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अंबेडकर पोस्टर विवाद: एडवोकेट अनिल मिश्रा को हाई कोर्ट से मिली जमानत, पुलिस को फटकार

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 13 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Ambedkar poster controversy: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने डॉ. भीमराव अंबेडकर का पोस्टर जलाने के आरोप में फंसे एडवोकेट अनिल मिश्रा को बड़ी राहत दी है।

कोर्ट ने उन्हें एक लाख रुपये के निजी मुचलके और उतनी ही जमानत राशि पर रिहा करने का आदेश दिया है।

इस फैसले के दौरान माननीय न्यायालय ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की और कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं।

पुलिस की कार्रवाई पर सवाल

हाई कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि अनिल मिश्रा को हिरासत में लेने की प्रक्रिया कानूनी रूप से गलत थी।

कोर्ट के अनुसार, उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था, जबकि पुलिस चाहती तो धारा के अनुरूप नोटिस देकर भी उन्हें छोड़ सकती थी।

एफआईआर दर्ज करने से लेकर गिरफ्तारी तक की प्रक्रिया में कई खामियां पाई गईं, जिसके लिए पुलिस को फटकार लगाई गई है।

क्या था पूरा मामला?

यह विवाद 1 जनवरी की रात को शुरू हुआ था, जब ग्वालियर में डॉ. अंबेडकर का पोस्टर जलाने और विवादित नारेबाजी करने का आरोप लगा था।

ग्वालियर साइबर पुलिस ने इस मामले में अनिल मिश्रा समेत 8 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

एडवोकेट अनिल मिश्रा चार दिन से जेल में बंद हैं।

इस घटना के बाद दलित संगठनों, विशेषकर भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी ने ग्वालियर कलेक्ट्रेट पर उग्र प्रदर्शन किया था।

प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि आरोपियों पर कड़ा कानून (NSA) लगाया जाए।

कोर्ट की शर्तें और आगे की राह

जमानत देते हुए कोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए किसी भी प्रकार का जुलूस या विरोध प्रदर्शन निकालने पर रोक लगा दी है।

कानून के जानकारों का मानना है कि अनिल मिश्रा को मिली इस राहत के बाद, मामले में शामिल अन्य आरोपियों के लिए भी जमानत के रास्ते खुल सकते हैं।

साथ ही, अब इस एफआईआर को पूरी तरह रद्द कराने के लिए कानूनी लड़ाई की तैयारी की जा रही है।

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