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लोकतंत्र में पहली बार! मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की तैयारी, नोटिस में 193 सांसदों के हस्ताक्षर

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

CEC Impeachment: भारतीय राजनीति में पहली बार कुछ ऐसा हुआ है जो पहले कभी नहीं देखा गया।

विपक्षी दलों के गठबंधन (INDIA Alliance) ने वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए संसद के दोनों सदनों में महाभियोग (Impeachment) का नोटिस दे दिया है।

इस कदम ने देश की चुनावी निष्पक्षता पर एक बड़ी बहस को शुरू कर दी है।

आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला…

क्या है पूरा मामला?

विपक्षी दलों, विशेषकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अगुवाई में, मुख्य चुनाव आयुक्त पर पद के दुरुपयोग और अक्षमता के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

टीएमसी द्वारा तैयार किए गए 10 पन्नों के नोटिस में ज्ञानेश कुमार पर सात आरोप मढ़े गए हैं।

इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और एनसीपी (शरद पवार गुट) जैसे बड़े दलों का समर्थन शामिल है।

विपक्ष का पलड़ा भारी

किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को हटाने के लिए कड़े नियमों का पालन करना पड़ता है। नियमों के अनुसार:

  • लोकसभा में नोटिस के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर चाहिए, विपक्ष ने 130 सांसदों के साइन कराए हैं।

  • राज्यसभा में 50 सांसदों की जरूरत होती है, यहां 63 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।

विपक्ष ने तकनीकी गलतियों से बचने के लिए दो अलग-अलग सेटों में नोटिस तैयार किया है ताकि इसे किसी भी आधार पर खारिज न किया जा सके।

प्रक्रिया: कैसे हटते हैं मुख्य चुनाव आयुक्त?

CEC को हटाना आसान नहीं है। इनकी हटाने की प्रक्रिया ठीक वैसी ही होती है जैसी सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जज की।

  1. सबसे पहले संसद के सचिवालय नोटिस की जांच करेंगे।

  2. अगर नोटिस स्वीकार होता है, तो आरोपों की जांच के लिए एक कमेटी बन सकती है।

  3. अंत में, सदन में ‘विशेष बहुमत’ (कुल सदस्यों का बहुमत और उपस्थित सदस्यों का दो-तिहाई वोट) से प्रस्ताव पास होना जरूरी है।

विपक्ष का बड़ा आरोप

विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली निष्पक्ष नहीं रही है।

शनिवार को यह नोटिस आधिकारिक तौर पर पीठासीन अधिकारियों को सौंपा जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही सरकार के पास बहुमत हो, लेकिन इस नोटिस ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और भविष्य की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

अब सबकी निगाहें संसद की अगली कार्यवाही पर टिकी हैं।

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