Inflation in Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश में रहने वाले आम आदमी के लिए मौजूदा हालात चुनौतियों भरे साबित हो रहे हैं।
अगर आप इंदौर के 56 दुकान पर पोहा खाने का मन बना रहे हैं या जबलपुर में समोसे-जलेबी का स्वाद लेना चाहते हैं, तो अपनी जेब थोड़ी और ढीली करने के लिए तैयार हो जाइए।
प्रदेश में एलपीजी (LPG) की भारी किल्लत और पीएनजी (PNG) की आसमान छूती कीमतों ने जनता के घरेलू बजट की धज्जियां उड़ा दी हैं।

क्यों सुलग रही है महंगाई की आग?
इस महंगाई के पीछे केवल स्थानीय कारण नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां भी जिम्मेदार हैं।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव ने वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन को प्रभावित किया है।
ईरान से आने वाले सूखे मेवे (Dry Fruits) और पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही पर असर पड़ा है, जिसका सीधा नतीजा हमारे रसोई घर और थाली तक पहुंच गया है।
इंदौर: जायके के शहर में स्वाद हुआ महंगा
इंदौर, जिसे अपनी ‘चटोरेपन’ के लिए जाना जाता है, वहां भी अब सन्नाटा पसरने लगा है। मशहूर ’56 दुकान’ और ‘सराफा बाजार’ में खाने-पीने की चीजों के दाम ₹1 से लेकर ₹10 तक बढ़ गए हैं।
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जॉनी हॉट डॉग: जो कभी ₹30 में मिलता था, अब ₹35 का हो गया है।
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चाय का झटका: सड़क किनारे मिलने वाली ₹10 की चाय अब ₹14 की हो गई है। गैस सिलेंडर और दूध के दाम बढ़ने के बाद दुकानदारों के पास रेट बढ़ाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था।
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ग्राहक गायब: जो परिवार पहले हफ्ते में 3 बार बाहर खाना खाते थे, वे अब महीने में एक बार जाने से भी कतरा रहे हैं। ग्राहकों का कहना है कि जहां दो लोगों का खाना ₹400 में हो जाता था, अब बिल ₹800 के पार जा रहा है।

ग्वालियर: ड्राई फ्रूट्स अब ‘अमीरों’ की थाली की शोभा
ग्वालियर में महंगाई की मार का सबसे ज्यादा असर किराना और सूखे मेवों पर पड़ा है।
व्यापारियों का कहना है कि ईरान में युद्ध की स्थिति के कारण आयात बंद सा हो गया है।
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पिस्ता: इसमें ₹300 से ₹400 प्रति किलो का भारी उछाल आया है।
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किशमिश और काली मिर्च: इनकी कीमतों में भी ₹100 से ₹200 की बढ़त देखी जा रही है।
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ईंधन की कमी: कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई रुकने से दुकानदार अब घरेलू सिलेंडर का स्टॉक करने लगे हैं, जिससे आम जनता को खाना पकाने वाली गैस भी आसानी से नहीं मिल रही है।

जबलपुर और भोपाल: नाश्ते की प्लेट पर बढ़ा बोझ
राजधानी भोपाल और संस्कारधानी जबलपुर में भी हाल बेहाल हैं।
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भोपाल: यहां पोहा, समोसा और कचोरी के दाम ₹2 से ₹5 बढ़ गए हैं। जो वेज बिरयानी ₹80 में मिलती थी, वह अब ₹90 की हो गई है।
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जबलपुर: यहां समोसे की कीमत ₹13 से बढ़कर ₹15 हो गई है, जबकि जलेबी ₹300 प्रति किलो के पार चली गई है।

रीवा: अब प्यास बुझाना भी हुआ महंगा
हैरानी की बात तो यह है कि रीवा में अब पानी पीना भी महंगा हो गया है।
भीषण गर्मी के बीच जल वितरण संघ ने 20 लीटर वाले पानी के जार की कीमत ₹25-30 से बढ़ाकर सीधे ₹40 कर दी है।
मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अब शुद्ध पेयजल खरीदना भी एक अतिरिक्त बोझ बन गया है।

आखिर क्यों बढ़ रहे हैं दाम? (मुख्य कारण)
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गैस की किल्लत: कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें कुछ जगहों पर ₹3000 से ₹4000 तक पहुंच गई हैं।
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कच्चा माल: तेल, दाल, चावल और शक्कर जैसी बुनियादी चीजों की कीमतों में ₹10 से ₹20 प्रति किलो की तेजी आई है।
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पैकेजिंग: डिस्पोजल और पैकिंग मटेरियल के दाम दोगुने हो गए हैं।
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बिजली और PNG: बिजली बिलों में बढ़ोत्तरी और पीएनजी बिलिंग की नई लिमिट ने होटल मालिकों की कमर तोड़ दी है।

मध्य प्रदेश की जनता इस समय चौतरफा महंगाई से घिरी हुई है। एक तरफ वैश्विक युद्ध की आहट और दूसरी तरफ बढ़ती लागत।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान-इजरायल तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले 15 दिनों में स्थितियां और भी भयावह हो सकती हैं।
फिलहाल, आम आदमी के लिए ‘अच्छे दिन’ की उम्मीद अब केवल बजट के संभलने पर टिकी है।
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