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‘अविमुक्तेश्वरानंद तो अभी जगद्गुरु भी नहीं, रथ पर स्नान शास्त्र विरुद्ध’- माघ मेला विवाद पर बोले रामभद्राचार्य

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Nisha Rai
Nisha Rai
निशा राय, पिछले 14 सालों से मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन्होंने दैनिक भास्कर डिजिटल (M.P.), लाइव हिंदुस्तान डिजिटल (दिल्ली), गृहशोभा-सरिता-मनोहर कहानियां डिजिटल (दिल्ली), बंसल न्यूज (M.P.) जैसे संस्थानों में काम किया है। माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय (भोपाल) से पढ़ाई कर चुकीं निशा की एंटरटेनमेंट और लाइफस्टाइल बीट पर अच्छी पकड़ है। इन्होंने सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम) पर भी काफी काम किया है। इनके पास ब्रांड प्रमोशन और टीम मैनेजमेंट का काफी अच्छा अनुभव है।

Rambhadracharya on Avimukteshwaranand: माघ मेले के दौरान संगम स्नान को लेकर छिड़ा विवाद अब संतों के बीच भी पहुंच गया है।

हाल ही में ग्वालियर पहुंचे पद्म विभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर तीखा हमला बोला है।

उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के आचरण को ‘शास्त्र विरुद्ध’ बताते हुए स्पष्ट किया कि धर्म और मर्यादा से ऊपर कोई नहीं है।

‘वो तो अभी जगद्गुरु भी नहीं’

रामभद्राचार्य महाराज ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा, “मैं तो जगद्गुरु हूं, लेकिन वह तो अभी जगद्गुरु की श्रेणी में भी नहीं आते।”

उन्होंने प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान से रोके जाने की घटना को न्यायसंगत बताया।

रामभद्राचार्य का तर्क है कि जब पुलिस और प्रशासन ने मर्यादा का हवाला देते हुए उन्हें रोका था, तो उन्हें रुकना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि गंगा तक रथ या पालकी में बैठकर जाना शास्त्रों के नियमों का उल्लंघन है।

स्वयं का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वे स्वयं संगम स्नान के लिए पैदल जाते हैं।

ये पहला मौका नहीं है जब रामभद्राचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की आलोचना की है। इससे पहले भी वो उनके शंकराचार्य पद के बारे में सवाल उठा चुके हैं।

“मैं इसकी कुंडली निकाल दूंगा तो इसको बहुत बुरा लग जाएगा शॉर्टकट में समझ लीजिए जो कश्मीर में धारा 370 वापस लाना चाहता हूं जो उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने की बात करता हो जो हिंदू जोड़ो यात्रा का विरोध करता हो वह हिंदूनिष्ठ और देशभक्त नहीं हो सकता है।”

धीरेंद्र शास्त्री का समर्थन

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हाल ही में हिंदुओं को ‘चार बच्चे पैदा करने’ की सलाह दी थी, जिस पर काफी विवाद हुआ था।

इस मुद्दे पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य खुलकर उनके समर्थन में आए हैं।

उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के बयान को राष्ट्रहित और धर्म की रक्षा के लिए सही बताया।

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दिग्विजय सिंह पर वार, ‘हिंदू’ शब्द की व्याख्या

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘हिंदू’ शब्द फारसी मूल का है, रामभद्राचार्य ने कड़ी आपत्ति जताई।

उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह को शास्त्रों का लेशमात्र भी ज्ञान नहीं है।

उन्होंने तंत्र शास्त्र और प्राचीन सभ्यताओं का उदाहरण देते हुए बताया कि ‘हिंदू’ शब्द और उसकी परिभाषा हमारे पुरातन ग्रंथों और श्लोकों में स्पष्ट रूप से वर्णित है।

उन्होंने इसे सिंह की अज्ञानता करार देते हुए कहा कि जो व्यक्ति शास्त्रों को नहीं जानता, उसकी बातों पर अधिक टिप्पणी करना व्यर्थ है।

काशी मूर्ति विवाद और सरकारी पक्ष

काशी के मणिकर्णिका घाट पर मूर्ति तोड़े जाने की खबरों पर जगद्गुरु ने स्थिति स्पष्ट की।

उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मामले की पूरी जानकारी जुटाई है। वहां कोई प्राचीन या प्रमाणित मूर्ति नहीं तोड़ी गई है, बल्कि घाट के विस्तार और सुंदरीकरण का कार्य चल रहा है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर कोई विधिवत स्थापित मूर्ति होती तो वे खुद इसका विरोध करते, लेकिन विकास कार्यों को गलत रंग देना उचित नहीं है।

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