Kamal Nath on MP Debt: मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक ही शब्द गूंज रहा है- ‘कर्ज’।
विधानसभा के बजट सत्र से ठीक पहले प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए शिवराज-मोहन सरकार की आर्थिक नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

5 लाख करोड़ का भारी बोझ
कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर सरकार को घेरते हुए कहा कि आज मध्य प्रदेश कर्ज के उस दलदल में फंस गया है, जिससे बाहर निकलना मुश्किल होता जा रहा है।
उन्होंने बताया कि राज्य पर अब 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज हो चुका है।
चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे भारत के कुल कर्ज का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा अकेले मध्य प्रदेश के सिर पर है।
कमलनाथ ने आंकड़ों की तुलना करते हुए कहा कि साल 2007 में प्रदेश पर महज 52 हजार करोड़ का कर्ज था, जो अब 10 गुना बढ़कर 5 लाख करोड़ के पार चला गया है।
भारतीय जनता पार्टी की सरकारों ने मध्य प्रदेश को कर्ज़ प्रदेश बना दिया है।
भारतीय रिज़र्व बैंक की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश के ऊपर 5, लाख करोड़ रुपया से अधिक का कर्ज़ हो चुका है और मध्य प्रदेश के ऊपर देश के कुल कर्ज़ का 5% हिस्सा हो गया है।
भाजपा की सरकार ने कितनी… pic.twitter.com/Vrg5uk5aln
— Kamal Nath (@OfficeOfKNath) February 11, 2026
इवेंटबाजी और फिजूलखर्ची के आरोप
कमलनाथ का आरोप है कि सरकार जनता के पैसे का सही इस्तेमाल नहीं कर रही है।
उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकारी खजाना ‘इवेंटबाजी’ और बड़े कार्यक्रमों में लुटाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी सुविधाएं दम तोड़ रही हैं।
उन्होंने हाल ही में हुई कुछ दुखद घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि जनता जहरीली शराब, दूषित पानी और मिलावटी दवाओं से जूझ रही है, जबकि सरकार अपनी छवि चमकाने में व्यस्त है।
उनके अनुसार, यह पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है।

हफ्ते भर में दो बार लिया कर्ज
वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार की ताजा उधारी पर कड़ा ऐतराज जताया है।
उन्होंने बताया कि मोहन सरकार ने बजट सत्र से महज कुछ दिन पहले ही बाजार से 5 हजार करोड़ रुपये का नया कर्ज उठा लिया है।
गौर करने वाली बात यह है कि इससे पहले 4 फरवरी को भी सरकार ने 5300 करोड़ रुपये का ऋण लिया था।
सिंघार ने बताया कि चालू वित्त वर्ष (current financial year) में सरकार अब तक 36 बार कर्ज ले चुकी है, जो कुल मिलाकर 67,300 करोड़ रुपये होता है।
बजट सत्र से ठीक पहले मध्यप्रदेश सरकार द्वारा एक सप्ताह में दूसरी बार 5,000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया जाना अत्यंत गंभीर विषय है। चालू वित्त वर्ष में अब तक 67,300 करोड़ रुपये की उधारी और 36 बार कर्ज लिया जाना राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
हाल ही में जारी RBI…
— Umang Singhar (@UmangSinghar) February 11, 2026
विधानसभा में होगा हिसाब-किताब
उमंग सिंघार ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस इस मुद्दे को बजट सत्र में प्रमुखता से उठाएगी।
उन्होंने मांग की है कि सरकार प्रदेश की जनता को बताए कि इतने भारी कर्ज का ‘रोडमैप’ क्या है?
सरकार इस उधारी का पैसा कहां खर्च कर रही है और इसके बढ़ते ब्याज के बोझ को कैसे कम किया जाएगा?
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश को कर्ज के ढेर की नहीं, बल्कि एक जवाबदेह और पारदर्शी आर्थिक नीति की जरूरत है

कुलमिलाकर आने वाले बजट सत्र में यह मुद्दा गरमाना तय है।
आम जनता के लिए चिंता का विषय यह है कि कर्ज का यह बढ़ता ग्राफ भविष्य में प्रदेश की विकास योजनाओं और टैक्स पर क्या असर डालेगा।


