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MP ESB Exam: अब मुन्नाभाइयों की खैर नहीं! आंखों की पुतली और फेस स्कैन के बाद ही मिलेगी एंट्री

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 13 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP ESB Exam Security 2026: मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) आगामी भर्ती परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी और धांधली मुक्त बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है।

साल 2023 की पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं और बायोमेट्रिक धोखाधड़ी से सबक लेते हुए, बोर्ड ने इस साल सुरक्षा के स्तर को कई गुना बढ़ा दिया है।

अब अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने से पहले त्रि-स्तरीय सुरक्षा जांच (फिंगरप्रिंट, फेस रिकॉग्निशन और आइरिस स्कैन) से गुजरना होगा।

क्यों जरूरी है यह सख्ती?

अक्सर देखा गया है कि कुछ ‘सॉल्वर’ दूसरों के स्थान पर परीक्षा देने पहुंच जाते हैं।

पूर्व में केवल फिंगरप्रिंट जांच होती थी, जिसमें सेंध लगाना मुमकिन था।

लेकिन इस बार आइरिस (आंखों की पुतली) स्कैन को अनिवार्य किया गया है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि उंगलियों के निशान की तुलना में आंखों की पुतली का पैटर्न कहीं ज्यादा मुश्किल होता है, जिसे कॉपी करना लगभग असंभव है।

इससे फर्जी अभ्यर्थियों की पहचान तुरंत हो जाएगी।

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AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) रखेगा पल-पल पर नजर

इस साल करीब 15,000 पदों के लिए होने वाली 16 भर्ती परीक्षाओं में AI का व्यापक उपयोग किया जाएगा।

यह तकनीक न केवल प्रश्नपत्र तैयार करने और परीक्षा केंद्रों के चयन में मदद करेगी, बल्कि परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों के व्यवहार का विश्लेषण भी करेगी।

एआई का ‘रेड अलर्ट’ सिस्टम:

अगर कोई अभ्यर्थी असामान्य रूप से बहुत जल्दी (जैसे 15-20 मिनट में) पूरा पेपर हल कर लेता है, तो AI सिस्टम तुरंत बोर्ड को ‘रेड अलर्ट’ भेजेगा।

सॉफ्टवेयर यह भी ट्रैक करेगा कि परीक्षार्थी ने किस प्रश्न पर कितना समय बिताया और वह कितनी देर खाली बैठा रहा।

इस डेटा विश्लेषण से संदिग्ध गतिविधियों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा।

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तीन एजेंसियों का घेरा और निगरानी

परीक्षा को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी तीन अलग-अलग एजेंसियों को सौंपी गई है।

केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जाएगी और जैमर लगाए जाएंगे ताकि कोई भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण काम न कर सके।

यह नई व्यवस्था विशेष रूप से पुलिस, शिक्षा और स्वास्थ्य विभागों की भर्तियों में लागू होगी, जहां पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है।

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