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सुप्रीम कोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा की विधायकी बरकरार रखी, लेकिन राज्यसभा चुनाव में वोटिंग और सैलरी पर रोक

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Mukesh Malhotra Vijaypur MLA: मध्य प्रदेश की राजनीति में श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा सीट पिछले काफी समय से चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

इस सीट को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में अब देश की सबसे बड़ी अदालत, यानी सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया है।

कोर्ट ने कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा की विधायकी को फिलहाल सुरक्षित कर दिया है, जिससे मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।

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Mukesh Malhotra

क्या था पूरा मामला?

विवाद की शुरुआत तब हुई जब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन को शून्य (निरस्त) घोषित कर दिया था।

हाईकोर्ट का कहना था कि मल्होत्रा ने चुनाव के दौरान अपने हलफनामे में आपराधिक मामलों (Criminal Cases) की जानकारी छिपाई थी।

इतना ही नहीं, हाईकोर्ट ने भाजपा नेता रामनिवास रावत को इस सीट पर विजेता घोषित कर दिया था।

इस फैसले के खिलाफ मुकेश मल्होत्रा ने वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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सुप्रीम कोर्ट का फैसला और दो बड़ी शर्तें

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे (रोक) लगा दिया।

इसका सीधा मतलब यह है कि मुकेश मल्होत्रा फिलहाल विधायक बने रहेंगे। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें यह राहत कुछ सख्त शर्तों के साथ दी है:

  1. वोटिंग का अधिकार नहीं: मुकेश मल्होत्रा विधायक तो रहेंगे, लेकिन वे आगामी राज्यसभा चुनाव में मतदान नहीं कर सकेंगे। यह उनके लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
  2. वेतन और भत्तों पर रोक: जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक उन्हें विधायक के रूप में मिलने वाली सैलरी और अन्य सरकारी भत्ते नहीं मिलेंगे।

विधायक निधि पर संशय

कोर्ट के आदेश के बाद मुकेश मल्होत्रा ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि वे इस फैसले से संतुष्ट हैं और इसे जनता की जीत मानते हैं।

हालांकि, उन्होंने यह भी चिंता जताई कि उन्हें विधायक निधि (MLA Fund) नहीं मिलेगी, जिससे क्षेत्र के विकास कार्यों में बाधा आ सकती है।

मल्होत्रा का कहना है कि वे बिना वेतन के भी जनता की लड़ाई लड़ते रहेंगे और विधानसभा में क्षेत्र की समस्याओं को उठाते रहेंगे।

विजयपुर का सियासी समीकरण: दल-बदल की कहानी

विजयपुर की यह जंग सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि दो बड़े चेहरों की प्रतिष्ठा की लड़ाई भी है।

मुकेश मल्होत्रा और रामनिवास रावत, दोनों ने ही हाल के दिनों में अपनी राजनीतिक राहें बदली हैं:

  • मुकेश मल्होत्रा: पहले भाजपा में थे और सहरिया विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा) रहे। 2023 में निर्दलीय चुनाव लड़कर 45 हजार वोट हासिल किए और फिर प्रियंका गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल हो गए।
  • रामनिवास रावत: कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे, लेकिन बाद में भाजपा का दामन थाम लिया।
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विजयपुर क्षेत्र में सहरिया आदिवासी समुदाय के लगभग 70 हजार से अधिक मतदाता हैं।

यही कारण है कि दोनों ही दल इस सीट को अपनी साख का सवाल बनाए हुए हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया: जीतू पटवारी का हमला

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है।

उन्होंने इसे ‘सत्य और संविधान की जीत’ करार दिया।

पटवारी ने कहा कि भाजपा के सियासी षड्यंत्र एक बार फिर नाकाम हुए हैं और यह फैसला लोकतंत्र का अपमान करने वालों के लिए एक कानूनी सबक है।

अब आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को तय की है।

तब तक मुकेश मल्होत्रा ‘बिना वेतन के विधायक’ बने रहेंगे।

23 जुलाई को होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि क्या मल्होत्रा अपनी विधायकी पूरी कर पाएंगे या फिर विजयपुर में कोई नया सियासी मोड़ आएगा।

फिलहाल, गेंद कानून के पाले में है और विजयपुर की जनता अपने प्रतिनिधि के भविष्य का इंतजार कर रही है।

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