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नए लेबर लॉ के खिलाफ MP में सड़कों पर उतरे कर्मचारी, बैंक से लेकर डिफेंस फैक्ट्रियों तक दिखा असर

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Labor Law Strike MP: मध्य प्रदेश समेत पूरे देश में आज सरकारी नीतियों और नए लेबर लॉ (श्रम कानूनों) के विरोध में मजदूरों और कर्मचारियों ने हड़ताल की।

केंद्रीय श्रमिक संगठनों के आह्वान पर बुलाई गई इस हड़ताल का असर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मिला-जुला रहा।

जबलपुर और इटारसी जैसे औद्योगिक शहरों में सुबह-सुबह इसका व्यापक असर देखा गया, जहां डिफेंस सेक्टर के कर्मचारियों ने गेट पर खड़े होकर नारेबाजी की।

जबलपुर और इटारसी में क्या हुआ?

इटारसी की ऑर्डनेंस फैक्टरी में ‘ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन’ के नेतृत्व में कर्मचारियों ने काम का बहिष्कार किया।

हालांकि, यह विरोध सांकेतिक था; करीब एक घंटे तक अपनी आवाज बुलंद करने के बाद कर्मचारी वापस काम पर लौट गए।

जबलपुर में भी यही स्थिति रही। राहत की बात यह रही कि आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी पर ज्यादा असर नहीं पड़ा, क्योंकि बाजार, स्कूल और कॉलेज सामान्य रूप से खुले रहे।

बैंक और बीमा सेक्टर पर असर

बैंकों में लेन-देन करने पहुंचे लोगों को कुछ परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि सरकारी बैंकों के साथ-साथ कुछ प्राइवेट बैंक भी इस हड़ताल का हिस्सा हैं।

मध्य प्रदेश बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन ने साफ किया है कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) सीधे तौर पर काम बंद नहीं कर रहा है, लेकिन उसने हड़ताल को नैतिक समर्थन दिया है।

इसके अलावा LIC (बीमा), BSNL और डाक विभाग के कर्मचारी भी अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं।

इंदौर और रतलाम में आक्रोश

इंदौर के गांधी हॉल में आशा-उषा कार्यकर्ताओं और सुपरवाइजर्स ने बड़ा धरना प्रदर्शन किया।

उनका कहना है कि सरकार की नई नीतियां उनके रोजगार की सुरक्षा छीन रही हैं।

वहीं, रतलाम में ट्रेड यूनियन नेता ईश्वर लाल पुरोहित ने सरकार पर तीखा हमला बोला।

उन्होंने कहा कि “36 प्रतिशत वोट लेकर बनी सरकार” अपनी कठोरता दिखा रही है और कर्मचारियों पर ‘काले कानून’ थोप रही है जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कर्मचारी क्यों हैं नाराज? (प्रमुख मांगें)

कर्मचारियों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह ‘चार लेबर कोड’ हैं।

उनका मानना है कि ये नए कानून कंपनियों को फायदा पहुंचाएंगे और मजदूरों के अधिकार कम कर देंगे।

इसके अलावा, बिजली संशोधन विधेयक, न्यूक्लियर एनर्जी से जुड़ा ‘शांति एक्ट’ (SHANTI Act) और विकसित भारत-रोजगार मिशन 2025 को रद्द करने की मांग भी जोर-शोर से उठाई जा रही है।

कर्मचारी चाहते हैं कि सरकार मनरेगा को पुराने स्वरूप में पूरी तरह बहाल करे।

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