा घटनाक्रम मध्यप्रदेश कांग्रेस में मौजूद आंतरिक मतभेदों और समन्वय की कमी को दर्शाता है।
एक प्रमुख पदाधिकारी के आदेश को दूसरे वरिष्ठ नेता द्वारा निरस्त करना पार्टी में स्पष्ट संचार और शक्ति संतुलन के मुद्दे उठाता है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस पार्टी इस स्थिति को कैसे संभालती है?


