MP New Liquor Policy 2026-27: मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नई आबकारी नीति का मसौदा तैयार कर लिया है।
इस नई नीति के लागू होने से प्रदेश में शराब की कीमतें बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।
मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता वाली ‘हाई एम्पावर्ड कमेटी’ ने नीति के मसौदे को हरी झंडी दे दी है और जल्द ही इसे अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट के सामने रखा जाएगा।
राजस्व का बड़ा लक्ष्य और नीलामी का नया गणित
सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए शराब से होने वाली कमाई का लक्ष्य 19,000 करोड़ रुपए तय किया है।
यह पिछले साल के 16,000 करोड़ रुपए के लक्ष्य से सीधे 3,000 करोड़ रुपए अधिक है।

इस भारी-भरकम राजस्व को हासिल करने के लिए सरकार ने दुकानों की नीलामी प्रक्रिया में बदलाव किया है।
अब शराब दुकानों की नीलामी 20% अधिक रिजर्व प्राइस (आरक्षित मूल्य) पर की जाएगी।
हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में शराब की नई दुकानें नहीं खोली जाएंगी; वर्तमान में संचालित 3,553 दुकानों की ही एकल ई-टेंडरिंग के माध्यम से नीलामी होगी।
भ्रष्टाचार पर नकेल: ई-चालान और डिजिटल गारंटी
विगत वर्षों में आबकारी विभाग में हुए करोड़ों के फर्जीवाड़े से सबक लेते हुए नई नीति में तकनीक का सहारा लिया गया है।
इंदौर में हुए 100 करोड़ रुपए के चालान फर्जीवाड़े के बाद, अब केवल ‘ई-चालान’ और ‘ई-बैंक गारंटी’ को ही मान्यता दी जाएगी।

इससे पहले मैनुअल चालान में हेराफेरी कर गोदामों से शराब निकाल ली जाती थी।
इस कदम से न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि राजस्व की चोरी पर भी लगाम लगेगी।
ठेकेदारों की चुनौतियां और जमीनी हकीकत
भले ही सरकार राजस्व बढ़ाने की तैयारी में है, लेकिन शराब ठेकेदार कई समस्याओं से जूझ रहे हैं।
सतना, देवास, मंदसौर और इंदौर जैसे जिलों में कई ठेकेदारों ने घाटे और अन्य कारणों से अपने ठेके बीच में ही छोड़ दिए।
देवास में एक ठेकेदार द्वारा आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाने के बाद यह मामला काफी गरमा गया है।

इसके अलावा, कई जिलों में शराब की ‘मोनोपॉली’ यानी एकाधिकार की शिकायतें भी आम हैं, जहां शराब को निर्धारित MRP से कहीं ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है और देसी शराब की किल्लत पैदा की जा रही है।
धार्मिक नगरों में पूर्ण शराब बंदी
मोहन सरकार ने अपनी इस नीति में सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों का भी ध्यान रखा है।
1 अप्रैल 2025 से ही प्रदेश के 19 प्रमुख धार्मिक शहरों और गांवों (जैसे उज्जैन, ओंकारेश्वर, मैहर, चित्रकूट आदि) में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
इसके साथ ही, शराब दुकानों की स्थिति को लेकर कड़े नियम बनाए गए हैं।
अब कोई भी दुकान स्कूल, कॉलेज या मंदिर से 150 मीटर के दायरे में नहीं हो सकेगी।
साथ ही, हाईवे से गुजरने वाले यात्रियों को भी दुकानें सीधे नजर नहीं आएंगी।

कंपोजिट शॉप मॉडल की समीक्षा
सरकार ने उत्तर प्रदेश की तर्ज पर ‘कंपोजिट शॉप’ मॉडल (जहां देसी और अंग्रेजी शराब एक साथ मिलती है) को प्रदेश में लागू किया था।
इस मॉडल से राजस्व में काफी वृद्धि देखी गई है।
सरकार अब इस मॉडल के पिछले परिणामों की समीक्षा कर रही है और अगले तीन महीनों के डेटा के आधार पर इसे और अधिक प्रभावी बनाने की योजना है।
दुकानों पर डिजिटल भुगतान और पारदर्शिता के लिए पीओएस (POS) मशीनें लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
नियम न मानने वाले ठेकेदारों के लाइसेंस निरस्त करने तक के कड़े प्रावधान किए गए हैं।


