Prisoner returned by family: मध्य प्रदेश के सिवनी जिला जेल से सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए तीन कैदियों के फरार होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
बुधवार शाम करीब 6 बजे हुए इस घटनाक्रम ने जेल प्रशासन की सतर्कता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि, इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब फरार कैदियों के परिजनों ने ही उन्हें कानून के हवाले कर अपनी जिम्मेदारी निभाई।
दीवार लांघकर हुए फरार
जानकारी के अनुसार, जेल में बंद अंकित (निवासी लखनवाड़ा), विशाल (निवासी लखनवाड़ा) और विशाल (निवासी गोंदिया) पाक्सो एक्ट के तहत विचाराधीन कैदी थे।
बुधवार की शाम जब जेल परिसर में हलचल कम थी, इन तीनों ने फिल्मी अंदाज में भागने की योजना बनाई।
बताया जा रहा है कि कैदियों ने एक-दूसरे का सहारा लेकर (ह्यूमन लैडर बनाकर) करीब 20 फीट ऊंची दीवार को फांद लिया।
हैरान करने वाली बात यह है कि जेल में सीसीटीवी कैमरे लगे होने और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बावजूद किसी को भी भनक तक नहीं लगी।
परिजनों ने वापस जेल भेजा
कैदियों के भागने का खुलासा तब हुआ जब शाम की गिनती की गई।
तीन कैदियों के कम पाए जाने पर जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया।
तत्काल डूंडासिवनी थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई।
जेल प्रशासन ने सतर्कता दिखाते हुए तुरंत फरार कैदियों के परिजनों से संपर्क साधा और उन्हें स्थिति की गंभीरता समझाई।
प्रशासन की समझाइश और कानूनी कार्रवाई के डर के बीच, परिजनों ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझी।
जैसे ही तीनों कैदी अपने घरों या परिचितों के पास पहुंचे, परिजनों ने उन्हें छुपाने के बजाय वापस जेल ले जाने का निर्णय लिया।
गुरुवार सुबह होते ही परिजन तीनों को लेकर जिला जेल पहुंचे और उन्हें अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया।
व्यवस्थाओं पर उठे सवाल
भले ही कैदी वापस सलाखों के पीछे पहुंच गए हों, लेकिन इस घटना ने जेल की सुरक्षा पोल खोल दी है।
20 फीट ऊंची दीवार फांदना कोई एक मिनट का काम नहीं है, इसके बावजूद गार्ड्स का अनजान रहना बड़ी लापरवाही की ओर इशारा करता है।
फिलहाल, जेल अधीक्षक अजय सिंह वर्मा की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों की मानें तो लापरवाह सुरक्षाकर्मियों पर गाज गिरना तय है।
पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है कि क्या इस भागने की योजना में किसी अंदरूनी व्यक्ति की मदद तो नहीं ली गई थी।


