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राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस लाएगी सरकार, विवादित भाषण के बाद रिजिजू का ऐलान

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Rahul Gandhi Privilege Motion: संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के देश बेचने वाले बयान ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है।

अब मोदी सरकार ने राहुल गांधी के खिलाफ ‘विशेषाधिकार हनन’ (Privilege Motion) का नोटिस लाने का फैसला किया है।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट कर दिया है कि राहुल गांधी ने सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाई है और बिना किसी सबूत के प्रधानमंत्री और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

विवाद की शुरुआत?

बुधवार को बजट पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोला।

उन्होंने अपने भाषण में कई ऐसी बातें कहीं जिससे सदन का माहौल गरमा गया।

राहुल ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने देश के हितों को बाहरी ताकतों के हाथों ‘बेच’ दिया है।

उन्होंने अडाणी मामले और अमेरिका में चल रही कानूनी कार्यवाही का जिक्र करते हुए कहा कि यह सब प्रधानमंत्री पर दबाव बनाने का तरीका है।

पूरी खबर यहां पढ़़ें-

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किन आरोपों पर आपत्ति है?

किरेन रिजिजू ने मुख्य रूप से तीन बातों पर कड़ा ऐतराज जताया है:

  1. देश को बेचने का आरोप: राहुल गांधी ने कहा कि “आपने भारत माता को बेच दिया है और अब अमेरिका तय करेगा कि हम किससे तेल खरीदेंगे।” इस पर रिजिजू ने कहा कि इस देश को न कोई खरीद सकता है और न बेच सकता है। ऐसे बयान देना सदन को गुमराह करने जैसा है।

  2. एपस्टीन फाइल्स और व्यक्तिगत आरोप: राहुल गांधी ने अनिल अंबानी और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम लेते हुए ‘एपस्टीन फाइल्स’ का जिक्र किया। रिजिजू का कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना (नोटिस) के किसी सदस्य या बाहरी व्यक्ति पर ऐसे आरोप लगाना संसदीय नियमों के खिलाफ है।

  3. डेटा और टैक्स हॉलीडे: राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार ने विदेशी कंपनियों को डेटा पर 20 साल का टैक्स हॉलीडे दे दिया है, जिससे भारत की सुरक्षा और प्राइवेसी खतरे में है।

सदन के नियम क्या कहते हैं?

संसदीय नियमों के मुताबिक, अगर कोई सांसद किसी दूसरे सदस्य या सरकार पर भ्रष्टाचार या गंभीर कदाचार का आरोप लगाता है, तो उसे पहले से स्पीकर को इसकी सूचना देनी होती है और अपने दावों के समर्थन में पुख्ता सबूत पेश करने होते हैं।

किरेन रिजिजू ने कहा, “मैंने राहुल गांधी से सदन में ही सबूत मांगे थे, लेकिन उन्होंने सिर्फ हवा-हवाई बातें कीं। उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया है, इसलिए उनके खिलाफ प्रिविलेज नोटिस लाया जाएगा।”

आगे क्या होगा?

अगर विशेषाधिकार हनन का नोटिस स्वीकार हो जाता है, तो मामला ‘विशेषाधिकार समिति’ के पास जा सकता है।

राहुल गांधी को अपने आरोपों को साबित करने के लिए सबूत देने होंगे।

अगर वे ऐसा नहीं कर पाते, तो उन पर अनुशासनात्मक कार्यवाही हो सकती है या उनके भाषण के विवादित हिस्सों को सदन की कार्यवाही (Records) से स्थायी रूप से हटा दिया जाएगा।

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फिलहाल, राहुल गांधी ने चुनौती स्वीकार करते हुए कहा है कि वे सबूत देने को तैयार हैं।

अब देखना यह है कि संसद की इस लड़ाई में जीत दावों की होती है या नियमों की।

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