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घोड़ी पर सवार होकर दूल्हे को निमंत्रण देने पहुंचीं दुल्हन, कहा- लड़के ही क्यों हमेशा मजे करें?

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 13 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Ujjain Unique Bride: मंगलवार, 25 नवंबर को उज्जैन में एक अनोखी शादी ने सबका ध्यान खींचा।

यहां एक दुल्हन परंपराओं को तोड़ते हुए घोड़ी पर सवार होकर अपने होने वाले पति से मिलने पहुंची।

बैंड-बाजे और जश्न के बीच दुल्हन की इस अनोखी एंट्री को देखने के लिए राहगीर भी रुक गए। और कई लोगों ने तो दुल्हन के वीडियो भी बनाए।

श्रीमाली समाज की अनूठी परंपरा का निर्वाह

यह शादी थी अहमदाबाद में बैंक अधिकारी और इंदौर निवासी अपूर्वा ओझा तथा बड़ोदा निवासी हर्ष दवे की।

अपूर्वा ने राजस्थान के श्रीमाली समाज की सालों पुरानी परंपरा को निभाते हुए सजी-धजी बारात के साथ होटल पहुंचकर हर्ष को निमंत्रण दिया।

दुल्हन के जोशीले अंदाज और इस अद्भुत दृश्य ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

“लड़कियां भी पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल सकती हैं”

घोड़ी पर सवार होकर चश्मा लगाए अपूर्वा ने इस परंपरा के पीछे की सोच साझा करते हुए कहा,

“लड़के ही क्यों हमेशा मज़ा करें? हमारे समाज में महिलाओं को पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का मौका दिया जाता है। इसलिए मैंने यह परंपरा निभाने का फैसला किया और मुझे बहुत मज़ा आया।”

उनकी इस खास परंपरा को देखने के लिए इंदौर, बैंगलोर और बड़ोदा से उनकी सहेलियां भी विशेष रूप से उज्जैन पहुंची थीं।

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समाज की वर्षों पुरानी परंपरा

दूल्हे हर्ष दवे ने भी इस पल को बेहद खास बताया।

उन्होंने कहा, “यह हमारे समाज की वर्षों पुरानी परंपरा है, जहां पहले दुल्हन और फिर दूल्हा घोड़ी पर बैठता है। इसे निभाने पर मुझे गर्व है और दुल्हन का इस तरह आना मेरे लिए बहुत खुशी की बात है।”

यह मामला सिर्फ एक शादी का नहीं, बल्कि एक सामाजिक सोच को बदलने का है, जो लैंगिक समानता को बढ़ावा देता है और दर्शाता है कि खुशियां मनाने और परंपराओं को निभाने का अधिकार सभी को है।

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