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नीलकंठ सुर सरगम संगीत ग्रुप की रतलाम में ऐतिहासिक और यादगार शाम

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Neelkanth Sur Sargam Ratlam- भोपाल से आए प्रतिष्ठित सांस्कृतिक दल नीलकंठ सुर सरगम संगीत ग्रुप ने गुलाब चक्कर परिसर में अपनी भव्य प्रस्तुति से रतलाम के संगीत इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया।

ठंडी शाम के बीच जब मंच से सुरों की पहली लहर उठी तो पूरा क्षेत्र मानो किसी बड़े म्यूज़िक फेस्टिवल में बदल गया।

यह कार्यक्रम ग्रुप का भोपाल से बाहर आयोजित पहला बड़ा शो था, जिसे देखने के लिए शहर के हर कोने से श्रोता उमड़ पड़े।

वंदना मैडम की आवाज ने बांधा समां

कार्यक्रम की मुख्य आयोजक, प्रमुख गायिका और ग्रुप की आत्मा वंदना मैडम रहीं।

उनकी मधुर, ठहरी हुई और भावपूर्ण आवाज़ ने श्रोताओं को देर तक कुर्सियों से बांधे रखा।

उन्होंने अलका याग्निक, लता मंगेशकर, आशा भोंसले से लेकर आधुनिक फिल्मी और सूफ़ियाना गीतों तक का ऐसा संगम प्रस्तुत किया कि हर पीढ़ी के श्रोता खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते रहे।

“लग जा गले”, “मेरे हाथ में तेरा हाथ हो” और “दिल है छोटा सा” जैसे गीतों पर पूरा गुलाब चक्कर एक स्वर में गुनगुनाता दिखाई दिया।

सहयोग की मिसाल बने देव सर और इद्रीस सर

आयोजन की सफलता में सह आयोजक सिंगर देव सर और इद्रीस सर का योगदान विशेष रूप से सराहा गया।

दोनों ने महीनों पहले से रतलाम की स्थानीय टीम के साथ समन्वय बनाया, कलाकारों के चयन, रिहर्सल, साउंड चेक और मंच संचालन में पूरी ज़िम्मेदारी निभाई।

देव सर ने स्वयं भी कई गीत प्रस्तुत किए, जबकि इद्रीस सर ने तकनीकी प्रबंधन संभालते हुए कार्यक्रम को पेशेवर रूप दिया।

स्थानीय नागरिकों का कहना था कि ऐसा टीमवर्क बड़े संस्थानों में भी कम देखने को मिलता है।

आठ घंटे चला सुरों का महायज्ञ

लगातार लगभग 8 घंटे चले इस संगीतमय महोत्सव में 25 से अधिक गायकों ने अपनी प्रस्तुति दी।

उच्च गुणवत्ता वाले कराओके ट्रैक, प्रोफेशनल साउंड सिस्टम, आकर्षक लाइटिंग और अनुशासित मंच व्यवस्था ने इसे महानगर-स्तर का कार्यक्रम बना दिया।

पेशेवर वीडियोग्राफी भी कराई गई ताकि यह शाम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी जीवित रहे।

श्रोताओं में महिलाएं, बच्चे, बुज़ुर्ग, व्यापारी, विद्यार्थी और प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हुए।

कई परिवार पहली बार किसी खुले परिसर में इतने व्यवस्थित म्यूज़िक शो के साक्षी बने।

स्थानीय प्रतिभाओं को मिला मंच

नीलकंठ ग्रुप ने रतलाम के उभरते कलाकारों को भी अवसर दिया।

भोपाल से आए मेंटर्स ने उन्हें गायकी की बारीकियां समझाईं।

वंदना मैडम ने कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ कार्यक्रम करना नहीं, बल्कि नए शहरों में संगीत की अलख जगाना है।”

दर्शकों की प्रतिक्रियाएं

कार्यक्रम सुनने पहुंचे वरिष्ठ नागरिक श्री रमेश सोनी ने कहा—“ऐसा लगा जैसे किसी टीवी रियलिटी शो में बैठे हों।”

छात्रा भूमिका जैन का कहना था—“वंदना मैम का कॉन्फिडेंस देखकर हमें भी प्रेरणा मिली।”

सम्मान और आभार

समापन अवसर पर सभी कलाकारों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए।

वंदना मैडम ने नगर निगम, स्थानीय व्यापारियों और विशेष रूप से देव सर व इद्रीस सर का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने घोषणा की कि ग्रुप बहुत जल्द ग्वालियर में अपनी अगली पेशकश करेगा और रतलाम में भी दोबारा कार्यक्रम करने की योजना है।

संगीत से जुड़ा रतलाम

गुलाब चक्कर जैसे सार्वजनिक स्थल पर हुआ यह कार्यक्रम बताता है कि रतलाम में सांस्कृतिक आयोजनों की अपार संभावनाएं हैं।

नागरिकों ने प्रशासन से मांग की कि ऐसे कार्यक्रमों के लिए Manas Bhavan और अन्य ऑडिटोरियम को रियायती दरों पर उपलब्ध कराया जाए।

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