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लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस पेश, 118 सांसदों ने किए हस्ताक्षर

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

No-Confidence Motion: संसद का बजट सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया है।

इसी बीच विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) का नोटिस पेश कर दिया है।

मंगलवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने ‘वी वॉन्ट जस्टिस’ के नारे लगाए, जिसके कारण सदन को बार-बार स्थगित करना पड़ा।

आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला…

118 सांसदों के दस्तखत

कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के अनुसार, दोपहर करीब 1:14 बजे यह नोटिस पेश किया गया, जिस पर 118 सांसदों के दस्तखत हैं।

विपक्ष का आरोप है कि सदन में उनकी आवाज को दबाया जा रहा है और उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त समय नहीं मिल रहा है।

क्या है अविश्वास प्रस्ताव? (What is No-confidence motion)

नियमों के मुताबिक, लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए कम से कम 14 से 20 दिन पहले नोटिस देना होता है।

विपक्ष ने इसकी तैयारी अभी से शुरू कर दी है ताकि बजट सत्र के अगले चरण में इसे पेश किया जा सके।

विपक्ष का कहना है कि उनके पास अब कोई और रास्ता नहीं बचा है क्योंकि उनकी आवाज को दबाया जा रहा है।

लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया

  • प्रस्ताव पेश करने के लिए 50 लोकसभा सदस्यों का समर्थन जरूरी
  • 14 दिन पहले स्पीकर को लिखित नोटिस देना होता है
  • स्पीकर पर लगे आरोप स्पष्ट और ठोस होने चाहिए
  • प्रस्ताव स्वीकार होने पर सदन में चर्चा और वोटिंग होती है
  • प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान स्पीकर सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते
  • पास होने के लिए लोकसभा में मौजूद सदस्यों का बहुमत चाहिए
  • प्रस्ताव पास हुआ तो लोकसभा अध्यक्ष को पद छोड़ना पड़ता है
  • अब तक 1954, 1966 और 1985 में प्रस्ताव लाया जा चुका है। तीनों बार खारिज 

सदन की कार्यवाही ठप

मंगलवार को बजट सत्र का 10वां दिन था, लेकिन प्रश्नकाल से ही हंगामा शुरू हो गया।

चेयर पर मौजूद पीसी मोहन ने जब सदन शुरू किया, तो विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी।

हालात को देखते हुए सदन पहले 12 बजे तक और फिर 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा।

संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी सांसदों से हाथ जोड़कर अपील की कि वे बजट पर चर्चा होने दें, क्योंकि हंगामे से जनता का नुकसान हो रहा है।

‘बुक कॉन्ट्रोवर्सी’ पर राहुल गांधी का बयान

सदन के बाहर भी राजनीति गर्माई रही। राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब से जुड़े विवाद पर टिप्पणी की। उ

न्होंने कहा कि या तो नरवणे सच बोल रहे हैं या फिर ‘पेंगुइन’ (पब्लिशर)।

राहुल का कहना था कि उन्हें भरोसा है कि एक पूर्व आर्मी चीफ झूठ नहीं बोलेंगे।

पूरी खबर यहां पढ़ें-

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