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भोपाल में सुरक्षित है नीम करोली बाबा की अनमोल निशानी: 53 सालों से हो रही है गुप्त पूजा, अब बनेगा भव्य मंदिर

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Neem Karoli Baba Asthi Kalash Bhopal: पूरी दुनिया जिन्हें ‘चमत्कारी बाबा’ के नाम से जानती है और जिनके दर पर स्टीव जॉब्स से लेकर मार्क जुकरबर्ग तक सिर झुकाते हैं, उन नीम करोली बाबा का एक बेहद खास और दुर्लभ रिश्ता मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से भी है।

अक्सर लोग बाबा के दर्शन के लिए उत्तराखंड के कैंची धाम या वृंदावन जाते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि भोपाल में बाबा की एक ऐसी निशानी मौजूद है, जो पूरे देश में और कहीं नहीं है।

53 साल पुराना रहस्य: भोपाल में सुरक्षित है बाबा का अस्थि कलश

नीम करोली बाबा ने साल 1973 में वृंदावन में अपना शरीर त्यागा था।

उस समय नियम और श्रद्धा के अनुसार उनकी अस्थियों को देश की 11 पवित्र नदियों में विसर्जित कर दिया गया था।

लेकिन, इस दौरान एक ऐसी घटना हुई जो आज भोपाल के लिए आध्यात्मिक गौरव का विषय बन गई है।

बाबा के बड़े बेटे अनेग सिंह, अपने पिता की अस्थियों का एक पवित्र हिस्सा (अस्थि कलश) सहेजकर अपने साथ भोपाल ले आए थे।

पिछले 53 सालों से यह कलश उनके परिवार के पास पूरी श्रद्धा और गोपनीयता के साथ सुरक्षित रखा हुआ है।

बाबा के पोते, डॉ. धनंजय शर्मा बताते हैं कि यह उनके परिवार की सबसे बड़ी पूँजी है।

परिवार इस कलश को केवल अस्थियां नहीं, बल्कि साक्षात बाबा की उपस्थिति मानता है।

जब 10 दिन भोपाल की गलियों में पैदल घूमे थे बाबा

बाबा नीम करोली का भोपाल से रिश्ता केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्हें इस शहर से एक खास लगाव था।

साल 1970 की बात है, जब बाबा भोपाल आए और अरेरा कॉलोनी स्थित अपने बेटे के घर पर 10 दिनों तक रुके थे।

इन 10 दिनों की यादें आज भी परिवार के मानस पटल पर ताजा हैं।

बताया जाता है कि बाबा को भोपाल की शांति और यहाँ का वातावरण बहुत पसंद था।

वे अक्सर शहर के विभिन्न इलाकों में पैदल भ्रमण पर निकल जाते थे।

एक रात तो उन्होंने शहर के प्रसिद्ध ‘नेवरी मंदिर’ में भी बिताई थी।

भोपाल प्रवास के दौरान ही उन्होंने अपने परिवार को हनुमान जी की एक विशेष प्रतिमा भेंट की थी, जिसकी पूजा आज भी नियमपूर्वक की जाती है।

अब भोपाल में बनेगा ‘मिनी कैंची धाम’: भक्तों को मिलेंगे दर्शन

अभी तक यह पवित्र अस्थि कलश परिवार के निजी मंदिर में था और आम लोगों को इसकी जानकारी कम ही थी।

लेकिन अब बाबा के भक्तों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है।

डॉ. धनंजय शर्मा और उनका परिवार अब भोपाल में बाबा का एक भव्य मंदिर और आश्रम बनाने की तैयारी कर रहा है।

इस प्रस्तावित मंदिर की सबसे खास बात यह होगी कि इसी 53 साल पुराने पवित्र अस्थि कलश को वहां पूरे विधि-विधान के साथ स्थापित किया जाएगा।

परिवार का दावा है कि ऐसा दूसरा अस्थि कलश पूरे भारत में और कहीं नहीं है।

इस मंदिर के बनने के बाद भोपाल के भक्तों को बाबा की उस दिव्य ऊर्जा को महसूस करने का मौका मिलेगा, जिसके लिए लोग हजारों किलोमीटर दूर उत्तराखंड जाते हैं।

कौन थे नीम करोली बाबा?

नीम करोली बाबा 20वीं सदी के उन महान संतों में से एक थे, जिन्होंने लाखों लोगों का जीवन बदल दिया।

उन्हें भगवान हनुमान का अवतार माना जाता है।

उनके उपदेश बहुत सरल थे— “सबकी सेवा करो, सबसे प्रेम करो और भगवान को याद करो।”

उनके दरबार में अमीर-गरीब का भेद नहीं था। आज भी कैंची धाम में हर साल लाखों की भीड़ उमड़ती है, जो इस बात का प्रमाण है कि बाबा का आशीर्वाद आज भी उनके भक्तों के साथ है।

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