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मप्र ट्रांसफर पॉलिसी लागू: 3 साल टिके अफसरों की बदलेगी जगह, टारगेट पूरा न करने वालों की छुट्टी तय

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP Govt Transfer Policy 2026: मध्य प्रदेश के सरकारी गलियारों में आज से एक बड़ी हलचल शुरू होने जा रही है।

प्रदेश में लंबे समय से इंतजार कर रहे सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों (Transfers) का दौर आज यानी सोमवार से आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है।

मोहन यादव सरकार की नई तबादला नीति के तहत सभी विभागों को 15 जून 2026 तक अपने-अपने यहां प्रशासनिक और स्वैच्छिक (voluntarily) आधार पर फेरबदल करने की खुली छूट मिल गई है।

15 जून की समयसीमा खत्म होने के बाद किसी भी तरह के सामान्य ट्रांसफर नहीं किए जा सकेंगे।

इस महा-अभियान को लेकर पुलिस मुख्यालय (PHQ) से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग तक में सरगर्मियां तेज हो गई हैं।

पीएचक्यू ने तो 5 जून तक आरक्षक (कांस्टेबल) से लेकर सब-इंस्पेक्टर (SI) स्तर तक के पुलिसकर्मियों के तबादले पूरे करने के निर्देश दे दिए हैं, जिसके बाद जिलों के एसपी और पुलिस कमिश्नरों ने अपनी लिस्ट तैयार कर बदलाव शुरू भी कर दिए हैं।

किस विभाग में कितने प्रतिशत होंगे तबादले?

सरकार ने इस बार अंधाधुंध तबादलों पर लगाम लगाने के लिए विभागों में कर्मचारियों की कुल संख्या के हिसाब से एक दायरा (प्रतिशत) तय कर दिया है।

इसे आप इस तरह समझ सकते हैं:

छोटे विभाग (200 तक कर्मचारी): जिन विभागों में कुल स्टाफ 200 तक है, वहां सबसे ज्यादा यानी 20% तक कर्मचारियों का ट्रांसफर किया जा सकेगा।

मझोले विभाग (200 से 1000 कर्मचारी): ऐसे विभागों में कुल संख्या के 15% तक ही तबादले हो पाएंगे।

बड़े विभाग (1000 से 2000 कर्मचारी): यहाँ ट्रांसफर का दायरा सीमित कर 10% रखा गया है।

विशाल विभाग (2001 से अधिक कर्मचारी): शिक्षा या पुलिस जैसे बड़े महकमों में कुल संख्या के सिर्फ 5% कर्मचारियों के ही तबादले किए जा सकेंगे।

काम नहीं किया, तो 3 साल से पहले भी हटना तय

आमतौर पर माना जाता है कि किसी जगह पर 3 साल पूरे होने के बाद ही ट्रांसफर होता है।

नई नीति में प्रथम, द्वितीय और तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के लिए 3 साल का नियम तो रखा गया है, लेकिन सरकार ने इसमें एक बहुत बड़ा ट्विस्ट (बदलाव) दिया है।

अब 3 साल की अवधि अनिवार्य शर्त नहीं होगी।

अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी ने पिछले वित्तीय वर्ष (Financial Year) में सरकार द्वारा तय किया गया टारगेट’ (लक्ष्य) पूरा नहीं किया है, तो उसे सजा के तौर पर 3 साल से पहले भी उस जगह से हटाकर दूसरी जगह भेज दिया जाएगा।

प्रशासनिक कसावट लाने के लिए सरकार ऐसे ‘नॉन-परफॉर्मिंग’ कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर हटाएगी।

इन मामलों को नीति से रखा गया बाहर (नहीं लागू होगी लिमिट)

सरकार ने कुछ संवेदनशील और मानवीय आधार वाले मामलों को इस ट्रांसफर पॉलिसी की तय सीमा (प्रतिशत) से बाहर रखा है। इसमें मुख्य रूप से दो स्थितियां शामिल हैं:

1. पति-पत्नी को एक साथ रखने के मामले: अगर पति और पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं और उन्हें एक ही शहर या जिले में पदस्थापना चाहिए, तो उनके ट्रांसफर को इस नीति के प्रतिशत के दायरे से बाहर माना जाएगा।

2. गंभीर बीमारी के मामले: यदि कर्मचारी या उसके पति/पत्नी को कोई गंभीर बीमारी है और इलाज के सिलसिले में ट्रांसफर चाहिए, तो उसे भी विशेष छूट मिलेगी।

महिलाओं, बुजुर्ग कर्मचारियों और संगठन के नेताओं को बड़ी राहत

मोहन सरकार ने अपनी नई नीति में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कई वर्गों को बड़ी राहत दी है:

महिला कर्मचारी: अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता (पति द्वारा छोड़ी गई) महिला कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर उनके गृह जिले (Home District) में पदस्थ करने का नियम बनाया गया है।

रिटायरमेंट के करीब पहुंचे कर्मचारी: जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति (Retirement) में एक साल या उससे कम का समय बचा है, उन्हें सामान्य परिस्थितियों में उनके मौजूदा स्थान से नहीं डिगाया जाएगा, ताकि वे शांति से अपनी सेवा पूरी कर सकें।

कर्मचारी नेता: सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को भी बड़ी राहत मिली है। उन्हें उनके दो कार्यकाल यानी कुल चार वर्ष तक तबादले से छूट दी जाएगी।

दागी और जांच का सामना कर रहे अफसरों पर ‘नो एंट्री’

प्रशासन को साफ-सुथरा रखने के लिए नई नीति में कड़े प्रावधान किए गए हैं।

जिन भी अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ नैतिक पतन (Moral Turpitude) से जुड़े कोई आपराधिक मामले कोर्ट में चल रहे हैं, उन्हें किसी भी हाल में कार्यपालिक (Executive) पदों यानी फील्ड पोस्टिंग नहीं दी जाएगी।

इसके अलावा, जिनके खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Enquiry) पेंडिंग है, उन्हें भी लूप लाइन में ही रखा जाएगा।

अगर कोई कर्मचारी वित्तीय अनियमितता, गबन (corruption) या सरकारी पैसे के दुरुपयोग के मामले में पहली नजर में दोषी पाया जाता है, तो उसे तुरंत प्रभाव से उसके पद से हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

अब ‘सिफारिशी’ और ‘श्रृंखलाबद्ध’ तबादलों पर पूरी तरह रोक

अक्सर देखा जाता है कि एक पद खाली करने के लिए कई कर्मचारियों को लाइन से बदल दिया जाता है, जिसे ‘चेन ट्रांसफर’ या श्रृंखलाबद्ध तबादला कहते हैं।

सरकार ने साफ कहा है कि किसी रिक्त पद को भरने के लिए इस तरह के चेन ट्रांसफर नहीं किए जाएंगे।

केवल कोर्ट के आदेश, गंभीर शिकायत, पदोन्नति (Promotion) या प्रतिनियुक्ति (Deputation) से वापसी के मामलों में ही तय प्रक्रिया के तहत जगह बदली जाएगी।

डिजिटल कड़ाई: 15 जून के बाद के आदेश ‘शून्य’, सैलरी पर लगेगी रोक

भ्रष्टाचार और पिछली तारीखों में ट्रांसफर बैकडेटिंग रोकने के लिए सरकार ने पूरा सिस्टम ऑनलाइन कर दिया है।

  • सभी ट्रांसफर ऑर्डर ई-ऑफिस (e-Office) के जरिए ऑनलाइन ही जारी होंगे।
  • हर आदेश में कर्मचारी का ट्रेजरी एम्पलाई कोड (Employee Code) लिखना अनिवार्य होगा।
  • 15 जून की रात 12 बजे के बाद ई-ऑफिस से जारी होने वाला कोई भी आदेश मान्य नहीं होगा, उसे ‘शून्य’ (Zero) माना जाएगा।
  •  सबसे सख्त नियम यह है कि ट्रांसफर होने के बाद कर्मचारी की पुरानी जगह से सैलरी (वेतन) निकलना तुरंत बंद कर दिया जाएगा।
  • अगर इसके बाद भी वहां से सैलरी निकाली गई, तो इसे बड़ी वित्तीय गड़बड़ी माना जाएगा और कड़ा एक्शन होगा।
  • साथ ही, ट्रांसफर होने के बाद कर्मचारी को नई जगह जॉइन करने के बाद ही कोई छुट्टी (Leave) मिल सकेगी।

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