Narottam Mishra-IAS Santosh Verma: ब्राह्मण बेटियों पर आईएएस अधिकारी संतोष कुमार वर्मा के विवादित बयान ने मध्य प्रदेश की राजनीति में खलबली मचा दी है।
इसी बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कथा मंच से इस मामले में एक और विवादित बयान दे दिया है।
मिश्रा ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आईएएस अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई तो “सनातन समाज ही उसका फैसला करेगा।”
नरोत्तम मिश्रा : “सनातन समाज करेगा फैसला”
भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा ने शिवपुरी में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भागवत कथा कार्यक्रम के मंच से संतोष वर्मा पर निशाना साधा और राज्य सरकार पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया।
मिश्रा ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर सरकार ऐसे अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई नहीं करती, तो सनातन समाज फैसला करेगा।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि बेटियों के खिलाफ की गई ऐसी टिप्पणियाँ किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
“IAS संतोष वर्मा पर कार्रवाई नहीं हुई तो सनातन खुद देगा जवाब”
◆ मध्य प्रदेश के शिवपुरी में बीजेपी नेता नरोत्तम मिश्रा ने कहा
◆ संतोष वर्मा ने कहा था, “जब तक एक ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं कर देता या मेरे बेटे के साथ संबंध स्थापित नहीं कर लेता, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए”… pic.twitter.com/Ord7Yv7wEk
— News24 (@news24tvchannel) November 29, 2025
“कुत्ते को शहद हजम नहीं होता”: मिश्रा का दमदार उदाहरण
अपनी बात को और पुख्ता करने के लिए नरोत्तम मिश्रा ने एक दमदार उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा:
“आयुर्वेद में शहद को अमृत माना जाता है, लेकिन अगर कुत्ता उसे चाट ले तो उसकी मौत हो जाती है। गाय का घी अमृत है, लेकिन मक्खी उसे चाट ले तो मर जाती है। नीम की निबोली गुणकारी है, लेकिन कौवा खा ले तो मर जाता है। मिश्री मीठी होती है, लेकिन गधा खा ले तो बचता नहीं।”
इसके बाद उन्होंने अपनी बात का सार बताते हुए कहा, “ये सारी चीजें अमृत हैं, लेकिन कुत्ते, मक्खी, कौवे और गधे को हजम नहीं होतीं। ठीक उसी तरह सनातन भी अमृत है, लेकिन ऐसे अधिकारियों (संतोष वर्मा) को यह अमृत हजम नहीं होता।”
उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया है और अब ये तेजी से वायरल हो रहा है।

सरकार की कार्रवाई और वर्मा की माफी
विवाद बढ़ने के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने गंभीरता दिखाते हुए संतोष वर्मा के खिलाफ कदम उठाए थे।
प्रशासन ने उन्हें एक ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया है।
इस नोटिस में कहा गया है कि उनका बयान सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है और सामाजिक सौहार्द को भी नुकसान पहुंचाता है।
वर्मा को 7 दिनों के भीतर अपना जवाब देना है, नहीं तो उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
Bhopal, Madhya Pradesh | IAS officer Santosh Verma has been issued a show-cause notice, requiring a response within seven days.
The Personnel Department issued the notice for his caste-based ‘roti-beti’ remark pic.twitter.com/75rlcoYf22
— ANI (@ANI) November 27, 2025
दबाव में आकर संतोष वर्मा ने ब्राह्मण समाज से माफी भी मांगी है।
लेकिन, उनकी माफी से समाज का गुस्सा शांत नहीं हुआ है और विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
कोर्ट तक पहुंचा मामला
इस मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है।
इंदौर की एक जिला अदालत में एक वकील ने संतोष वर्मा के खिलाफ परिवाद (Complaint) दायर किया है।
शिकायत में भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 295-क (धार्मिक भावनाओं को आहत करना), 298 (जानबूझकर धार्मिक भावनाएं आहत करना) और 500 (मानहानि) के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है।
अदालत ने इस मामले में 4 दिसंबर को बयान दर्ज करने की तारीख तय की है।

क्या कहा था आईएएस संतोष वर्मा ने
यह पूरा मामला आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के एक सार्वजनिक भाषण से शुरू हुआ था।
वर्मा को हाल ही में ‘अजाक्स’ (Ajjaks) संगठन का प्रांतीय अध्यक्ष चुना गया था।
इस पद पर नियुक्ति के दौरान दिए गए अपने भाषण में उन्होंने आरक्षण और सामाजिक समानता पर चर्चा करते हुए एक ऐसा उदाहरण दिया जिसने ब्राह्मण समाज में खलबली मचा दी।
उनका कहना था, “जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देता या उससे संबंध नहीं बनाता, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि समाज में आरक्षण तब तक बना रहेगा, जब तक “रोटी-बेटी” का समान व्यवहार नहीं हो जाता।
इसके बाद से ही प्रदेश भर के ब्राह्मण समुदाय में इन टिप्पणियों के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा।


