MP Police Helmet Challan: मध्य प्रदेश में लगातार बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए प्रदेश सरकार और परिवहन विभाग ने यातायात नियमों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।
राज्य में सड़क सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर लगाम कसने के लिए विभाग ने फील्ड स्टाफ के अधिकारों को और बढ़ा दिया है।
अब मध्य प्रदेश की सड़कों पर केवल इंस्पेक्टर या सब-इंस्पेक्टर ही नहीं, बल्कि हेड कॉन्स्टेबल (प्रधान आरक्षक) भी नियम तोड़ने वालों का चालान काट सकेंगे।
42 हेड कॉन्स्टेबलों को मिला अधिकार
परिवहन विभाग ने एक आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी कर विभाग के 42 हेड कॉन्स्टेबलों को चालान काटने और शमन शुल्क (Spot Fine) वसूलने का अधिकार दे दिया है।
अब तक यह शक्ति केवल वरिष्ठ अधिकारियों और मंडल स्तर के अधिकारियों के पास सीमित थी।
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य फील्ड स्टाफ की कमी को दूर करना और सड़कों पर पुलिस की प्रभावी मौजूदगी दर्ज कराना है।
अक्सर देखा जाता था कि अधिकारी कम होने के कारण कई वाहन चालक नियमों का उल्लंघन कर बच निकलते थे, लेकिन अब हेड कॉन्स्टेबल को सशक्त बनाने से जांच का दायरा बढ़ जाएगा।
हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि ये हेड कॉन्स्टेबल मोटर व्हीकल एक्ट की लगभग सभी धाराओं के तहत कार्रवाई कर सकेंगे, लेकिन उन्हें टैक्स संबंधी मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होगा।
बढ़ता जुर्माना
नए नियमों के तहत केवल चालान काटने वाले अधिकारियों की संख्या ही नहीं बढ़ी है, बल्कि जुर्माने की राशि को भी बढ़ा दिया गया है।
दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य है, फिर भी लोग इसे नजरअंदाज करते हैं।
इसे देखते हुए, हेलमेट न पहनने पर लगने वाले जुर्माने को 300 रुपये से बढ़ाकर अब 500 रुपये कर दिया गया है।
सरकार का मानना है कि जुर्माने की राशि बढ़ने से लोग सुरक्षा के प्रति अधिक गंभीर होंगे।
क्यों पड़ी सख्ती की जरूरत?
2025 के आंकड़े मध्य प्रदेश के लिए डराने वाले रहे हैं।
जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच प्रदेश में कुल 1.23 लाख सड़क हादसे दर्ज किए गए।
इसका सीधा मतलब है कि राज्य में हर दिन औसतन 400 से ज्यादा दुर्घटनाएं हो रही हैं।
इन हादसों में सबसे बड़ा कारण तेज रफ्तार (Over Speeding) और रात के समय की गई लापरवाही भरी ड्राइविंग (Night Driving) को माना गया है।
हादसों के मामले में जिलों की स्थिति देखें तो:
-
सागर: 6,744 मामलों के साथ सबसे ऊपर रहा।
-
इंदौर: 5,169 हादसे दर्ज किए गए।
-
भोपाल: 4,905 हादसों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
बदलाव से होने वाले फायदे
- तत्काल कार्रवाई: फील्ड पर ज्यादा स्टाफ होने से मौके पर ही कार्रवाई संभव होगी।
- अपराधों में कमी: पुलिस की सक्रियता बढ़ने से लोग रेड लाइट जंप करने और ओवरस्पीडिंग से बचेंगे।
- हादसों में गिरावट: सख्त जुर्माने और निगरानी से सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ को नीचे लाने में मदद मिलेगी।
कुलमिलाकर सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह आम नागरिक के जीवन से जुड़ा मामला है।
प्रधान आरक्षकों को मिले इन नए अधिकारों और बढ़े हुए जुर्माने का उद्देश्य जनता को परेशान करना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाना है।
वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग न करें, स्पीड लिमिट का पालन करें और हमेशा हेलमेट या सीट बेल्ट का प्रयोग करें।


