Narottam Mishra Govt Bungalow: मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों ‘सरकारी बंगले’ और उन पर लगने वाले ‘जुर्माने’ को लेकर जबरदस्त चर्चा है।
मामला पूर्व गृहमंत्री और दतिया के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा से जुड़ा है।
विधानसभा चुनाव 2023 में हार के बाद नरोत्तम मिश्रा न तो मंत्री रहे और न ही विधायक, लेकिन भोपाल स्थित उनका सरकारी बंगला उनके पास ही रहा।
अब खबर आ रही है कि सरकार न केवल उन्हें वही बंगला दोबारा आवंटित (Re-allot) करने वाली है, बल्कि उन पर लगा लाखों रुपए का जुर्माना भी माफ करने की तैयारी में है।

क्या है पूरा विवाद?
नियम के मुताबिक, जब कोई व्यक्ति मंत्री या विधायक नहीं रहता, तो उसे एक निश्चित समय सीमा के भीतर सरकारी आवास खाली करना होता है।
नरोत्तम मिश्रा को भोपाल में ‘B-Type’ बंगला आवंटित है, जिसका सामान्य किराया महज 3000 रुपए महीना है।
दिसंबर 2023 में चुनाव हारने के बाद उन्हें यह बंगला खाली करना था, लेकिन बार-बार नोटिस मिलने के बावजूद उन्होंने बंगला खाली नहीं किया।
नियमों के अनुसार, समय पर बंगला खाली न करने पर पेनाल्टी (जुर्माना) लगाई जाती है।
दिसंबर 2025 तक यह नियम था कि मूल किराए का 10 गुना जुर्माना लगेगा।
लेकिन जनवरी 2026 से सरकार ने नियमों को सख्त करते हुए इस जुर्माने को बढ़ाकर 30 गुना कर दिया।

लाखों में पहुंचा जुर्माने का आंकड़ा
हिसाब लगाया जाए तो दिसंबर 2025 तक के 24 महीनों का किराया और 10 गुना जुर्माना मिलाकर करीब 7.20 लाख रुपए होता है।
लेकिन जैसे ही जनवरी 2026 लगा, 30 गुना जुर्माने की नई दर लागू हो गई।
अब नरोत्तम मिश्रा पर बकाया राशि बढ़कर 21 लाख रुपए से भी ज्यादा हो चुकी है।
कैबिनेट के रास्ते ‘जुगाड़’ की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री के पास बंगला दोबारा आवंटित करने का अधिकार तो है, लेकिन नियम उन्हें जुर्माना माफ करने की इजाजत नहीं देते।
ऐसे में अफसरों ने बीच का रास्ता निकाला है।

पुराने रिकॉर्ड खंगाले गए तो पता चला कि साल 2020 के आसपास ‘भारतीय किसान संघ’ का भी ऐसा ही मामला फंसा था।
किसान संघ ने 15 साल तक शिवाजी नगर के एक बंगले का किराया नहीं दिया था।
तब कैबिनेट में एक विशेष प्रस्ताव लाकर उनका जुर्माना माफ कर दिया गया था और उनसे सिर्फ मूल किराया लिया गया था।
अब इसी मिसाल का इस्तेमाल नरोत्तम मिश्रा के लिए करने की तैयारी है।
अगर कैबिनेट इस प्रस्ताव को मंजूरी दे देती है, तो नरोत्तम मिश्रा को 21 लाख की जगह सिर्फ कुछ हजार रुपए का मूल किराया देना होगा।

अभी यह है सरकारी बंगलों का किराया
- B type: 3000 रुपए महीना
- C type: 2400 रुपए महीना
- D type: 1800 रुपए महीना
- E type: 1500 रुपए महीना
अफसरों में बढ़ी नाराजगी
जैसे ही यह खबर सचिवालय की गलियारों में पहुंची, आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बीच खुसफुसाहट शुरू हो गई है।
कई ऐसे अफसर हैं जो रिटायरमेंट या ट्रांसफर के बाद भी बंगलों में टिके हैं और भारी जुर्माना भर रहे हैं।
अफसरों का तर्क है कि अगर नेताओं के लिए नियम कमजोर किए जा सकते हैं और कैबिनेट से राहत मिल सकती है, तो सरकारी सेवा करने वाले अधिकारियों को यह रियायत क्यों नहीं मिलनी चाहिए?
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