Pm Rashtriya bal puraskar 2025: देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज, 26 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 प्रदान किए।
यह समारोह वीर बाल दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया, जो सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह के चार साहिबजादों (पुत्रों) की शहादत की याद में मनाया जाता है।
देशभर के 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चुने गए कुल 20 बच्चों को छह विभिन्न श्रेणियों में उनकी असाधारण वीरता, प्रतिभा और सेवा के लिए यह प्रतिष्ठित पुरस्कार दिया गया।
इनमें से दो बच्चों को मरणोपरांत सम्मानित किया गया, जिन्होंने दूसरों की जान बचाते हुए अपनी शहादत दी।

शहादत और वीरता की अनूठी मिसाल: मरणोपरांत सम्मानित हुए दो बच्चे
इस वर्ष के बाल पुरस्कारों की सबसे दिल छू लेने वाली कहानियाँ उन दो युवा हीरोज़ की हैं, जिन्हें मरणोपरांत सम्मानित किया गया।
तमिलनाडु की 8 वर्षीय ब्योमा: चेन्नई की रहने वाली ब्योमा ने जून 2024 में एक दुखद घटना में अपनी जान गंवा दी।
उसने एक पानी के पंप के पास फंस गए 6 साल के एक बच्चे को बिजली के करंट से बचाने की कोशिश की।
बच्चे को धक्का देकर सुरक्षित करने में वह सफल रही, लेकिन खुद करंट की चपेट में आ गई और उसकी मौत हो गई।
उसकी माँ, अर्चना शिवरामकृष्णन ने राष्ट्रपति से उनका वीरता पुरस्कार ग्रहण किया।
बिहार के कैमूर जिले के कमलेश: 14 वर्षीय कमलेश ने मई 2024 में दुर्गावती नदी में डूब रहे एक बच्चे को बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की।
उसने बच्चे को तो बाहर निकाल दिया, लेकिन खुद नदी की तेज धारा में बह गया और डूब गया।
उसके पिता, दुखी शाह ने उनका सम्मान ग्रहण किया।
इन दोनों बच्चों का अदम्य साहस और परोपकार की भावना देश के लिए एक अमर प्रेरणा है।

विभिन्न क्षेत्रों में छाए रहे युवा प्रतिभा के सितारे
वीरता के अलावा, खेल, कला, विज्ञान, पर्यावरण और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी बच्चों ने शानदार उपलब्धियाँ हासिल की हैं, जिन्हें पुरस्कारों से नवाजा गया।
खेल जगत का चमकता सितारा:
वैभव सूर्यवंशी (14 वर्ष, बिहार): इस युवा क्रिकेटर ने पाकिस्तानी दिग्गज जहीर अब्बास के 39 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़कर सुर्खियाँ बटोरीं। अंडर-19 विश्व कप, विजय हजारे ट्रॉफी और यू-19 एशिया कप में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें सम्मानित किया गया।

अनुष्का (14 वर्ष, झारखंड): एक प्रतिभाशाली फुटबॉलर, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।
योगिता मंडावी (14 वर्ष, छत्तीसगढ़): नक्सल प्रभावित इलाके से आने वाली योगिता ने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए जूडो में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।
विज्ञान और पर्यावरण में नवाचार:
पूजा (17 वर्ष, उत्तर प्रदेश): इन्होंने एक ऐसी थ्रेसर मशीन बनाई है जो धूल उत्पन्न नहीं करती, जिससे किसानों का स्वास्थ्य बेहतर होगा और वायु प्रदूषण कम होगा।
अर्णव महर्षि (17 वर्ष, महाराष्ट्र): इन्होंने एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन विकसित किया है, जिसे केंद्र सरकार ने पेटेंट कराया है।
ऐशी प्रिषा बोराह (असम): इन्होंने बेकार कागज से पेंसिल बनाने की मैनुअल मशीन और ग्रे वाटर रिसाइक्लिंग सिस्टम जैसे पर्यावरण अनुकूल आविष्कार किए हैं।

कला और संस्कृति का जलवा:
सुमन सरकार (16 वर्ष, पश्चिम बंगाल): एक प्रतिभाशाली तबला वादक, जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 43 से अधिक पुरस्कार जीते हैं।
एस्तेर लालदुहावमी हनामते (9 वर्ष, मिजोरम): एक लोकप्रिय यूट्यूबर और गायिका, जिनकी मधुर आवाज़ ने देशभर में लाखों लोगों का दिल जीता है। उन्हें गृह मंत्री अमित शाह से भी गिटार का तोहफा मिल चुका है।
वाका लक्ष्मी प्रज्ञिका (7 वर्ष, गुजरात): एक ग्रैंडमास्टर और विश्व चैंपियन शतरंज खिलाड़ी, जिन्होंने FIDE वर्ल्ड स्कूल चेस चैंपियनशिप 2025 में शानदार जीत दर्ज की।
सामाजिक सेवा का जज्बा:
वंश (17 वर्ष, चंडीगढ़): इन्हें समाज सेवा के प्रति उनके समर्पण और जनकल्याण के कार्यों के लिए यह पुरस्कार दिया गया है।
यह भी जानें: वीर बाल दिवस का महत्व
26 दिसंबर का दिन वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।
यह दिन सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों—साहिबजादा अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह—की शहादत को समर्पित है, जिन्होंने धर्म और न्याय की रक्षा के लिए अल्प आयु में ही अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था।

साल 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिन को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
इसी दिन देश के वीर और प्रतिभाशाली बच्चों को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्रदान करने की परंपरा शुरू हुई।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार बच्चों की उपलब्धियों को मान्यता देने और देश के अन्य बच्चों को प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है।

इस वर्ष के पुरस्कार विजेताओं की कहानियाँ साहस, करुणा, दृढ़ संकल्प और नवाचार की अद्भुत मिसाल पेश करती हैं, जो यह साबित करती हैं कि उम्र सफलता और सेवा की राह में कोई बाधा नहीं है।


