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मंत्रालय में बवाल: 19 सूत्रीय मांगों पर अड़े कर्मचारी, राजभवन और विधानसभा में भी गूंजेगी विरोध की आवाज

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP Ministry Employees Protest: मध्य प्रदेश में मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

लंबे समय से अपनी मांगों की अनदेखी से नाराज कर्मचारी अब ‘आर-पार’ की लड़ाई के मूड में हैं।

इस आंदोलन की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ मंत्रालय ही नहीं, बल्कि राजभवन और विधानसभा के कर्मचारियों के भी शामिल होने की संभावना है।

आखिर क्यों नाराज हैं कर्मचारी?

मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष, इंजीनियर सुधीर नायक के नेतृत्व में हुई एक आपात बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि अब ज्ञापन देने का समय निकल चुका है और ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

कर्मचारियों की नाराजगी के मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं:

  1. चौथा समयमान वेतनमान: राज्य के अन्य कई विभागों में कर्मचारियों को चौथा समयमान वेतनमान मिलना शुरू हो गया है, लेकिन विडंबना देखिए कि जिस सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने 2020 में इसके आदेश जारी किए थे, उसी विभाग के यानी मंत्रालय के कर्मचारी आज भी इससे वंचित हैं।

  2. कैशलेस हेल्थ स्कीम: कर्मचारी चाहते हैं कि उन्हें और उनके परिवार को इलाज के लिए कैशलेस सुविधा मिले। ताज्जुब की बात यह है कि इस योजना से सरकार पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ना है, फिर भी फाइलें दफ्तरों में धूल फांक रही हैं।

  3. स्थायीकर्मियों की अनदेखी: प्रदेश के कई स्थायीकर्मी आज भी सातवें वेतनमान के लाभ का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा आउटसोर्स कर्मचारियों के काम के घंटे तय न होना और उन्हें न्यूनतम वेतन न मिलना भी एक बड़ा मुद्दा है।

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अधूरे वादे और लंबित परीक्षाएं

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकार और प्रशासन केवल आश्वासन देते हैं।

मंत्री स्थापना और मंत्रालय में काम करने वाले आकस्मिकता निधि कर्मचारियों को नियमित करने के लिए तीन साल पहले परीक्षा ली गई थी, लेकिन उसका रिजल्ट आज तक घोषित नहीं हुआ।

इससे युवाओं और कर्मचारियों में भारी हताशा है।

साथ ही, कर्मचारी चाहते हैं कि केंद्र सरकार की तर्ज पर 25 साल की सेवा पूरी होने पर पूरी पेंशन का प्रावधान लागू किया जाए।

एकजुट हो रहा है कुनबा

इस बार आंदोलन का स्वरूप बड़ा होने वाला है। सुधीर नायक ने बताया कि वे केवल मंत्रालय तक सीमित नहीं रहेंगे।

उन्होंने विधानसभा, राजभवन, विधि विभाग, शीघ्रलेखक संघ और अजाक्स जैसे संगठनों से भी संपर्क किया है।

इन सभी विभागों में समस्याएं लगभग एक जैसी हैं, इसलिए सभी को एक मंच पर लाने की तैयारी है।

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आगे की रणनीति

संघ ने साफ कर दिया है कि आंदोलन की सूचना सामान्य प्रशासन विभाग और सुरक्षा अधिकारियों को दे दी गई है।

जल्द ही एक विस्तृत कैलेंडर जारी किया जाएगा जिसमें बताया जाएगा कि कब काम बंद होगा और कब प्रदर्शन किए जाएंगे।

कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी 19 सूत्रीय मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, वे पीछे नहीं हटेंगे।

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