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सोनम रघुवंशी को बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की जमानत; 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Sonam Raghuvanshi bail cancelled: इंदौर के चर्चित कपड़ा व्यापारी राजा रघुवंशी मर्डर केस में उनकी पत्नी और मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ा झटका लगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोनम की जमानत रद्द करते हुए उन्हें 3 हफ्ते के भीतर अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया है।

शीर्ष अदालत ने साफ किया है कि निचली अदालत में इस मामले का ट्रायल 6 महीने के भीतर पूरा किया जाए।

अगर 6 महीने में ट्रायल की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है, तब सोनम दोबारा जमानत के लिए याचिका दाखिल कर सकती हैं।

क्या है पूरा मामला और क्या हैं आरोप?

यह दर्दनाक मामला मई 2025 का है।

इंदौर के रहने वाले राजा रघुवंशी शादी के बाद अपनी पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ हनीमून मनाने मेघालय गए थे।

पुलिस जांच और अभियोजन पक्ष के अनुसार, सोनम ने अपने प्रेमी और भाड़े के तीन शूटरों के साथ मिलकर पति की हत्या की खौफनाक साजिश रची।

आरोप है कि सोनम अपने पति को मेघालय के ईस्ट खासी हिल्स इलाके में पहाड़ियों के बीच एक सुनसान जगह पर ले गई।

वहाँ पहले से पीछा कर रहे तीन हमलावरों ने राजा रघुवंशी की बेरहमी से हत्या कर दी और उनके शव को गहरी खाई में फेंक दिया।

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घटना के बाद आरोपी सोनम वहां से फरार हो गई।

पुलिस को राजा रघुवंशी का शव ढूंढने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

करीब 10 दिन बाद ड्रोन कैमरों की मदद से खाई से शव बरामद किया गया।

शव की हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि चेहरा पहचान में नहीं आ रहा था, जिसके बाद शरीर पर मौजूद टैटू और निशानों से उनकी पहचान की गई।

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पुलिस जांच और गिरफ्तारी 

जांच के दौरान पुलिस ने जब सह-आरोपियों को गिरफ्तार किया, तब इस साजिश का पर्दाफाश हुआ।

प्रेमी की सलाह पर सोनम ने उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में पुलिस के सामने सरेंडर किया।

इसके बाद जून 2025 में सोनम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और मामले में चार्जशीट दाखिल की गई।

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निचली अदालत और हाई कोर्ट से कैसे मिली थी राहत?

अप्रैल 2026 में ईस्ट खासी हिल्स की जिला एवं सत्र अदालत ने सोनम को तकनीकी आधार पर जमानत दे दी थी।

निचली अदालत का मानना था कि पुलिस गिरफ्तारी के कानूनी कारणों और आधारों को सही तरीके से आरोपी तक पहुँचाने में विफल रही।

मेघालय सरकार ने इस फैसले को मेघालय हाई कोर्ट में चुनौती दी।

हालांकि, 29 जून 2026 को हाई कोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा और कहा कि गिरफ्तारी के मेमो में तकनीकी खामियां थीं।

इसके बाद मेघालय सरकार ने न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सुप्रीम कोर्ट में मेघालय सरकार की दलीलें

सुप्रीम कोर्ट में मेघालय सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने तीखी दलीलें दीं।

उन्होंने अदालत को बताया कि यह केवल एक टाइपिंग की गलती थी।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा: “गिरफ्तारी मेमो तैयार करते समय केवल एक कानूनी धारा का नंबर गलत टाइप हो गया था। हत्या से जुड़ी धारा 103 की जगह गलती से धारा 403 लिख गई थी। इतनी छोटी और क्लैरिकल गलती के आधार पर इतने संगीन जुर्म की आरोपी को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।”

उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यदि सोनम बाहर रहती हैं, तो वह फरार हो सकती हैं या गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और अंतिम फैसला

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने मामले की सुनवाई की।

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सोनम के वकील को दो विकल्प दिए थे—या तो सोनम खुद सरेंडर कर दें या फिर कोर्ट मेरिट के आधार पर जमानत रद्द करने का फैसला सुनाएगी।

पीठ ने यह भी कहा कि जब तक निचली अदालत में मुख्य गवाहों के बयान दर्ज नहीं हो जाते, तब तक सोनम को जेल में रहना चाहिए।

सोनम के वकील ने तर्क दिया कि उनकी मुवक्किल बेगुनाह हैं और पूरा मामला केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों (Circumstantial Evidence) पर आधारित है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया और सोनम की जमानत रद्द करते हुए 3 हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का अंतिम निर्देश दिया।

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