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“ईरान से इतनी मोहब्बत है तो वहीं चले जाओ”: पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर के बयान से शिया समुदाय में गुस्सा

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Asim Munir vs Shia Maulvi: पड़ोसी देश पाकिस्तान इन दिनों आर्थिक बदहाली के साथ-साथ गहरे धार्मिक तनाव से भी जूझ रहा है।

ताज़ा विवाद पाकिस्तान के ताकतवर आर्मी चीफ (चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज) फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और देश के शिया धर्मगुरुओं के बीच हुआ है।

रावलपिंडी स्थित सेना के मुख्यालय (GHQ) में हुई एक बैठक के दौरान जनरल मुनीर ने शिया मौलवियों को कथित तौर पर अपमानित किया और उन्हें देश छोड़कर ईरान चले जाने तक की हिदायत दे डाली।

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Asim Munir vs Shia Maulvi (AI IMAGE)

इस घटना के सामने आने के बाद पूरे पाकिस्तान में शिया समुदाय के बीच गुस्सा भड़क गया है।

क्या हुआ था GHQ की बैठक में?

जानकारी के मुताबिक, यह घटना गुरुवार, 19 मार्च 2026 की है।

जनरल आसिम मुनीर ने देश के बिगड़ते हालात और मध्य-पूर्व (Middle East) में चल रहे युद्ध के मद्देनजर करीब एक दर्जन से ज्यादा प्रमुख शिया धर्मगुरुओं को इफ्तार और चर्चा के लिए बुलाया था।

लेकिन यह ‘चर्चा’ जल्द ही ‘धमकी’ में बदल गई।

बैठक में मौजूद रहे प्रसिद्ध शिया धर्मगुरु अल्लामा आगा शिफा नजफी ने शुक्रवार को इस्लामाबाद में इस मुलाकात का काला चिट्ठा खोल दिया।

उन्होंने बताया कि जनरल मुनीर का लहजा बेहद सख्त और अपमानजनक था।

मुनीर इस बात से नाराज थे कि अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान के गिलगिट-बाल्टिस्तान और इस्लामाबाद में शिया समुदाय ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए थे।

इन प्रदर्शनों के दौरान सेना की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया था, जिसे मुनीर ने अपनी और फौज की तौहीन माना।

‘ईरान चले जाओ’ – मुनीर का विवादित बयान

बैठक के दौरान जब शिया धर्मगुरुओं ने अपनी बात रखनी चाही, तो आसिम मुनीर ने उन्हें बीच में ही टोकते हुए कहा, “अगर आपको ईरान से इतनी ही मोहब्बत है, तो आप ईरान चले जाओ।”

उन्होंने यहां तक कह दिया कि पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना भी शिया थे, लेकिन उनका वफादारी का पैमाना अलग था।

मुनीर का सीधा संकेत था कि पाकिस्तानी शियाओं की वफादारी पाकिस्तान के बजाय ईरान के प्रति ज्यादा है।

शिया समुदाय का पलटवार 

अल्लामा आगा शिफा नजफी ने मुनीर को याद दिलाया कि पाकिस्तानी फौज में कई शिया अफसर अपनी जान दे रहे हैं।

उन्होंने अपने मामा अमीर हयात का उदाहरण दिया जिन्हें ‘सितारा-ए-जुर्रत’ मिला था।

नजफी ने भावुक होते हुए सवाल उठाया कि—

“जब कट्टरपंथी संगठनों ने फौजियों के सिर काटकर उनसे फुटबॉल खेला, तब उन्हें किसी ने नहीं कहा कि अफगानिस्तान चले जाओ। लेकिन आज हमसे कहा जा रहा है कि ईरान चले जाओ, जबकि हमने कभी किसी सैनिक की जान नहीं ली।”

सऊदी अरब और ईरान का एंगल

इस विवाद की एक बड़ी वजह सऊदी अरब और ईरान के बीच बढ़ता तनाव भी है।

बैठक में मुनीर ने साफ किया कि पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता है।

उन्होंने खुलासा किया कि अगर ईरान ने सऊदी पर हमला जारी रखा, तो पाकिस्तान अपनी फौज सऊदी की रक्षा के लिए मैदान में उतार देगा।

मुनीर की यह बात शिया समुदाय को रास नहीं आई, क्योंकि वे ईरान को अपना आध्यात्मिक केंद्र मानते हैं।

जिया-उल-हक के काले दौर की यादें

पाकिस्तान के अन्य शिया मौलवी, जैसे सैयद जवाद नकवी ने इस स्थिति की तुलना 1980 के दशक के जनरल जिया-उल-हक के शासन से की है।

उस दौर में शियाओं पर काफी जुल्म हुए थे और सुन्नी कट्टरपंथ को बढ़ावा दिया गया था।

शिया समुदाय को डर है कि आसिम मुनीर एक बार फिर उसी ‘खास सोच’ को पूरे देश पर थोपना चाहते हैं और देशभक्ति के नाम पर अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं।

खतरे में अल्पसंख्यक: आंकड़े डराने वाले हैं

पाकिस्तान में शिया आबादी कुल जनसंख्या का करीब 10-15% है। हाल के दिनों में उन पर हमलों की संख्या बढ़ी है।

हाल ही में इस्लामाबाद की एक शिया मस्जिद पर हुए आत्मघाती हमले में 36 लोगों की मौत हो गई थी।

हजारा और अहमदिया समुदाय की तरह अब शिया समुदाय भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।

सरकार और फौज उन्हें सुरक्षा देने के बजाय उन पर ही शक कर रही है।

आसिम मुनीर के इस बयान ने पाकिस्तान के भीतर एक ऐसी चिंगारी सुलगा दी है जो आने वाले समय में बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है।

एक तरफ पाकिस्तान की सीमाएं अस्थिर हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के भीतर धार्मिक दरार को सेना प्रमुख का यह बयान और बढ़ा रहा है।

अगर समय रहते इसे नहीं संभाला गया, तो पाकिस्तान एक नए गृहयुद्ध की ओर बढ़ सकता है।

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