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MP में साइबर ठगी पर बड़ा एक्शन: ऑनलाइन FIR के बाद थाने जाकर करने होंगे साइन, वरना रद्द होगी शिकायत

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 13 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

MP Cyber ​​Fraud New Rules: मध्यप्रदेश में साइबर अपराधियों के बढ़ते जाल को देखते हुए राज्य पुलिस और गृह विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली में एक बड़ा बदलाव किया है।

अब राज्य में 1 लाख रुपये या उससे अधिक की साइबर धोखाधड़ी होने पर ई-एफआईआर (e-FIR) दर्ज करने की प्रक्रिया को और अधिक जवाबदेह बनाया गया है।

डीजीपी (DGP) कैलाश मकवाना द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब शिकायतकर्ता के लिए डिजिटल शिकायत के बाद शारीरिक रूप से थाने पहुंचना अनिवार्य होगा।

क्या है नया नियम और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

पहले की व्यवस्था के अनुसार, साइबर धोखाधड़ी के मामलों में राज्य साइबर पुलिस केवल 2 लाख रुपये या उससे अधिक की राशि वाले मामलों में ही एफआईआर दर्ज करती थी।

लेकिन साइबर अपराधों की बढ़ती संख्या और छोटे-बड़े हर तरह के फ्रॉड पर नकेल कसने के लिए इस सीमा को घटाकर 1 लाख रुपये कर दिया गया है।

इस बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘हस्ताक्षर’ (Signature) से जुड़ा है।

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अब अगर कोई नागरिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से e-FIR दर्ज करता है, तो उसे 3 दिनों के भीतर संबंधित पुलिस स्टेशन जाकर अपने आवेदन पर हस्ताक्षर करने होंगे।

अगर शिकायतकर्ता 30 दिनों के भीतर थाने जाकर साइन नहीं करता है, तो वह e-FIR अपने आप निरस्त (Cancel) मान ली जाएगी।

हस्ताक्षर के बिना भी जारी रहेगी जांच

नए नियमों की सबसे अच्छी बात यह है कि पुलिस प्रक्रिया में देरी नहीं करेगी।

जैसे ही कोई व्यक्ति e-FIR दर्ज करेगा, पुलिस की प्राथमिक जांच (Preliminary Investigation) तुरंत शुरू हो जाएगी।

शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर का इंतजार किए बिना ही पुलिस निम्नलिखित कदम उठाएगी:

  • धोखाधड़ी में शामिल बैंक खातों को फ्रीज करना।
  • संदिग्ध नंबरों के CDR (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) और SDR (सब्सक्राइबर डिटेल) निकालना।
  • जरूरत पड़ने पर CCTV फुटेज और तकनीकी साक्ष्य जुटाना।

यह प्रावधान इसलिए किया गया है ताकि अपराधी को पैसे निकालने या सबूत मिटाने का मौका न मिले।

हालांकि, मामले को कानूनी रूप से आगे बढ़ाने और कोर्ट में पेश करने के लिए शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे।

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ई-एफआईआर (e-FIR) क्या है?

ई-एफआईआर एक ऐसी डिजिटल सुविधा है जिसके माध्यम से पीड़ित व्यक्ति को तुरंत थाने जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

वह अपने मोबाइल या कंप्यूटर से घर बैठे अपराध की सूचना पुलिस तक पहुंचा सकता है।

मध्यप्रदेश में यह सुविधा वाहन चोरी और सामान्य चोरी जैसे मामलों में पहले से उपलब्ध है, लेकिन अब साइबर अपराधों में इसे विशेष सख्ती के साथ लागू किया गया है।

साइबर ठगी से बचने के लिए पुलिस की सलाह

नियमों में बदलाव के साथ-साथ मध्यप्रदेश पुलिस ने नागरिकों के लिए कुछ सुरक्षा टिप्स भी जारी किए हैं:

  1. अनजान लिंक से बचें: किसी भी लुभावने ऑफर या अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें।
  2. टास्क फ्रॉड से सावधान: आजकल ‘घर बैठे कमाई’ या ‘वीडियो लाइक’ करने जैसे ऑनलाइन टास्क के नाम पर लाखों की ठगी हो रही है, इनसे बचें।
  3. ऑफिशियल प्लेटफॉर्म: हमेशा बैंक के आधिकारिक ऐप या वेबसाइट का ही उपयोग करें।
  4. त्वरित सूचना: यदि आपके साथ ठगी होती है, तो तुरंत 1930 डायल करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।

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मध्यप्रदेश सरकार का यह कदम पुलिसिंग को आधुनिक बनाने और पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाने की दिशा में एक प्रभावी पहल है।

1 लाख रुपये की सीमा कम होने से अब ज्यादा लोग कानूनी दायरे में आ सकेंगे, वहीं 30 दिन के भीतर हस्ताक्षर का नियम फर्जी शिकायतों को रोकने में मदद करेगा।

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