US Pakistan Relations: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में संसद में अपनी ही सरकारों और पिछले तानाशाहों के फैसलों पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने बहुत ही कड़वे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान को सिर्फ अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया।
आसिफ के मुताबिक, जब अमेरिका का काम निकल गया, तो उसने पाकिस्तान को एक “टॉयलेट पेपर” की तरह फेंक दिया।
🚨 Pakistan’s Defence Minister Khawaja Asif says America “USED & THREW us like TOILET paper,” admits “we didn’t learn.” 🔥
👉 Bhikaristan should have known its limits 😄 pic.twitter.com/2GKh7ovKJL
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) February 11, 2026
तानाशाहों की गलतियां और दो जंग
ख्वाजा आसिफ ने ऐतिहासिक गलतियों को गिनाते हुए कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में दो बड़ी जंगें लड़ीं।
पहली 1979 में सोवियत संघ के खिलाफ और दूसरी 2001 में 9/11 हमलों के बाद।
उन्होंने साफ कहा कि ये पाकिस्तान की अपनी लड़ाई नहीं थी, बल्कि दो सैन्य तानाशाहों जनरल जिया-उल-हक और जनरल परवेज मुशर्रफ ने अपनी सत्ता बचाने और वैश्विक शक्तियों (खासकर अमेरिका) का समर्थन पाने के लिए पाकिस्तान को इस आग में झोंक दिया।


आसिफ ने यह भी स्वीकार किया कि इन युद्धों को सही ठहराने के लिए पाकिस्तान के ‘एजुकेशन सिस्टम’ (शिक्षा प्रणाली) तक में बदलाव किए गए ताकि लोगों के मन में इस जंग के प्रति समर्थन पैदा किया जा सके।
उन्होंने कहा कि हम आज भी उन गलत नरेटिव्स का खामियाजा भुगत रहे हैं।
आतंकवाद का सच और आज के हालात
रक्षा मंत्री ने बड़ी बेबाकी से माना कि पाकिस्तान में आज जो आतंकवाद है, वह उन्हीं पुरानी गलतियों का नतीजा है।
उन्होंने कहा कि हमने ‘मजहब’ और ‘इस्लाम’ के नाम पर दूसरों की लड़ाई लड़ी, लेकिन असल में वह सिर्फ सत्ता का खेल था।

पाकिस्तान ने इतिहास से कोई सबक नहीं सीखा और कभी रूस, कभी ब्रिटेन तो कभी अमेरिका के पीछे भागता रहा।
नतीजा यह हुआ कि आज इन देशों का पाकिस्तान पर प्रभाव पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है।
क्लिंटन का दौरा और भारत-अमेरिका संबंध
आसिफ ने साल 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के पाकिस्तान दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि वे भारत की लंबी यात्रा के बाद महज कुछ घंटों के लिए पाकिस्तान आए थे।
यह इस बात का सबूत था कि अमेरिका के लिए पाकिस्तान की अहमियत सिर्फ जरूरत तक रह गई थी।

पाकिस्तान से रिश्ते भारत की कीमत पर नहीं
दूसरी ओर, वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका, पाकिस्तान से रिश्ते चाहता है लेकिन भारत की कीमत पर नहीं।
रुबियो ने भारत की कूटनीति की तारीफ करते हुए कहा कि भारत समझता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिश्तों का संतुलन कैसे बनाया जाता है।
ख्वाजा आसिफ का यह बयान पाकिस्तान के भीतर एक बड़ी राजनीतिक हलचल की ओर इशारा करता है।
यह पहली बार है जब इतने बड़े पद पर बैठे व्यक्ति ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि पाकिस्तान की विदेश नीति “इस्तेमाल करो और फेंको” (Use and Throw) का शिकार रही है और देश का एजुकेशन सिस्टम प्रोपेगेंडा का हिस्सा बना।


