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ओडिशा के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में आग लगने से 10 मरीजों की मौत, 25-25 लाख के मुआवजे का ऐलान

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Odisha Cuttack Hospital Fire: ओडिशा के कटक स्थित राज्य के सबसे प्रतिष्ठित श्रीराम चंद्र भांजा (SCB) मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सोमवार की सुबह किसी बुरे सपने जैसे साबित हुई।

रात के करीब 3 बजे, जब पूरा अस्पताल गहरी नींद में था।

तभी अस्पताल की पहली मंजिल पर स्थित ट्रॉमा केयर के ICU वार्ड से धुएं का गुबार उठने लगा।

देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया।

उस वक्त वार्ड में 23 मरीज भर्ती थे, जो अपनी गंभीर बीमारियों से लड़ रहे थे, उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि मौत उनके कितने करीब है।

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10 मरीजों की मौत, 11 कर्मचारी झुलसे

इस दर्दनाक हादसे में अब तक 10 मरीजों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के अनुसार, 7 मरीजों ने वार्ड के भीतर ही दम तोड़ दिया था, जबकि 3 अन्य मरीजों की मौत रेस्क्यू के बाद इलाज के दौरान हुई।

आग इतनी तेजी से फैली कि वहां मौजूद मशीनों, बेड के गद्दों और सैनिटाइजर ने इसे और भड़का दिया।

मरीजों को बचाने की कोशिश में अस्पताल के 11 कर्मचारी भी झुलस गए हैं, जिनमें से 2 की हालत गंभीर बताई जा रही है।

दमकल की 3 गाड़ियों और अस्पताल के निजी फायर स्टाफ ने कड़ी मशक्कत के बाद खिड़कियां तोड़कर मरीजों को बाहर निकाला।

शुरुआती जांच: शॉर्ट सर्किट और सिस्टम की नाकामी

शुरुआती जांच के अनुसार, आग लगने की मुख्य वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है।

माना जा रहा है कि पुराने बिजली के तारों पर एयर कंडीशनिंग (AC) या किसी भारी मेडिकल उपकरण का लोड बढ़ने से स्पार्किंग हुई।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि हादसे के वक्त अस्पताल का ‘फायर अलार्म सिस्टम’ समय पर नहीं बजा।

जब तक स्टाफ को खतरे का अहसास हुआ, तब तक धुआं पूरे वार्ड में भर चुका था।

ऑक्सीजन की मौजूदगी ने आग को ‘ईंधन’ देने का काम किया, जिससे विजिबिलिटी (दृश्यता) जीरो हो गई और बचाव कार्य में देरी हुई।

25-25 लाख का मुआवजा, जांच के आदेश

हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी खुद अस्पताल पहुंचे और घायलों का हाल जाना।

उन्होंने इस घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए मृतकों के परिजनों के लिए 25-25 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है।

साथ ही, घटना की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं ताकि यह साफ हो सके कि क्या अस्पताल प्रशासन ने फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी की थी।

सुरक्षा पर बड़े सवाल

SCB मेडिकल कॉलेज न केवल कटक बल्कि पूरे ओडिशा का लाइफलाइन माना जाता है।

ऐसे में वहां सुरक्षा प्रणालियों का फेल होना गंभीर चिंता का विषय है।

क्या फायर ऑडिट समय पर हुआ था? क्या बिजली की वायरिंग की जांच नियमित रूप से की जा रही थी?

इन सवालों के जवाब अब जांच कमेटी तलाशेगी।

फिलहाल, बचे हुए मरीजों को न्यू मेडिसिन ICU में शिफ्ट कर दिया गया है और डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी निगरानी कर रही है।

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